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खजूर की प्रोसेसिंग कर मोटी कमाई कर रहे हैं किसान, आयात पर निर्भरता कम करने में भी मिल रही मदद

खजूर की प्रोसेसिंग कर किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

Image Credit source: TV9 (फाइल फोटो)

भारत में खजूर की तुड़ाई जून-जुलाई के महीने में होती है और इस वक्त आर्द्रता काफी ज्यादा रहती है. इस कारण किसानों को प्रोसेसिंग के जरिए इसे सूखे खजूर में बदलना पड़ता है. निवेश के बाद लाभ होता देख किसानों ने प्रोसेसिंग को बड़े पैमाने पर अपना लिया है.

गुजरात के एक जिले में किसान (Farmers) बड़े पैमाने पर खजूर की खेती करते हैं. हालांकि यह भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं होता. यहीं कारण है कि भारत खजूर की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. लेकिन गुजरात के किसानों के प्रयास से आयात को थोड़ा कम करने में मदद मिल रही है. गुजरात (Gujarat) के कच्छ जिले के किसान खजूर के दो किस्मों की खेती करते हैं. इसमें इजराइली और देसी किस्म शामिल है. इजराइली किस्म को किसान सीधे बाजार में बेच देते हैं. लेकिन देसी किस्म के खजूर को वे प्रोसेसिंग के जरिए सूखे खजूर (Dry Dates) में बदल देते हैं. इससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है और वे अब अधिक से अधिक रकबे में इसकी खेती करने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं.

कच्छ जिले के अंजार के किसान खजूर से अधिक लाभ लेने के मशीन का सहारा ले रहे हैं. वे देसी किस्म के खजूर को सूखाकर माउथ फ्रेशनर बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई करते हैं. किसानों ने इसकी शुरुआत ट्रायल बेसिस पर की थी और यह उनका प्रयोग सफल रहा. किसानों ने अभी तक 14 टन सूखे खजूर का उत्पादन किया है जो इस सीजन बढ़कर 25 टन तक जा सकता है. यहां बताना जरूरी है कि भारत पाकिस्तान, इराक और यूएई जैसे देशों से हर साल 3 लाख टन सूखे खजूर का आयात करता है.

प्रोसेसिंग को अपनाकर लाभ कमा रहे किसान

सूखे खजूर को तैयार करने वाले 4 किसानों के समूह में शामिल एक किसान प्रफुल्ल पटेल ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि ड्रायर मशीन लगाने में हमलोगों ने 25 लाख रुपए का निवेश किया है. उन्होंने कहा कि भारत सूखे खजूर कई देशों से मंगाता है, लेकिन सबसे अधिक हिस्सा पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आयात होता था. यहां की जलवायु सूखे खजूर के लिए उपयुक्त है. सिंध में किसानों को खजूर को सुखाने के लिए मशीन का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता. इस कारण पाकिस्तान से आयात काफी सस्ता पड़ता था. लेकिन पुलवामा अटैक के बाद भारत ने पाकिस्तान से आयात पर 200 प्रतिशत की ड्यूटी लगा दी. इसे गुजरात के खजूर किसानों ने अपने लिए एक मौके के तौर पर लिया.

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यहां पर 19 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर की खेती होती है और प्रत्येक साल 1.8 लाख टन का उत्पादन होता है. भारत में खजूर की तुड़ाई जून-जुलाई के महीने में होती है और इस वक्त आर्द्रता काफी ज्यादा रहती है. इस कारण किसानों को मशीन के जरिए इसे सूखे खजूर में बदलना पड़ता है. निवेश के बाद लाभ होता देख किसानों ने प्रोसेसिंग को बड़े पैमाने पर अपना लिया है. अब वे न सिर्फ खजूर को सूखा कर बेचते हैं बल्कि पाउडर भी तैयार कर बाजार में उतारते हैं. इससे उन्हें काफी मुनाफा हो रहा है और भारत की आयात पर निर्भरता घट रही है.

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