Tue. Feb 7th, 2023
आज से होने जा रहे हैं ये छह बदलाव, आपकी जेब पर ऐसे पड़ेगा असर

आज यानी 1 जुलाई 2022 से आपकी जेब से जुड़े कई बदलाव होने वाले हैं.

आज यानी 1 जुलाई 2022 से आपकी जेब से जुड़े कई बदलाव होने वाले हैं. ये महत्वपूर्ण बदलाव हैं, जिनकी हर नागरिक को जानकारी होनी चाहिए. ये वित्तीय बदलाव टैक्सेशन, शेयर बाजार और सैलरी से संबंधित हैं.

आज यानी 1 जुलाई 2022 से आपकी जेब से जुड़े कई बदलाव होने वाले हैं. ये महत्वपूर्ण बदलाव हैं, जिनकी हर नागरिक को जानकारी होनी चाहिए. ये वित्तीय बदलाव टैक्सेशन, शेयर बाजार (Share Market) और सैलरी से संबंधित हैं. जहां केंद्र सरकार इस बात को लेकर निश्चित है कि क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) ट्रांजैक्शन से बने कैपिटल गैन पर टैक्स (Tax) लगाया जाएगा. वहीं, सरकार ने नए लेबर कोड पर कोई पुष्टि नहीं की है. आइए जानते हैं कि 1 जुलाई से क्या-क्या बदलाव होने जा रहे हैं.

पैन-आधार लिंक कराना होगा महंगा

पैन को आधार से लिंक किए बिना उसे एक्टिव रखने की डेडलाइन को 31 मार्च 2023 तक बढ़ा दिया गया था. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 29 मार्च 2022 की तारीख वाले नोटिफिकेशन के जरिए यह ऐलान किया था. लेकिन अगर आप 30 जून 2022 या उससे पहले अपने पैन को आधार से लिंक करते हैं, तो आपको 500 रुपये का चार्ज देना होता था. वहीं, अगर आप आज यानी 1 जुलाई 2022 या उसके बाद आधार और पैन को लिंक करते हैं, तो 1,000 रुपये देने की जरूरत पड़ेगी. यानी 30 जून तक अगर आप अपने आधार और पैन को लिंक करा देते हैं, तो कम जुर्माना लगेगा.

क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर टीडीएस

वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) पर कटने वाले टीडीएस को लेकर इनकम टैक्स विभाग ने एक डिटेल गाइडलाइन जारी की है. इसमें बताया गया है कि वीडीए या क्रिप्टोकरेंसी पर लगने वाले टीडीएस (TDS) में किन-किन बातों की जानकारी शामिल की जाएगी. टीडीएस के साथ क्रिप्टोकरेंसी के ट्रांसफर की तारीख और पेमेंट का मोड बताना जरूरी होगा. 1 जुलाई से वीडीए या क्रिप्टोकरेंसी के पेमेंट पर 1 परसेंट टीडीएस कटेगा. हालांकि, यह टैक्स तभी कटेगा जब एक साल में क्रिप्टोकरेंसी के लिए 10,000 रुपये से अधिक का पेमेंट किया जाएगा. इस बार के बजट में नए प्रावधान का ऐलान किया गया है. इसी के मुताबिक आईटी एक्ट में सेक्शन 194S जोड़ा गया है. यहां टीडीएस का मतलब डिडक्शन एट सोर्स है.

आपका ट्रेडिंग अकाउंट हो सकता है बंद

अगर आपने अपना डीमैट-ट्रेडिंग खाते का केवाईसी नहीं कराया था, तो आपके पास यह करने के लिए 30 जून तक का समय ही था. पहले इसकी डेडलाइन 31 मार्च 2022 थी. अब जो भी डीमैट या ट्रेडिंग खाते खुले हैं या खुल रहे हैं, उनमें छह तरह की जानकारी देना जरूरी है. इन जानकारियों में नाम, पता, पैन, वैध मोबाइल नंबर, कमाई, सही ईमेल आईडी के बारे में बताना जरूरी है. साथ ही, ग्राहकों का आधार नंबर उनके पैन से लिंक होना चाहिए.

नियम के मुताबिक, अगर किसी खाताधारक ने डीमैट और ट्रे़डिंग खाते में इन जानकारियों को अपडेट नहीं करता है, तो उसका अकाउंट निष्क्रिय यानी इनेक्टिव कर दिया जाएगा. उसके खाते में पहले से जो शेयर या पोर्टफोलियो हैं, वे बने रहेंगे, लेकिन नई तरह की कोई भी खरीद-फरोख्त नहीं कर पाएंगे. यह खाता दोबारा तभी सक्रिय होगा जब उसमें केवाईसी डिटेल को अपडेट किया जाएगा.

नए लेबर कोड

नौकरीपेशा लोगों की सैलरी, छुट्टी, पीएफ आदि के नियमों को लेकर काफी बदलाव होने जा रहा है. सरकार की ओर से नया वेज कोड बना दिया गया है और बताया जा रहा है कि ये आज यानी 1 जुलाई से लागू होंगे. हालांकि, अभी तक इसे लेकर कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. बता दें कि पहले 29 केंद्रीय लेबर कानून के तहत नौकरीपेशा लोगों के लिए नियम बनाए गए थे. अब सरकार ने इन्हें मिलाकर 4 नए कोड में बदल दिया है. सरकार की ओर से बनाए गए नए 4 कोड में इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और कोड ऑन वेजेज शामिल हैं. लेबर कोड्स में कुछ नए कॉन्सेप्ट लाए गए हैं. इसमें सबसे बड़ा बदलाव वेज की परिभाषा के विस्तार का है.

सरकार ने यह तय कर दिया है कि अब सैलरी स्ट्रक्चर में बेसिक सैलरी का हिस्सा 50 फीसदी होना आवश्यक है, इस वजह से लोगों की इन हैंड सैलरी कम हो जाएगी.

इसके अलावा सरकार की ओर से वर्किंग आर के रूप में 48 घंटे का वक्त तय किया गया है. अगर 6 दिन काम किया जाता है तो आपकी शिफ्ट 8 घंटे की होगी. अगर चार दिन ही आप काम करते हैं और तीन दिन वीकऑफ लेते हैं तो ऐसी स्थिति में आपको 12 घंटे तक काम करना होगा.

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सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर और डॉक्टरों के लिए इनकम टैक्स नियम

डॉक्टर, यूट्यूबर और इंफ्लूएंसर, जिन्हें कंपनियों से मुफ्त चीजें मिलती हैं, उन्हें 1 जुलाई से इन चीजों के लिए टैक्स का भुगतान करना होगा. सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर को अगर कार, मोबाइल, कपड़े आदि मिलते हैं, तो उन्हें 10 फीसदी टीडीएस का भुगतान करना पड़ेगा. हालांकि, अगर प्रोडक्ट को सर्विसेज का इस्तेमाल करने के बाद वापस कर दिया जाता है, तो वह सेक्शन 194R के तहत नहीं आएगा.

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