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एक पूर्व मुख्यमंत्री का किसी सरकार में कनिष्ठ पद स्वीकार करना शायद ही देखने को मिलता है. लेकिन महाराष्ट्र में पूर्व में ऐसी स्थिति देखने को मिली है. फडणवीस ऐसा करने वाले चौथे नेता हैं.


Jul 01, 2022 | 11:18 AM

TV9 Hindi

| Edited By: निलेश कुमार

Jul 01, 2022 | 11:18 AM




Devendra Fadnavis : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके देवेंद्र फडणवीस प्रदेश में राजनीतिक हैसियत से दूसरे नंबर के नेता हो चुके हैं. उन्होंने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे करते हुए बड़ा दिल दिखाया और खुद सरकार से बाहर रहते हुए समर्थन देने की बात कही. हालांकि बाद में बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. इस तरह वे मुख्यमंत्री रह चुके ऐसे नेता हो गए, जिन्होंने एक पद नीचे की कुर्सी स्वीकार की. हालांकि वे ऐसा करने वाले पहले नेता नहीं हैं. उनसे पहले भी तीन ऐसे मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिन्होंने 'छोटी कुर्सी' स्वीकार की है. यानी फडणवीस ऐसा करनेवाले चौथे नेता हैं.

Devendra Fadnavis : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके देवेंद्र फडणवीस प्रदेश में राजनीतिक हैसियत से दूसरे नंबर के नेता हो चुके हैं. उन्होंने एकनाथ शिंदे को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे करते हुए बड़ा दिल दिखाया और खुद सरकार से बाहर रहते हुए समर्थन देने की बात कही. हालांकि बाद में बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर उन्होंने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली. इस तरह वे मुख्यमंत्री रह चुके ऐसे नेता हो गए, जिन्होंने एक पद नीचे की कुर्सी स्वीकार की. हालांकि वे ऐसा करने वाले पहले नेता नहीं हैं. उनसे पहले भी तीन ऐसे मुख्यमंत्री रह चुके हैं, जिन्होंने ‘छोटी कुर्सी’ स्वीकार की है. यानी फडणवीस ऐसा करनेवाले चौथे नेता हैं.

Shankarrao Chavan: एक पूर्व मुख्यमंत्री का किसी सरकार में कनिष्ठ पद स्वीकार करना शायद ही देखने को मिलता है. लेकिन महाराष्ट्र में पूर्व में ऐसी स्थिति देखने को मिली है. 1975 में कांग्रेस नेता शंकरराव चव्हाण मुख्यमंत्री बने थे और वसंतदादा पाटिल द्वारा उनकी जगह लेने से पहले वह दो साल पद पर रहे थे. 1978 में पाटिल कैबिनेट के मंत्री रहे शरद पवार ने सरकार गिरा दी और खुद मुख्यमंत्री बन गए. पवार के नेतृत्व में बनी प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार में चव्हाण वित्त मंत्री बने थे.

Shankarrao Chavan: एक पूर्व मुख्यमंत्री का किसी सरकार में कनिष्ठ पद स्वीकार करना शायद ही देखने को मिलता है. लेकिन महाराष्ट्र में पूर्व में ऐसी स्थिति देखने को मिली है. 1975 में कांग्रेस नेता शंकरराव चव्हाण मुख्यमंत्री बने थे और वसंतदादा पाटिल द्वारा उनकी जगह लेने से पहले वह दो साल पद पर रहे थे. 1978 में पाटिल कैबिनेट के मंत्री रहे शरद पवार ने सरकार गिरा दी और खुद मुख्यमंत्री बन गए. पवार के नेतृत्व में बनी प्रगतिशील लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार में चव्हाण वित्त मंत्री बने थे.

Shivajirao Patil Nilangekar: इस क्रम में दूसरा नाम आता है, शिवाजीराव पाटिल नीलांगकर का. वे जून 1985 से मार्च 1986 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे थे. कई वर्षों बाद 2004 में जब सुशील कुमार शिंदे की सरकार बनी तो मं​त्रिमंडल में वे राजस्व मंत्री बने.

Shivajirao Patil Nilangekar: इस क्रम में दूसरा नाम आता है, शिवाजीराव पाटिल नीलांगकर का. वे जून 1985 से मार्च 1986 तक महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे थे. कई वर्षों बाद 2004 में जब सुशील कुमार शिंदे की सरकार बनी तो मं​त्रिमंडल में वे राजस्व मंत्री बने.

Narayan Rane: एक प्रमुख नाम नारायण राणे का भी है. राणे शिवसेना में रहने के दौरान, 1999 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे, हालांकि वह एक साल से भी कम समय तक पद पर रहे थे. बाद में वह शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. फिर जब  प्रदेश में विलासराव देशमुख की सरकार बनी तो वे राजस्व मंत्री बने.

Narayan Rane: एक प्रमुख नाम नारायण राणे का भी है. राणे शिवसेना में रहने के दौरान, 1999 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे, हालांकि वह एक साल से भी कम समय तक पद पर रहे थे. बाद में वह शिवसेना छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए. फिर जब प्रदेश में विलासराव देशमुख की सरकार बनी तो वे राजस्व मंत्री बने.

Devendra Fadnavis : फडणवीस ऐसा करने वाले चौथे नेता हैं. 2014 से 2019 तक वे पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री रहे थे. फिर 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, जब शिवसेना, बीजेपी से अलग हो गई, तब फडणवीस, अजीत पवार गुट के विधायकों के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं होने के कारण 3 दिन के अंदर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई. अब यह सरकार गिर चुकी है. ​एकनाथ शिंदे सीएम हैं, जबकि उद्धव डिप्टी सीएम बने हैं.

Devendra Fadnavis : फडणवीस ऐसा करने वाले चौथे नेता हैं. 2014 से 2019 तक वे पूरे पांच साल के कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री रहे थे. फिर 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, जब शिवसेना, बीजेपी से अलग हो गई, तब फडणवीस, अजीत पवार गुट के विधायकों के समर्थन से फिर से मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत साबित नहीं होने के कारण 3 दिन के अंदर उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. बाद में शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई. अब यह सरकार गिर चुकी है. ​एकनाथ शिंदे सीएम हैं, जबकि उद्धव डिप्टी सीएम बने हैं.






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