Mon. Jan 30th, 2023
तेल पर लगे नए टैक्स की हर 15 दिन में समीक्षा, घरेलू सप्लाई बनाए रखने के लिए लगा टैक्स- वित्त मंत्री

क्रूड पर टैक्स की हर 15 दिन में समीक्षा

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सरकार ने पेट्रोल और एटीएफ के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर की दर से कर लगाया है तथा डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर का कर लगाया गया है. इसके अलावा कच्चे तेल के घरेलू स्तर पर उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त कर लगाया गया है.

सरकार कच्चे तेल, डीजल, विमान ईंधन पर लगाए जाने वाले कर की हर 15 दिन में समीक्षा करेगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister) ने आज ये जानकारी दी है. आज ही सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) जैसी कंपनियों द्वारा पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के अन्य देशों को निर्यात पर शुक्रवार को कर लगाया है. दरअसल रूस के द्वारा सस्ती दरों पर कच्चा तेल (Crude) ऑफर करने के साथ भारतीय खरीदारों ने रूस से खऱीद कई गुना बढ़ा दी है और इसकी के साथ रिफायनरी प्रोडक्ट का निर्यात भी बढ़ा है. जिससे इन कंपनियों का मार्जिन तो बढ़ा है लेकिन दूसरी तरफ देश में कई जगह तेल की कमी की खबरें भी सामने आई हैं. इसे देखते हुए ही सरकार ने निर्यात पर नियंत्रण लगाने के लिए नये टैक्स का ऐलान किया है.

क्या है वित्त मंत्री का बयान

वित्त मंत्री ने कहा कि स्थितियां बेहद अलग हैं जब दुनिया भर में तेल की कीमतें नियंत्रण से बाहर हो चुकी हैं. उन्होने कहा कि हम निर्यात पर रोक नहीं लगाना चाहते लेकिन हम चाहते हैं कि देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई बनी रहे. उन्होने कहा कि ऐसी स्थिति में जब देश में तेल की सप्लाई पर असर दिख रहा हो लेकिन दूसरी तरफ ऊंचे प्रॉफिट के साथ निर्यात जारी हो तो हमें ऐसा कदम उठाना होगा जिससे कुछ फायदा देश के नागरिकों को मिले. वहीं डॉलर के मुकाबले रुपये के प्रदर्शन पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक रुपये की चाल पर नजर रख रहे हैं. और सरकार जानती हैं कि कमजोर रुपये से आयात पर कितना असर पड़ सकता है.

तेल के निर्यात पर लगा टैक्स

सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी कंपनियों द्वारा पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) के अन्य देशों को निर्यात पर शुक्रवार को कर लगाया है. ओएनजीसी और वेदांता लिमिटेड जैसी कंपनियों द्वारा स्थानीय रूप से उत्पादित कच्चे तेल से मिलने वाले अप्रत्याशित लाभ पर भी कर लगाया गया है. वित्त मंत्रालय की अधिसूचना में कहा गया कि सरकार ने पेट्रोल और एटीएफ के निर्यात पर छह रुपये प्रति लीटर की दर से कर लगाया है तथा डीजल के निर्यात पर 13 रुपये प्रति लीटर का कर लगाया गया है. इसके अलावा कच्चे तेल के घरेलू स्तर पर उत्पादन पर 23,250 रुपये प्रति टन का अतिरिक्त कर लगाया गया है. सार्वजनिक क्षेत्र की ओएनजीसी और ऑयल इंडिया लिमिटेड तथा निजी क्षेत्र की वेदांता लिमिटेड की केयर्न ऑयल एंड गैस के कच्चे तेल के उत्पादन पर कर लगाने से और 2.9 करोड़ टन कच्चे तेल के घरेलू स्तर पर उत्पादन से सरकार को सालाना 67,425 करोड़ रुपये मिलेंगे. निर्यात कर इस लिहाज से लगाया गया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और रोजनेफ्ट समर्थित नायारा एनर्जी जैसी रिफायनरी यूक्रेन पर रूस के हमले के मद्देनजर तेल किल्लत का सामना कर रहे यूरोप और अमेरिका जैसे क्षेत्रों में ईंधन का निर्यात करके खासा लाभ कमा रही हैं. निर्यात कर लगाने का एक उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर घरेलू आपूर्ति बेहतर करना भी है क्योंकि मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में ईंधन की कमी का संकट खड़ा है और निजी रिफायनरी ईंधन की स्थानीय स्तर पर बिक्री करने के बजाए इसके निर्यात को प्राथमिकता दे रही हैं.

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