Tue. Feb 7th, 2023
कमजोर मॉनसून के कारण जून में प्रभावित हुई खरीफ फसलों की बुवाई, अब ये है किसानों की आगे की रणनीति

रोपाई के लिए धान का पौध उखाड़ते हुए किसान.

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कमजोर मॉनसून (Monsoon) ने खरीफ फसलों की बुवाई को बुरी तरह से प्रभावित किया है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल के अब तक के सरकारी आंकड़ों की तुलना में 15,70,000 हेक्टेयर कम है.

कमजोर मॉनसून के झटके ने इस साल खरीफ फसलों (Kharif Crops) की बुवाई को बुरी तरह से प्रभावित किया है. एक जुलाई तक की रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल के अब तक के सरकारी आंकड़ों की तुलना में 15,70,000 हेक्टेयर कम है. इसमें सबसे ज्यादा कमी धान की खेती (Paddy Farming), ज्वार, रागी, मक्का और मूंगफली और नाइजर सीड में देखने को मिला है. इस साल एक जुलाई तक 278.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है. जबकि पिछले साल इस अवधि में 294.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. यानी पिछले साल के मुकाबले इस साल बुवाई 5.33 फीसदी पिछड़ गई है. कृषि क्षेत्र के जानकार इसके पीछे कुछ क्षेत्रों में कम बारिश (Rain) को मानते हैं. इस साल कपास, धान और सोयाबीन उत्पादक कुछ क्षेत्रों में कम बारिश हुई है.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, इस साल 1 जुलाई तक अरहर की बुवाई 10.57 लाख हेक्टेयर में हुई है. जबकि 2021 में इस अवधि के दौरान 12.27 लाख हेक्टेयर में इसकी बुवाई हो चुकी थी. ज्वार की बुवाई एक जुलाई 2022 तक 1.78 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले साल 2.75 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. रागी की बुवाई इस साल अब तक 0.07 लाख हेक्टेयर में हुई है. जबकि पिछले साल 0.14 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. मक्का की बुवाई भी काफी पिछड़ गई है. इस साल 1 जुलाई तक 19.03 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई है. जबकि पिछले साल 22.09 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी.

कपास के रकबे में देखी जा रही बढ़ोतरी

तिलहन फसलों में मूंगफली की बुवाई मौजूदा सीजन में 13.71 लाख हेक्टेयर में हुई है. जबकि पिछले साल 18.28 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. नाइजर सीड की बुवाई पिछले साल के मुकाबले 78.57 फीसदी तक पिछड़ गई है. ऐसा नहीं है कि सभी खरीफ फसलों की बुवाई पीछे है. अगर कपास की बात करें तो पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. महाराष्ट्र और कर्नाटक के किसान सबसे अधिक मात्रा में कपास की बुवाई कर रहे हैं और इन दोनों राज्यों में विशेष तेजी देखी जा रही है.

समय से पहले भारत में मॉनसून के दस्तक देने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि जून में अच्छी बारिश होगी. मॉनसून की प्रगति भी अच्छी थी, लेकिन खेती के लायक पर्याप्त बारिश नहीं हुई और किसान इंतजार करते रहे. अब भारत मौसम विज्ञान विभाग की तरफ से किसानों के लिए अच्छी खबर सामने आई है. IMD ने कहा है कि जुलाई में मॉनसून सामान्य रहेगा और अच्छी बारिश होगी. उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्से, मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में जुलाई के महीने में सामान्य से अच्छी बारिश होगी. IMD के मुताबिक, पूर्वी और मध्य पूर्वी भारत में इस महीने सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है. यह इस क्षेत्र के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि कई हिस्से बाढ़ से प्रभावित हैं.

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जुलाई और अगस्त का महीना महत्वपूर्ण

जुलाई और अगस्त का महीना दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है. मॉनसून सीजन के 4 महीनों में होने वाली कुल बारिश का 60 प्रतिशत हिस्सा इन्हीं दो महीनों में होता है. साथ ही, किसान खरीफ फसलों की बुवाई कर चुके हैं, ऐसे में उनके बढ़वारा और अच्छे पैदावार के लिए भी इन महीनों में हुई बारिश काफी लाभकारी होती है. मौसम विभाग के पूर्वानुमान से किसानों में उम्मीद जगी है और उन्हें विश्वास है कि खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आएगी और काम समय से पूरा हो जाएगा.

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