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खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अगले दो सप्ताह हैं काफी महत्वपूर्ण, जानिए अभी क्या है स्थिति

खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अगले दो सप्ताह हैं काफी महत्वपूर्ण.

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IMD) ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि मॉनसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और जुलाई के पहले हफ्ते तक पूरे देश को कवर कर लेगा. 27 जून से एक बारिश का दौर शुरू होगा. इस दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होगी. इसके बाद खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी.

मॉनसून (Monsoon) की शुरुआत के साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने लगती है. इस बार मॉनसून सामान्य रहने के पूर्वानुमानों के बीच किसानों ने अच्छे से तैयारी की थी. हालांकि समय पर आगमन के बाद भी अभी तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई है. इस वजह से बुवाई में प्रगति धीमी गति से हो रही है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते मॉनसून के साथ बुवाई में तेजी आएगी और खरीफ फसलों (Kharif Crops) के लिए अगले दो सप्ताह काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं. खरीफ सीजन (Kharif Season) में किसान मुख्य रूप से धान, सोयाबीन, कपास और दलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर करते हैं.

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने पूर्वानुमान में कहा है कि मॉनसून सामान्य गति से आगे बढ़ रहा है और जुलाई के पहले हफ्ते तक पूरे देश को कवर कर लेगा. पश्चिमी विक्षोभ और नम पुरुवा हवाओं के कारण 27 जून से एक बारिश का दौर शुरू होगा. इस दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में अच्छी बारिश होगी. इसके बाद खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी.

इस बार बढ़ेगा सोयाबीन का उत्पादन

वर्तमान स्थिति की बात करें तो मध्य प्रदेश के मालवा और महाराष्ट्र के कुछ जिलों में सोयाबीन की बुवाई के लिए पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, जबकि गुजरात में किसान अच्छे रिटर्न की उम्मीद में कपास की जमकर बुवाई कर रहे हैं. हरियाणा में रुक-रुक कर हो रही प्री-मॉनसून बारिश ने किसानों को धान की फसल बोने में मदद की है. पश्चिम बंगाल में भी धान की रोपाई में तेजी देखने को मिल रही है.

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने कहा इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में बताया कि सोयाबीन की फसल की बुवाई के लिए अभी तक मॉनसून अच्छा रहा है. हालांकि मालवा क्षेत्र में कम बारिश के कारण बुवाई प्रभावित हुई है. उन्होंने कहा कि हमारे पास अभी जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय है. अगर अगले दो सप्ताह अच्छी बारिश हुई तो क्षेत्र में बुवाई का काम पूरा हो जाएग.

कपास के रकबे में होगी सबसे अधिक वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10 जून तक 79.62 लाख हेक्टेयर रकबे में खरीफ की बुवाई हो चुकी है. कृषि मंत्रालय के पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक, पिछले सीजन में भारत ने 127.20 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन किया था. इस बार इसमें और बढ़ोतरी की उम्मीद है. किसानों का सबसे अधिक जोर कपास की खेती पर है. इस बार कपास के रकबे में पर्याप्त बढ़ोतरी की उम्मीद है. इस बार रिकॉर्ड रेट मिलने से कपास की खेती को लेकर किसान उत्साहित हैं.

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हरियाणा और पंजाब के किसानों को प्री-मॉनसून बारिश से थोड़ी राहत मिली है. यहां पर बासमती धान की रोपाई का काम तेजी से चल रहा है. एक-दो दौर की अच्छी बारिश से ट्यूबवेल पर निर्भरता घटी है. वहीं पश्चिम बंगाल के जिन इलाकों में पिछले दो-तीन दिन में पर्याप्त बारिश हुई है, वहां गैर-बासमती धान की रोपाई जोरों पर है. पश्चिम बंगाल गैर-बासमती धान का सबसे बड़ा उत्पादक है. बिहार और उत्तर प्रदेश में भी आने वाले दिनों में धान की रोपाई का काम चरम पर रहेगा.

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