Wed. Feb 8th, 2023
गुजरात चुनाव में भगवा गढ़ ध्वस्त करने के इरादे से आम आदमी पार्टी ने अपनाई बीजेपी की रणनीति

अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया

Image Credit source: PTI

बीजेपी अपने गढ़ मध्य गुजरात में अपना अभियान तेज चुकी है, जहां पर आम आदमी पार्टी कमजोर है. वडोदरा मध्य गुजरात के केंद्र में है. पीएम मोदी ने अपने लोकसभा चुनाव के लिए 2014 में वडोदरा सीट को चुना था.

गुजरात में बीजेपी की उभरती रणनीति एक संकेत देती है कि पार्टी इस साल के अंत में होने वाले राज्य चुनावों में लगातार सातवीं जीत के लिए अपनी प्रमुख विरोधी कांग्रेस की जगह आम आदमी पार्टी को मुख्य विरोधी मान कर चल सकती है, हालांकि ऊपरी तौर पर भाजपा दिखा रही है कि वह कांग्रेस को विपक्ष वाली जगह दे रही है. वहीं, राज्य में बीजेपी के अपने खास स्टाइल से आगे बढ़ने पर जो स्थिति बन रही है उससे आम आदमी पार्टी खुश है.

राज्य में भाजपा एक मजबूत ताकत रही है. जब 17 सदस्यों वाला बीजेपी का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में आम आदमी पार्टी की स्कूली शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा पर एक जमीनी हकीकत की पड़ताल के लिए दिल्ली पहुंचा तो अरविंद केजरीवाल के लोग भी एक स्वर में स्वागत का दिखावा करते हुए गांधीनगर से आए अतिथियों के विरोध में खड़े हो गए.

गांधीनगर से आने वाले मेहमान पीछे अपने राज्य में पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी कर गए. गुजरात के शिक्षा मंत्री जीतू वघानी ने मंगलवार को इस बात से इनकार किया कि राज्य इकाई ने अपनी टीम दिल्ली भेजी है. हालांकि, दिल्ली बीजेपी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने गुजरात बीजेपी प्रतिनिधिमंडल की एक तस्वीर ट्वीट करते हुए कहा, “केजरीवाल के नकली दिल्ली मॉडल को देखने के लिए दिल्ली में गुजरात प्रतिनिधिमंडल का स्वागत है.” इससे पहले भगवा खेमे ने इतनी घबराहट कभी नहीं दिखाई दी थी.

इसके बाद दोनों पार्टियों की तरफ से आरोपों की बौछार शुरू हो गई. दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा के कदम का जवाब दिया. सिसोदिया ने ट्वीट किया, “अखबारों की खबरों से पता चला है कि गुजरात भाजपा की टीम दिल्ली में स्कूलों और मोहल्ला क्लीनिकों को देखने आ रही है. हमने गुजरात टीम का स्वागत करने के लिए पांच विधायकों की एक टीम बनाई है जो भाजपा टीम के साथ जाएगी.”

सिसोदिया ने आगे लिखा, “आम आदमी पार्टी के ये पांच विधायक एक हफ्ते में वहां के स्कूलों और अस्पतालों को देखने के लिए गुजरात जाएंगे. मुझे विश्वास है कि गुजरात सरकार हमारी टीम का उसी तरह से स्वागत करेगी और उन्हें वहां के स्कूलों और अस्पतालों की स्थिति देखने की अनुमति देगी.”

गुजरात आम आदमी पार्टी प्रमुख गोपाल इटालिया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा. उन्होंने मीडिया से कहा, “मैं चाहूंगा कि बीजेपी की टीम दिल्ली की व्यवस्था से कुछ सीखे और इसे गुजरात में लागू करने की कोशिश करे.” इटालिया ने कहा, “गुजरात में भाजपा नेता अपने माता-पिता और निजी स्कूलों के नाम पर ट्रस्ट शुरू कर शिक्षा का व्यवसायीकरण कर रहे हैं. मैं चाहूंगा कि भाजपा की टीम गुजरात लौटने के बाद लोगों के बीच गलत धारणा न फैलाएं.”

विकास के ‘दिल्ली मॉडल और गुजरात मॉडल’ को लेकर तीखी प्रतिस्पर्धा की लहर मनीष सिसोदिया के दो महीने पहले भावनगर के एक सरकारी स्कूल के दौरे के बाद ही शुरू हो गई थी. 2017 के बाद के चुनावी रिकॉर्ड पर एक नज़र डालें तो पता चलता है कि भाजपा गुजरात में एक भी चुनाव नहीं हारी है. यदि आप विपक्ष में मुख्य रूप से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की स्थिति जानने की कोशिश करें तो पाएंगे कि केजरीवाल की पार्टी अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस की जगह को हथियाती नजर आ रही है.

हालांकि, आम आदमी पार्टी लगातार अपने नेताओं के पार्टी छोड़ने की मुश्किल से जूझ रही है. गुजरात चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी के 850 सदस्यों के संगठन की घोषणा के एक दिन बाद वहां आंतरिक झगड़े शुरू हो गए. कुछ वरिष्ठ नेताओं ने भी इस्तीफा दे दिया. गुजरात के एक राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं, “याद रखें कि सत्ता विरोधी वोटों के विभाजन करने से भाजपा को फायदा होगा.”

फिर भी आम आदमी पार्टी गुजरात में कमजोर होने की अपनी इमेज को तोड़ने की कोशिश कर रही है. कई साल पहले जिस तरह से भाजपा ने यहां अपनी जमीन तैयार की थी आम आदमी पार्टी उसी रास्ते पर चल रही है. इसका उदाहरण मेहसाणा है जहां आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने चुनाव में सफलता के लिए बीजेपी खेमे जैसी ही रणनीति अपना कर भाजपा के गढ़ को भेदने की योजना बनाई है.

भाजपा के पास पीएम मोदी एक ब्रांड के रूप में मौजूद हैं. पार्टी को उसकी ताकत बूथ स्तर तक के प्रबंधन के कारण मिलती है, जो हर गांव में मौजूद है. आम आदमी पार्टी भी खुद को अपने जाने-माने राष्ट्रीय नेता अरविंद केजरीवाल के इर्द-गिर्द तैयार करने की कोशिश कर रही है. अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के मतदाताओं के गुस्से का फायदा उठाया जिसके परिणामस्वरूप फरवरी के चुनावों में सभी मुख्यधारा की पार्टियों को भारी हार का सामना करना पड़ा.

बीजेपी अपने गढ़ मध्य गुजरात में अपना अभियान तेज चुकी है, जहां पर आम आदमी पार्टी कमजोर है. वडोदरा मध्य गुजरात के केंद्र में है. पीएम मोदी ने अपने लोकसभा चुनाव के लिए 2014 में वडोदरा सीट को चुना था. यहां सभी स्थानीय निकायों पर बीजेपी को बहुमत है, चाहे वह नगर निगम हो, जिला पंचायत हो या तालुका पंचायत. 2017 के विधानसभा चुनाव में वडोदरा लोकसभा क्षेत्र की सभी सात सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की.

मध्य गुजरात में अहमदाबाद, वडोदरा, आणंद, खेड़ा, दाहोद, पंचमहल और छोटा उदयपुर जिले शामिल हैं. इस क्षेत्र से 61 विधायक विधानसभा पहुंचते हैं. इस क्षेत्र में आदिवासी, ओबीसी और पाटीदारों का दबदबा है. रुझानों की मानें तो आदिवासी बहुल इलाकों में आमतौर पर कांग्रेस जीतती है जबकि ओबीसी और पाटीदार बहुल इलाकों में बीजेपी. हालांकि, 2022 के चुनाव में स्थिति बिल्कुल अलग हो सकती है.

इस क्षेत्र में जनजातीय समुदायों के लिए सबसे अधिक एक दर्जन आरक्षित सीटें हैं. वडोदरा शहर की सीट दलित समुदाय के लिए आरक्षित है. बीजेपी और आम आदमी पार्टी दोनों में यह धारणा है कि कांग्रेस के पास गुजरात के लिए न तो इच्छाशक्ति है और न ही कोई दृष्टि. गुजरात आम आदमी पार्टी प्रमुख इटालिया कहते हैं, ”हम दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के काम के आधार पर विकास का एक वैकल्पिक मॉडल पेश कर रहे हैं.”

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एक इंटरव्यू में द इंडियन एक्सप्रेस को उन्होंने बताया, “हमारे पास राजनीति करने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और नियमित पानी की आपूर्ति जैसे वास्तविक मुद्दे हैं. आम जनता को भाजपा और कांग्रेस के ध्रुवीकरण और सोशल इंजीनियरिंग की राजनीति से कैसे फायदा होगा? सदियों से इन दलों ने अपने राजनीतिक लाभ के लिए एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ लड़ाया है. हम कुछ ऐसा पेश कर रहे हैं जो इन दोनों पार्टियों में से किसी के पास नहीं है – ‘काम करने की राजनीति.”

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