Wed. Feb 8th, 2023
किसानों को नहीं होगी डीएपी की कमी, प्रतिबंधों के बावजूद रूस बना सबसे बड़ा खाद सप्लायर

रुस से डीएपी का आयात कर रहा भारत

Image Credit source: File Photo

DAP Import: भारत के किसानों को अब डीएपी खाद की कमी नहीं होगी. क्योंकि रुस पर पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भारत वहां से डीएपी का आयात कर रहा है. अच्छी खबर यह है कि भारत द्वारा इसकी खरीद के लिए किया जाने वाला भुगतान अन्य देशों की तुलना में कम है.

खाद की किल्लत के बीच भारत ने लगभग 3.5 लाख टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) का रुस से आयात किया है. अप्रैल से लेकर जुलाई महीने तक डीएपी की आपूर्ति पूरी हो जाएगी. रुस-यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी देशों द्वारा रुस पर व्यापार प्रतिबंध लगाए जाने के बीच यह आयात किया गया है. डीएपी के आयात (Import) के लिए इंडियन पोटाश लिमिटेड, राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स, चंबल फर्टिलाइजर्स और कृषक भारती कोऑपरेटिव द्वारा 920-925 डॉलर प्रति टन, कॉस्ट प्लस फ्रेट (सीएफआर) की कीमत पर अनुबंध किया गया था. भारत द्वारा डीएपी की खरीद के लिए भुगतान की गई राशि अन्य देशों की तुलना में कम है. इस आयात से किसानों को राहत मिलेगी.

पड़ोसी देश बांग्लादेश के कृषि मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में 8.12 लाख टन डीएपी के आयात के लिए 1,020-1,030 डॉलर प्रति टन की वार्षिक निविदा दी थी. इसी तरह, इंडोनेशिया ने निर्यात के लिए 992 डॉलर प्रति टन सीएफआर की दर से 25000 से 26000 टन के लिए भुगतान किया है. वहीं डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्रा कमजोर पड़ने के कारण पाकिस्तान 1030 डॉलर प्रति सीएफआर की दर से डीएपी खरीद का अनुबंघ नहीं कर पाया है.

डीएपी की खपत करने वाला बड़ा देश है भारत

हालांकि, इससे दूसरे सप्लायर्स खास कर मोरक्को के ओसीपी समूह, चीन के वाईयूसी और सऊदी अरब के माडेन और एसएबीआईसी पर दबाव डालने की संभावना है. बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए उन्हें कीमतों में कटौती करनी पड़ सकती है. सूत्र बताते हैं कि यह आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने के लिए एक स्मार्ट रणनीति है. इसके तहत हमने पहली बार अमेरिका से 47,000 टन यूरिया का आयात किया है. ऐसा ही अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर छूट के लिए रूस से डीएपी (DAP Import From Russia) की खरीदारी करना भी इसी नीति का हिस्सा है. गौरतलब है कि भारत डीएपी की खपत करने वाला है एक बड़ा देश है.

जुलाई तक होगी 9.8 लाख टन की आपूर्ति

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अप्रैल से जुलाई तक 9.5-9.8 लाख टन डीएपी की आपूर्ति हो जाएगी. इनमें से 3.5 लाख टन की आपूर्ति फॉस एग्रो द्वारा की जाएगी, जिसमें मैक्सडेन और एसएबीआईसी की हिस्सेदारी 2.8 लाख टन होगी और वाईपीयूसी का हिस्सा 1.27 लाख टन और ओसीपी का 1.03 लाख टन होगा. भारत ने 2021-22 (अप्रैल-मार्च) में 4,007.50 मिलियन डॉलर मूल्य के 58.60 लाख टन डीएपी का आयात किया.

ये भी पढ़ें



आयात पर प्रतिबंधों के कारण समस्याओं का भी सामना करना पड़ा. इसके कारण फोसएग्रो को जोखिम लेना पड़ा. क्योंकि बैंक आयातकों की ओर से ऋण पत्र खोलने के लिए तैयार नहीं थे. विक्रेता के खाते में टेलीग्राफिक ट्रांसफर द्वारा भुगतान किया गया था. बाद में भौतिक रूप से आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद 7-10 दिनों के बाद माल रवाना हो गया था.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *