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चना और धान के बाद अब ज्वार की ब्रिकी को लेकर किसान परेशान, अभी नहीं खोला गया है सरकारी केंद्र

ज्वार की बिक्री को लेकर किसानों की चिंता बढ़ी

Image Credit source: TV9 Digital

पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद बाद भी अभी तक खरीद केंद्र नहीं खोले गए हैं. किसानों की चिंता है कि अगर MSP पर सरकारी खरीद नहीं होगी तो ज्वार को काफी कम कीमत पर बाजार में बेचना पड़ेगा. इससे उन्हें काफी नुकसान होगा.

महाराष्ट्र में किसानों की समस्या कम होने का नाम नही ले रही है. चना खरीद के लिए सरकारी केंद्रों को बंद कर दिया गया था. उसके बाद धान खरीद केंद्र 15 दिनों में ही बंद कर दिया. नफेड की तरफ से कहा गया था कि खरीद लक्ष्य पूरा हो गया है. वहीं किसानों (Farmers) का कहना है कि इस बार रबी सीजन में चना और धान दोनों फसलों के उत्पादन में वृद्धि हुई है, इसिलए प्रशासन को खरीदी सिमा बढ़ाना चाहिए. अब किसान कम रेट में खुले बाजार में उपज बेचने को मजबूर हैं. वहीं अब ज्वार उत्पादक किसानों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर उपज बेचने में दिक्कत आ रही है. दरअसल नागपुर जिले के किसानों का कहना है कि ज्वार (Sorghum) बिक्री के लिए उन्होंने ने ढेड़ महीने पहले ही पंजीकरण करवाया था, लेकिन ज्वार खरीद केंद्र शुरू नहीं हुए हैं. किसानों का कहना है कि ज्वार को बेचकर ही खरीफ सीजन की फसलों की खेती के लिए खर्च की व्यवस्था करते हैं. लेकिन इस बार अभी तक नफेड ने खरीद केंद्र शुरू नहीं किया है. इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है.

ज्वार की खेती राज्य के औरंगाबाद, नासिक, जलगांव, खानदेश, बुलढ़ाना, यवतमाल, धुले और नंदुरबार जिलों में होती है. इन जिलों में नेफेड से गारंटी के साथ खरीद के लिए किसानों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. पंजीकरण की अवधि 15 से 30 अप्रैल तक थी. किसानों का कहना है कि पंजीकरण करने करने के बावजूद खरीद केंद्र खोलने में इतनी देरी क्यों हो रही हैं. इसके चलते किसानों में आक्रोश है.

इस साल देरी से हो रही है खरीद

किसान कह रहे हैं कि राज्य में खरीदारी हर साल जून में शुरू होती है. पिछले सीजन में 1 जून ही खरीदारी शुरू हो हुई थी. इस साल इतनी देरी हो रही है कि किसानों में डर है कि कहीं उनकी हालत धान और चने उत्पादकों की तरह न हो जाए. क्योंकि इस साल धान खरीदी केंद्र देरी से शुरू हुआ था और सिर्फ 15 दिनों में ही बंद कर दिया गया. यही चिंता ज्वार बिक्री को लेकर किसानों में है. वहीं विपणन महासंघ के अधिकारियों के अनुसार इस साल राज्य में 15,000 से अधिक किसानों ने ज्वार की बिक्री के लिए नफेड के साथ पंजीकरण करवाया है.

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व्यापारियों पर रेट गिराने का आरोप

नफेड से 2738 रुपए की गारंटीड कीमत पर ज्वार खरीदा जाना था. यहीं कारण है कि बाजार में ज्वार की कीमत बढ़ गई है. व्यापारियों ने शुरू में 2000 रुपए में ज्वार खरीदा था, लेकिन अब किसानों का आरोप है कि नफेड की ओर से गारंटी नहीं होने और खरीद केंद्र नहीं खुलने की वजह से व्यापारियों ने रेट कम कर दिए है. बाजार में ज्वार की कीमत 2000 से घटकर 1420 रुपए प्रति क्विंटल हो गई है. औरंगाबाद में इस समय ज्वार 1500 रुपए क्विंटल है. हालांकि अभी कुछ जिलों में ठीक दाम मिल रहा है, लेकिन किसानों को चिंता है कि अगर जल्द ही खरीद केंद्र नहीं खोले गए तो किसानों को ज्वार बेहद कम भाव पर बेचना पड़ेगा. नेफेड को ज्वार बेचकर किसान खरीफ सीजन के लिए बीज और खाद खरीदते हैं, लेकिन खरीद को लेकर अनिश्चितता ने किसानों में चिंता बढ़ा दी है.

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