Mon. Jan 30th, 2023
क्या BJP के लिए आसान होगी 2024 लोकसभा चुनाव की राह? गुजरात वाला 'पैक्स सिस्टम' देश में लागू कराने की तैयारी!

देशभर में पैक्स सिस्टम लागू करने की तैयारी

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PACS System: लोकसभा चुनाव से पहले देशभर में पैक्स सिस्टम को लागू किया जा सकता है. ये सिस्टम गुजरात में साल 2007 से काम कर रहा है. गुजरात में लगभग 2000 पैक्स इकाई हैं, जो राज्य सरकार के सहकारिता मंत्रालय से सीधे तौर पर जुड़ी हुई हैं.

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले-पहले बीजेपी (BJP PACS System) ने देशभर में 3 लाख पैक्स यानी प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी का गठन कर देश के हर पंचायत तक केंद्र सरकार की पकड़ मजबूत बनाने का प्रण लिया है. केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक हरेक पंचायत के पैक्स में कम से कम 7-10 लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा. लिहाजा इससे लगभग तीन लाख पंचायत (Panchayat) में करीब 25 से 30 लाख लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा. जबकि हरेक पंचायत में बने पैक्स से सहारे भी अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर मिलने से हजारों लोग जुड़ेंगे.

इस तरह से देशभर में बीजेपी से पंचायत स्तर पर लाखों लोग जुड़ जाएंगे. जिनके पास सरकार की पैक्स मजबूती योजना के तहत रोजगार और कमाई के साधन भी होंगे. ऐसे में बीजेपी के पास देश के तीन लाख पंचायत में एक ऐसा मजबूत और डेडिकेटेड काडर तैयार होगा, जो ग्रामीणों को बीजेपी और मोदी सरकार के पक्ष में माहौल बनाकर लोगों को बीजेपी के प्रति झुकाव पैदा करा पाएगा. बुधवार को हुए केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में पहले से चल रहे पैक्स सेंटरों के बेहतरी के लिए 2500 करोड़ रुपया आबंटित करने का फैसला लिया गया.

पहले से काम कर रहे 63000 पैक्स

इसके जरिए पहले से कार्यरत लगभग 63000 पैक्स को पहले से अधिक सुढ़ढ़ और बेहतर आय प्रदान करने वाली संस्था बनाने का भी कार्य किया जा रहा है यानी पहले से ही चल रहे 63 हजार पैक्स सेंटरों पर लगभग 3.91 लाख खर्च कर उसको कम्प्यूटरों से जोड़ा जाएगा. केंद्रीय कोऑपरेटिव मंत्रालय के नए संशोधन से पैक्स को कॉमन सर्विस सेंटर चलाने, मधुमक्खी पालन, पीडीएस सिस्टम, कोल्ड स्टोरेज और भंडारण, दूध उत्पादन व वितरण, गोबर गैस उत्पादन, बैंकिंग कॉरस्पोंडेंट के रूप में कार्य करने के साथ ही करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे कार्य करने की स्वीकृति दी जा रही है, जिससे पैक्स से जुड़े लोगों की आमदनी में इजाफा हो.

इस संस्था को बैंकिंग सिस्टम से भी बेहतर तरीके से जोड़ा जाएगा, जिससे उनको पैसे के लेन-देन के अधिक अवसर हासिल हो पाएंगे. केंद्र सरकार के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सहकारी क्षेत्र के इस बड़े तंत्र पैक्स को भारत के अधिक लोकसभा सीट वाले राज्यों महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इसे तेजी से क्रियान्वित करने की दिशा में कार्य किया जाना है. इन राज्यों में ही ढाई सौ से अधिक लोकसभा सीट हैं.

बनाया जा रहा सहकारी विश्वविद्यालय

देश में एक सहकारी विश्वविद्यालय बनाने पर काम चल रहा है. हालांकि इसका स्थान अभी तय नहीं हुआ है लेकिन इस बात की संभावना है कि ये बिहार या उत्तर प्रदेश में बन सकता है. इसमें सहकारी क्षेत्र से संबंधित पढ़ाई होगी. इससे साफ है कि सहकारी क्षेत्र पर बीजेपी सरकार का कितना फोकस है. अमूल और अन्य सहकारी संसथाओं को आटा सहित कई अन्य उत्पाद बेचने की इजाजत दी जाएगी. ये संस्थाएं ऑर्गेनिक उत्पाद भी बेचेंगी. इससे अमूल या अन्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों की कमाई बढ़ेगी, जिसका राजनीतिक लाभ बीजेपी को हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक देश की समस्त सहकारी संस्थाओं को कंप्यूटरीकृत किया जाएगा, जिससे कि घोटाला और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाया जा सके. सूत्रों के मुताबिक अमूल, इफको, कृभको और अन्य सहकारी संस्थाओं को ब्रांडेंड जैविक बीज बेचने की भी इजाजत भी दी जाएगी. जिससे किसानों से सीधा जुड़ाव हो और उनकी आमदनी में इजाफा हो. नाबार्ड और अन्य संस्थाएं ग्राम स्तर पर अधिक पैसा उपलब्ध कराएंगी. जिससे किसानों को खेती किसानी के लिए समय से पैसा हासिल हो पाए और वो अपने उत्पाद और सहकार को बाजार में बेचने के लिए बेहतर अवसर हासिल कर पाएं.

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गौरतलब है कि पैक्स सिस्टम गुजरात में बिलकुल दुरुस्त हालात में वर्ष 2007 से काम कर रहा है. अकेले गुजरात में लगभग 2000 पैक्स इकाई हैं, जो एक तरह से स्टेट गवर्नमेंट के सहकारिता मंत्रालय से सीधे तौर पर जुड़ी हैं. माना जाता है कि गुजरात में बीजेपी के जड़ जमाने में इन पैक्स इकाइयों की बड़ी भूमिका रही है. अब वही सिस्टम देशभर में लागू कराने की योजना के तहत केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय जी जान से जुट गया है. केंद्रीय सहकारिता एवं गृहमंत्री अमित शाह खुद पूरी व्यवस्था को बारीकी से मॉनिटर कर रहे हैं. बीजेपी का लक्ष्य है कि वह देशभर में सहकारी क्षेत्र में अपना प्रभुत्व और दखल बढ़ाकर अन्य दलों का प्रभाव और आर्थिक ताकत को कम कर सके, जिससे उसका प्रभाव इन राज्यों में और बढ़ जाए.

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