Tue. Feb 7th, 2023
कितना ताकतवर है DRDO का बिना पायलट के उड़ान भरने वाला विमान जो दुश्मनों के छक्के छुड़ाएगा और ड्रोन से कितना अलग है

DRDO के मानवरहित विमान ने शुक्रवार को कर्नाटक में उड़ान भरी.

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Feature of UAV: रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान ने मानवरहित विमान को तैयार किया है. शुक्रवार को इस विमान ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग स्थित एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में पहली उड़ान भरी. कैसा है DRDO का नया पायलट रहित विमान, यह ड्रोन से कितना अलग है? जानिए इन सवालों के जवाब

रक्षा अनुसंधान और विकास संस्थान (DRDO) ने मानवरहित विमान को तैयार किया है. शुक्रवार को इस विमान ने कर्नाटक के चित्रदुर्ग (Chitradurga) स्थित एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में पहली उड़ान भरी. डीआरडीओ के ऑटोनॉमस फ्लाइंग विंग टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर (Autonomous Flying Wing Technology Demonstrator) की पहली उड़ान चर्चा में है. इसे अनमैन्ड फाइटर एयरक्राफ्ट यानी यूएफए (UFA) भी कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि इसे चलाने के लिए पायलट की जरूरत नहीं होती है. हाल में इसका सफल ट्रायल भी किया गया है. वहीं, रक्षा मंत्रालय ने इसे मील का पत्थर बताया है.

कैसा है DRDO का नयापायलट रहित विमान, यह ड्रोन से कितना अलग है और भारतीय सेना में इसे कब शामिल किया जाएगा? जानिए इन सवालों के जवाब

कितना खास है नया पायलट रहित विमान?

इससे सेना कई तरह से मदद मिलेगी. जैसे- इसकी मदद से मिसाइलें, बम और गाइडेड आयुध दागे जा सकते हैं. जो दुश्मनों के छक्के छुड़ा सकते हैं. इसमें इंसान न होने के कारण जवान की मौत का खतरा भी नहीं है.इस विमान का एयरफ्रेम, निचला ढांचा, पहिए, फ्लाइट कंट्रोल और ज्यादा सिस्टम को देश में ही तैयार किया गया है. इस तरह ये आत्मनिर्भर भारत को दिशा में उठाया गया अहम कदम है.

ट्वीट में देखें विमान ने कैसे भरी उड़ान

पायलट रहित विमान और ड्रोन में कितना फर्क है?

दोनों में सबसे बड़ा फर्क दूरी को लेकर है. ड्रोन उतनी दूरी नहीं तय कर सकता क्योंकि इसे साधारण एरियल तकनीक से तैयार किया जाता है, इसलिए लम्बी दूरी तय करना उनकी पहुंच के बाहर होता है. ये एक तय दूरी तक ही उड़ पाते हैं. वहीं, पायलट रहित विमान लम्बी दूरी तय कर सकते हैं. इसमें टर्बोफैन इंजन लगा होता है, जिसकी मदद यह 700 किलोमीट या इससे अधिक दूरी तक की सफल उड़ान भर सकते हैं.

हालिया ट्रायल के दौरान इसके मानकों पर जांचा गया. जैसे- टेकऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और टचडाउन. यह विमान सभी मानकों पर खरा उतरा है. रक्षा मंत्रालय इस सम्बंध में ट्वीट भी किया है.

इसका इस्तेमाल कब और कैसे किया जाएगा?

इस स्वदेशी UFA को सेना में 2025 तक शामिल किया जाएगा. इस खास बिना पायलट वाले विमान की तैनाती सीमा पर की जाएगी. इस तरह धीरे-धीरे रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भन अभियान को बढ़ावा मिलेगा और सेना का सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा.

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रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, विमान पूरी तरह से ऑटोनॉमस मोड में ऑपरेट हुई. एयरक्राफ्ट ने एक सफलतापूर्वक उड़ान का प्रदर्शन किया, जिसमें टेकऑफ, वे पॉइंट नेविगेशन और एक स्मूथ टचडाउन शामिल है. ये एयरक्राफ्ट आगामी बिना पायलट के चलने वाली विमानों के डेवलपमेंट की दिशा में एक मील का पत्थर है. यह आत्मनिर्भरता की दिशा में एक जरूरी कदम भी है’.

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