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इस प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी में सरकार बनेगी सबसे बड़ी शेयर होल्डर, 33% लेगी हिस्सेदारी

सरकार के पास 33 फीसदी हिस्सेदारी होगी.

वोडाफोन आइडिया के लिए बड़ी राहत की खबर है. 16 हजार करोड़ के इंट्रेस्ट पेमेंट के बदले सरकार कंपनी में 33 फीसदी हिस्सेदारी लेगी. इस डील के पूरा होने के बाद सरकार के पास कंपनी की सबसे बड़ी हिस्सेदारी होगी.

वोडाफोन आइडिया की वित्तीय स्थिति बहुत खराब है. इस टेलीकॉम कंपनी (Vodafone Idea) को राहत देते हुए सरकार ने भुगतान के बदले कंपनी में शेयर लेने का फैसला किया है. सीएनबीसी टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी को 16133 करोड़ रुपए का इंट्रेस्ट पेमेंट करना है जिसे इक्विटी में बदलने का फैसला लिया गया है. इसके बदले सरकार को कंपनी में 33 फीसदी हिस्सेदारी मिल जाएगी और वह सबसे बड़ी हिस्सेदार बन जाएगी. हालांकि, इसे मार्केट रेग्युलेटर सेबी से मंजूरी की जरूरत होगी. सेबी से अप्रूवल मिलने के बाद वोडाफोन आइडिया में सरकार के पास सबसे बड़ा हिस्सा होगा.

सबसे बड़ी हिस्सेदारी के बावजूद वह प्रमोटर कैटिगरी में नहीं रहेगी. यह डील पब्लिक ओनरशिप के तहत पूरी की जाएगी. सरकार का कोई प्रतिनिधि कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल नहीं होगा. कंपनी की वित्तीय स्थिति में सुधार आने के बाद सरकार धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी घटाएगी. कुल मिलाकर सरकार साइलेंट इन्वेस्टर के रूप में काम करेगी.

फंड रेजिंग कर रही है वोडाफोन आइडिया

इस डील के पूरा होने के बाद वोडाफोन आइडिया में सरकार की हिस्सेदारी 33 फीसदी, वोडाफोन पीएलसी और आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिस्सेदारी मिलाकर 50 फीसदी के करीब होगी. पिछले दिनों सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर को राहत देते हुए रिलीफ पैकेज का ऐलान किया था. इसी पैकेज में देनदारी को इक्विटी में बदलने का विकल्प दिया गया था. रिलीफ पैकेज के बाद वोडाफोन आइडिया ने अपने प्रमोटर बिड़ला ग्रुप और वोडाफोन से मार्च में 4500 करोड़ का फंड इकट्ठा किया है. अब इनकी हिस्सेदारी बढ़कर 74.9 फीसदी हो गई थी.

एजीआर बकाए को छह किस्तों में लौटाएगी कंपनी

इसके अलावा वोडाफोन आइडिया ने 8837 करोड़ के एजीआर बकाए को छह किस्तों में चार साल बाद लौटाने का फैसला किया है. यह एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू यानी AGR बकाया वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए है. डिपार्टमेटं ऑफ टेलीकॉम की तरफ से यह राहत कंपनी को हाल फिलहाल में पेश की गई थी.

इंट्रेस्ट पार्ट को इक्विटी में बदला गया है

DoT की तरफ से भारती एयरटेल को भी 3000 करोड़ के एजीआर बकाए को लेकर इस तरह का विकल्प दिया गया है जिसपर कंपनी विचार कर रही है. कंपनी को इस संबंध में 30 जून तक अपना फैसला बताना होगा. रिलायंस जियो पर इस अवधि में कोई बकाया नहीं है. रिलीफ पैकेज के तहत सरकार पहले ही वित्त वर्ष 2016-17 तक के एजीआर बकाए को चार सालों के लिए टाल दिया है. वोडाफोन आइडिया ने वित्त वर्ष 2016-17 तक के एजीआर बकाए को चार साल बाद पेमेंट करने का विकल्प चुना और कहा कि इंट्रेस्ट को इक्विटी में बदला जाएगा. इसी के तहत सरकार 33 फीसदी हिस्सेदारी लेगी.

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किस कंपनी पर कितना बकाया?

वित्त वर्ष 2016-17 तक वोडाफोन आइडिया पर एजीआर बकाया 58254 करोड़ का है. इसमें से कंपनी ने 7854 करोड़ रुपए जमा किए हैं. एयरटेल पर एजीआर बकाया 43000 करोड़ का है जिसमें से उसने 18 हजार करोड़ जमा किया है. एजीआर का बकाया सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर निकाला गया है.

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