Wed. Feb 8th, 2023
उदयपुर और अमरावती हत्या मामले की जांच एनआईए के जिम्मे.. CBI से कैसे अलग है NIA, जानिए सबकुछ

NIA and CBI: सीबीआई और एनआईए की कार्यशैली भी अलग है.

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सीबीआई हो या एनआईए.. दोनों ही केंद्र सरकार के अधीन संचालित होने वाली जांच एजेंसी है. दोनों ही एजेंसियों के अपने विशेष कोर्ट होते हैं, जहां संबंधित मामलों की सुनवाई होती है.

राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल की हत्या के बाद महाराष्ट्र के अमरावती में भी एक केमिस्ट की हत्या का मामला चर्चा में है. अमरावती की घटना 22 जून की है, जबकि उदयपुर की घटना 28 जून की. दोनों ही घटनाओं के पीछे वजह सेम बताई जा रही है- नुपूर शर्मा के समर्थन में की गई पोस्ट. राजस्थान और महाराष्ट्र पुलिस की विशेष टीम तो मामलों की जांच कर ही रही है, दूसरी ओर दोनों ही मामलों की जांच एनआईए (NIA) यानी नेशनल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी को भी सौंप दी गई है. केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने इन मामलों पर संज्ञान लेते हुए एनआईए को जांच का आदेश दिया है. उदयपुर वाली घटना में एनआईए की टीम ने काफी कुछ पता लगाया है, जबकि एजेंसी की एक टीम अमरावती पहुंच कर भी मामले की जांच कर रही है.

यह तो आप जानते ही होंगे कि एनआईए एक केंद्रीय जांच एजेंसी है और गृह मंत्रालय के आदेश पर यह बड़े आपराधिक और आतंकी मामलों की जांच करती है! हमने कई मामलों में ऐसा देखा है कि किसी राज्य में हुई घटनाओं की जांच के लिए कई बार सीबीआई जांच की मांग की जाती है, लेकिन उदयपुर और अमरावती के मामलों में एनआईए जांच कर रही है. एक सवाल ये भी है कि एनआईए, सीबाआई से किन मायनों में अलग है. आइए डिटेल में समझने की कोशिश करते हैं.

क्या है सीबीआई, कैसे काम करती है?

सीबीआई (CBI) यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, जिसका गठन 1963 में हुआ था. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले हत्या, भ्रष्टाचार, घोटाले जैसे क्राइम और राष्ट्रीय हित के खिलाफ होने वाले अपराधों जांच करती है. शुरुआत में इसका काम मुख्यत: भ्रष्टाचार, घोटाले वगैरह की जांच तक सीमित था, लेकिन 1965 में हत्या, किडनैपिंग, आतंकी घटना वगैरह की जांच का अधिकार भी इसे दिया गया. इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है.

  1. सीबीआई का ‘एंटी करप्शन डिवीजन’ केंद्रीय सरकारी कर्मियों, केंद्रीय लोक उपक्रमों (PSUs), केंद्रीय वित्तीय संस्थानों और कर्मचारियों से जुड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी वाले मामलों की जांच करता है.
  2. इसका ‘इकोनॉमिक्स ऑफेंस डिवीजन’ बैंक या वित्तीय धोखाधड़ी, आयात-निर्यात और विदेशी मुद्रा अतिक्रमण, नारकोटिक्टस, सांस्कृतिक संपत्ति की तस्करी से संबंधित मामलों की जांच करती है.
  3. वहीं, ‘स्पेशल क्राइम डिवीजन’ आतंकवाद, बॉम्ब ब्लास्ट, रेप और हत्या (संवेदनशील मामले), फिरौती के लिए अपहरण, माफिया और अंडरवर्ल्ड क्राइम संबंधित मामलों की जांच करता है.

NIA क्या है, कैसे काम करती है?

एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी भारत की सबसे ताकतवर जांच एजेंसी के रूप में जानी जाती है. मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद 31 दिसंबर, 2008 को इसका गठन किया गया. उद्देश्य- देश की सुरक्षा, संप्रभुता और अखंडता को बरकरार रखना. देश की शांति भंग करनेवालों की जांच कर उसे सजा तक पहुंचाना. यह देश की प्राथमिक आतंकवाद विरोधी टास्क फोर्स है. इसका मुख्यालय भी दिल्ली में है.

एनआईए केा अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई की तरह पावर दी गई है. आतंकवाद, देश विरोधी गतिविधियां, परमाणु ठिकाने से जुड़े अपराधों की जांच का अधिकार एनआईए के पास है. केंद्र सरकार के आदेश पर एजेंसी मामलों की जांच करती है. एजेंसी को जांच के लिए देश-विदेश कहीं भी जाने का अधिकार है.

जांच को लेकर कुछ बातें क्लियर कर लें

  1. सीबीआई हो या एनआईए.. दोनों ही केंद्र सरकार के अधीन संचालित होने वाली जांच एजेंसी है.
  2. सीबीआई और एनआईए, दोनों ही एजेंसियों के अपने विशेष कोर्ट होते हैं, जहां संबंधित मामलों की सुनवाई होती है.
  3. एनआईए को किसी भी राज्य सरकार की अनुमति की जरूरत नहीं होती है. एनआईए चाहे तो देश के किसी भी राज्य में जाकर जांच कर सकती है.
  4. वहीं देश में आतंकवाद से जुड़े अपराधों की जांच के लिए एनआईए को जरूरी लगे तो विदेश जाकर भी जांच कर सकती है.
  5. एनआईए की कोर्ट में ट्रायल जारी हो तो आरोपी को दूसरी अदालतों में पेश होने से रोका जा सकता है. कमजोर सबूतों के आधार पर आरोपी को कोर्ट बेल देना चाहती है जो एएनआई बंद लिफाफे में सबूत या जानकारी साझा कर सकती है.
  6. सीबीआई जांच के लिए राज्यों की सरकारें चाहें तो जरूरत महसूस होने पर मांग कर सकती है. केंद्र सरकार की अनुमति से सीबीआई जांच शुरू करती है.
  7. सीबीआई को जांच के लिए संबंधित राज्य सरकारों की पूर्व सहमति जरूरी होती है. ऐसा नहीं करने पर राज्य सरकार के साथ क्लेश की स्थिति पैदा होती है. हालांकि कुछ अपवाद भी हैं.
  8. भ्रष्टाचार निरोधी अधिनियम की धारा 17 के तहत सीबीआई को किसी अफसर के खिलाफ जांच करने के लिए सरकार की इजाजत लेने की जरूरत नहीं है. हालांकि जांच के आदेश देते वक्त कोर्ट को खास एहतियात बरतना होगा.

CBI और NIA की सक्सेस रेट

सीबीआई के बारे में सामान्य धारणा है कि इसका सक्सेस रेट कम है. सितंबर 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सफलता दर गिरने को लेकर सख्त टिप्पणी की थी और फटकार लगाई थी. कोर्ट ने इस बारे में बताने को कहा था. इसके ​बाद सीबीआई ने अक्टूबर 2021 में अदालत को बताया था कि उसने कन्विक्शन रेट यानी दोष सिद्धि दर में करीब 65 से 70 फीसदी सफलता हासिल कर ली है और अगस्त 2022 तक इसे 75 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है. अभी के हिसाब से देखें तो इस टारगेट के लिए अब दो महीने रह गए हैं.

अब बात करते हैं एनआईए की. स्टेट पुलिस, सीआईडी, सीबीआई की तुलना में एनआईए का सक्सेस रेट सबसे बेहतरीन रहा है. एनआईए जिन मामलों की जांच करती है, उनमें सफलता दर 93 फीसदी तक रही है. इस एजेंसी ने कई बड़े मामलों खासकर आतंकवाद से जुड़े केसेस को सुलझाया है. देश के अलग-अलग हिस्सों में चलने वाले आतंक के मॉॉड्यूल को जड़ से खत्म किया है. 2009-14 के यूपीए कार्यकाल में करीब 195 मामलों की जांच इसके जिम्मे थी और सक्सेस रेट 100 फीसदी रहा. वहीं पीएम मोदी के पहले कार्यकाल यानी 2014-19 के बीच एनआईए के पास 80 मामले आए, जिनमें कन्विक्शन रेट 80 फीसदी रहा है.

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