Sat. Jul 2nd, 2022

 विटामिन डी को “सनशाइन विटामिन’  (Sunshine Vitamin) भी कहा जाता है, क्योंकि यह पावरफुल स्टेरॉयडल हार्मोन कैल्सीट्रियोल का स्रोत है। हमारे ज्यादातर खाद्य पदार्थों में विटामिन डी की बहुत थोड़ी मात्रा मौजूद रहती है। इसलिए विटामिन डी की आवश्यकता को पूरी करने के लिए हम धूप का सेवन करते हैं। विटामिन डी की डेली रिक्वॉयरमेंट 800 आईयू प्रति दिन होती है। हड्डियों और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाए रखने, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए विटामिन डी (Vitamin D) बेहद जरूरी है। क्या धूप सेंकने और विटामिन डी लेने से कैंसर जैसे खतरनाक रोग से बचा जा सकता है?    

 विटामिन डी और कैंसर के बीच क्या संबंध है?

कुछ दशक पहले वैज्ञानिकों ने एक पैटर्न देखा। दुनिया के जिन हिस्सों में धूप ज्यादा पड़ रही थी, वहां के लोगों में कैंसर की दर कम थी। जिन हिस्सों में कम धूप पड़ रही थी, वहां के लोगों में कैंसर और इससे मरने वाले लोगों की दर ज्यादा थी। इसके बाद रिसर्चर्स ने विटामिन डी के प्रभावों का अध्ययन करना शुरू किया। 

एक्सपेरिमेंट से पता चला कि कैल्सीट्रियोल अलग-अलग सिग्नलिंग पाथवेज के जरिये एंटीकैंसर क्रियाओं को अंजाम देता है। इसमें रोगों की रोकथाम, सेल्स डेथ के अलावा, मेटास्टेसिस और एंजियोजेनेसिस का दबाव भी शामिल है। विटामिन डी न केवल कैंसर कोशिकाओं पर, बल्कि ट्यूमर माइक्रोएन्वायरमेंट पर भी गहरा प्रभाव डालता है। कैंसर सेल्स के निर्माण और उनके फैलाव पर भी विटामिन डी का प्रभाव देखा जाता है।

vitamin d dwara cancer ki rokthamकई शोध यह पता लगाने के लिए किए जा रहे हैं कि वास्तव में कई तरह के कैंसर को रोकने में सक्षम है या नहीं विटामिन डी। चित्र : शटरस्टॉक

 नियमित रूप से धूप सेंकने से किस तरह के कैंसर को रोका जा सकता है?

एपिडेमिक साइंस और दूसरे कई ऑब्जर्वेशनल डेटा से पता चला है कि विटामिन डी कैंसर के जोखिम को रोकता है। रिसर्च बताते हैं कि जिन लोगों के शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी मौजूद था, उनमें ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, ल्यूकेमिया और लिम्फोमा तथा प्रोस्टेट सहित अधिकांश कैंसर होने की संभावना कम देखी गई। ऐसे अध्ययन भी हैं, जो विटामिन डी और कैंसर के संबंध को नकार देते हैं।

कोलोरेक्टल कैंसर पर बहुत सारे शोध हुए हैं, जिनमें विटामिन डी के पर्याप्त स्तर होने पर लोगों में कोलन कैंसर होने के कम सबूत पाए गए। स्तन कैंसर होने की भी कम संभावनाएं पाई गई।

क्या कहते हैं शोध 

अमेरिकी सोसाइटी ऑफ ऑन्कोलॉजी के जून 2019 डेटा के अनुसार, मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के विटामिन डी पर अध्ययन के लिए 10 परीक्षणों में कुल 79,055 लोगों को शामिल किया गया। प्रतिभागियों ने कम से कम 3 साल के लिए सिर्फ विटामिन डी सप्लीमेंट ली। इससे विटामिन डी के महत्वपूर्ण प्रभाव को जांचा गया। इसने कैंसर से संबंधित होने वाली मौत के रिस्क को तो कम कर दिया, लेकिन कैंसर को खत्म नहीं कर पाया।

 क्या विटामिन डी के हाई डोज से कैंसर को रोका जा सकता है?

 

कैंसर की रोकथाम के लिए सबसे बड़ा रैंडम क्लिनिकल ट्रायल किया गया। इसमें पाया गया कि विटामिन डी ने केंसर डेवलपमेंट के रिस्क को कम नहीं किया। दूसरे परीक्षण में लगभग 26,000 मरीज शामिल किए गए और यह जांचा गया कि बोंस हेल्थ के लिया दिया गया विटामिन डी कैंसर को खत्म करने में प्रभावी है? परीक्षण से यह पता चला कि सामान्य बॉडी मास इंडेक्स वाले लोगों में ही विटामिन डी कैंसर से मरने की रिस्क को कम करती है।

Dana-Farber Institute में भी विटामिन डी को लेकर एक वृहत अध्ययन चल रहा है। इसके द्वारा यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या विटामिन डी की हाई डोज एडवांस स्टेज पर कोलोरेक्टल कैंसर से होने वाली मौत को रोकने में सक्षम है?

रिसर्च के आधार पर यह कहा जा सकता है कि विटामिन डी की खुराक कैंसर रोग की रोकथाम और इससे होने वाली मौत को कम करने में मदद करती है, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। बोंस और इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाए रखने के लिए शरीर में पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी रहना चाहिए। लेकिन लोगों को स्वस्थ बनाए रखने में यह कितना कारगर है, कुछ कहा नहीं जा सकता है।

डॉ सुपर्णा अजीत राव, पीडी हिंदुजा अस्पताल और एमआरसी में कंसल्टेंट मेडिकल ऑन्कोलॉजी (इंटरनल मेडिसिन)

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