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नेपाल में पराली की समस्या का समाधान करेगा हरियाणा, भारतीय वैज्ञानिकों से मिला नेपाली दल

धान की खेती वाले क्षेत्रों में गंभीर हो रही पराली की समस्या.

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Parali Management: नेपाल स्थित त्रिभुवन विश्वविद्यालय की एक टीम ने हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल ड्रिल और बेलर जैसी मशीनों के बारे में जानकारी ली.

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) पराली प्रबंधन में नेपाल का सहयोग करेगा. इसके लिए यह विश्वविद्यालय नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के साथ एक एमओयू करके वहां के वैज्ञानिकों को पराली प्रबंधन संबंधी तकनीकी ज्ञान ट्रांसफर करेगा. यह निर्णय नेपाल के एक प्रतिनिधिमंडल की एचएयू के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज के साथ हुई बैठक में लिया गया. यह दल पराली (Parali) जलाने की समस्या से निपटने के लिए तकनीक एवं मशीनों की जानकारी हासिल करने के उद्देश्य से हरियाणा आया हुआ है. बता दें कि हरियाणा सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले राज्यों में शामिल है. वो मशीनों और पूसा डीकंपोजर (Pusa Decomposer) के जरिए इस समस्या के समाधान की कोशिश में जुटा हुआ है. पराली की समस्या मुख्यतौर पर धान के सीजन में आती है.

नेपाल से आए सात सदस्यीय दल का नेतृत्व त्रिभुवन विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी संस्थान के विभागाध्यक्ष जावेद आलम कर रहे हैं. बता दें नेपाल में संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक आयोग द्वारा समर्थित एकीकृत स्ट्रॉ प्रबंधन पर पायलट परियोजना चल रही है. इस परियोजना के प्रमुख कार्यान्वयन भागीदारों में नेपाल के कृषि इंजीनियरिंग विभाग, त्रिभुवन विश्वविद्यालय, कृषि विभाग, नेपाल कृषि अनुसंधान परिषद और कृष्ण धन उद्योग (स्ट्रॉ ब्लॉक के निर्माता) को शामिल किया गया है.

पराली मैनेजमेंट के लिए 1000 रुपये एकड़ की मदद

इस मौके पर कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज ने कहा कि स्ट्रॉ बर्निंग यानी पराली जलाने की समस्या एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के लिए चिंता का विषय है. भारत भी इससे अछूता नहीं है. यहां विशेषकर धान उत्पादक प्रान्तों में यह एक गंभीर समस्या है. उन्होंने कहा हरियाणा में इस समस्या से निपटने के लिए सरकार बहुत गंभीरता से कार्य कर रही है. पराली प्रबंधन के लिए किसानों (Farmers) को 1000 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि प्रदान कर रही है. वहीं उद्योगों से पराली से इथनॉल उत्पादन व ऊर्जा उत्पादन में प्रयोग करने के लिए कहा गया है.

Parali Management

पराली मैनेजमेंट को लेकर एचएयू के कुलपति से मिलता नेपाली प्रतिनिधिमंडल.

दोनों विश्वविद्यालय मिलकर करेंगे रिसर्च

कुलपति ने कहा कि जहां तक खेत पर पराली के प्रबंधन का सवाल है इसके लिए विश्वविद्यालय टेक्नोलॉजी विकास व मानकीकरण का काम किए जाने के साथ ही किसानों के बीच इनका विस्तार कर रहा है. कुलपति ने नेपाली दल को पराली प्रबंधन के क्षेत्र में हर संभव तकनीकी सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया. साथ ही त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने की बात कही. जिसके तहत भविष्य में दोनों विश्वविद्यालय आपस में मिलकर इस क्षेत्र में रिसर्च कार्य करेंगे. जिससे पराली प्रबंधन (Parali Management) की समस्या का समाधान निकल सकेगा.

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पराली मैनेजमेंट मशीनों की ली जानकारी

विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि अभियान्त्रिकी एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के डॉ. बलदेव डोगरा व स्टाफ ने नेपाली दल का स्वागत किया. उन्हें पराली मैनेजमेंट में उपयोगी मशीनों हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल ड्रिल, स्पेसिअल ड्रिल, स्ट्रॉ चापर, मल्चर, हे रेक और बेलर आदि के बारे में जानकारी दी गई. विभागाध्यक्ष डॉ. विजया रानी तथा डॉ. अनिल कुमार ने इन मशीनों संबंधी उनके प्रश्नों के जवाब दिए.

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