Tue. Feb 7th, 2023
देसी धान की 300 किस्मों को संरक्षित कर रही है छत्तीसगढ़ की महिला किसान, लोगों को करती है जागरूक

महिला किसान के पास है धान की 300 देसी किस्म के बीज

Image Credit source: File Photo

Paddy Variety: छत्तीसगढ़ की महिल किसान पिछले 15 सालों से देसी धान की किस्मों को संरक्षित करने का काम कर रही है. उनके पास फिलहाल देसी धान की 300 किस्म के बीज है. इतना ही नहीं वो अपने आस-पास के किसानों को देसी धान की खेती करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

छत्तीसगढ़ में किसान अब धान देसी किस्मों की खेती कर रहे हैं. राज्य के बस्तर समेत कई जिलों में किसानों का रुझान देसी बीजों की तरफ हुआ है. हालांकि कई ऐसे भी किसान हैं जो अच्छी पैदावार को देखते हुए हाइब्रीड किस्मों के धान की खेती कर रहे हैं. पर बस्तर की एक ऐसी महिला किसान (Women Farmer) हैं जो देसी धान की खेती (Dhan Ki Kheti) करने के लिए किसानों को जागरुक कर रहीं हैं. पिछले 15 साल प्रभाती भारत किसानों को देसी धान की खेती करने के लिए प्रेरित कर रही हैं. प्रभाती भारत के पास आज 300 प्रकार की देसी धान की किस्मे हैं.

प्रभाती को धान( Paddy) संरक्षित करने का यह गुणा विरासत में मिला है. उनके घर में पिछले तीन पीढ़ियों से महिलाएं देसी धान की बीजों को संरक्षित करने के काम कर रही है. इन धान की किस्मों को वो अपने डेढ़ एकड़ के खेत में लगाती है. एवीपी न्यूज के मुताबिक बस्तर जिले के छोटे गारावंड गांव की महिला किसान के पास 300 प्रकार की देसी धान के बीज है. इन किस्मों को वो हर साल अपने खेत में लगाती हैं. वह जिले की इकलौती महिला किसान हैं जिनके पास देसी धान की 300 से किस्म मौजूद है.

धूम-घूम कर जुटाए धान की किस्म

बीज संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए प्रभाती ने अपने गांव की महिलाओं को जोड़कर एक स्वयं सहायता समूह बनाया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने बताया कि अपने पति और सास से उन्हें धान के देसी बीज को संरक्षित करने के बारे में प्रेरणा मिली. तब से लेकर वो लगातार धान के बीज को संरक्षित कर रहीं हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास जो देसी धान की बीज है वो पूरी तरह से बस्तर जिले की लोकल बीज है. प्रभाती ने इन देसी बीजों को अलग-अलग अंचलों में जाकर जमा करती है. इसी तरह से उन्होंने 300 किस्म के बीज जुटाए हैं.

धान की बीजों पर करती हैं प्रयोग

धान को संरक्षित करने के अलावा प्रभाती उन बीजों के साथ नए प्रयोग कर रहे हैं. उन्होंने इन वेरायटी को मिलाकर मल्टीविटामीन, कैंसर, डायबिटीज समेत कई बीमारियों से लड़ने के वाली धान की वेरायटी तैयार की है. यह पुराने धान विलुप्ल नहीं हो जाए इसके लिए वो हर साल इन्हें अपने खेतों नें लगाती है. अलग-अलग किस्म के धान को उगाने में काफी मेहनत करना पड़ता है. इनका ख्याल रखना पड़ता है ताकि वो बीज आपस में नहीं मिल जाए. इसके लिए अलग-अलग किस्म को नाम और नंबर दिया गया है.

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लोगों को स्वस्थ रखने का उद्देश्य

प्रभाती बतातीं हैं कि धान की खेती से करीब ढाई क्विंटल तक की पैदावार होती है, जिसे वो अपने घर में खाने के लिए इस्तेमाल करती हैं. उनका उद्देश्य जिले के किसानों को हाइब्रीड धान की खेती छोड़कर देसी धान की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है. ताकी सभी लोग सेहतमंद खाना खाएं और स्वस्थ रहें. क्योंकि कई गंभीर बीमारियों से जूझ रहे किसानों के लिए देसी चावल औषधी की तरह कार्य करता है.

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