Mon. Jan 30th, 2023
बारिश के बाद तेजी से बुवाई कर रहे हैं किसान, फसलों को पर्याप्त समय मिलने से उत्पादन में होगी बढ़ोतरी

बारिश के बाद खरीफ फसलों की बुवाई में आ रही तेजी.

Image Credit source: TV9 Digital

अच्छी बारिश की शुरुआत के बाद खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आ रही है. किसान अब तेजी से बुवाई काम को पूरा करना चाहते हैं ताकि फसलों को पर्याप्त समय मिल जाए और उत्पादन पर असर न पड़े.

इस साल खरीफ सीजन में किसानों की समस्या बढ़ गई है. किसानों का कहना कहना है कि पिछले साल जून के अंत तक बुवाई कर चुके थे, लेकिन इस साल बारिश (Rain) में देरी होने से अभी तक किसानों ने ठीक है से बुवाई भी नहीं कर पाए हैं. प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले काफी कम क्षेत्र में बुवाई हुई है. मराठवाड़ा में सोयाबीन के साथ-साथ मूंग, अरहर और उड़द को भी मुख्य फसल माना जाता है, लेकिन अब मराठवाड़ा के किसान सिर्फ सोयाबीन की खेती पर जोर दे रहे हैं. किसानों (Farmer) का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से दाल की सही कीमत नहीं मिल रही है, साथ ही इस साल बारिश में देरी के कारण उड़द और मूंग के उत्पादन में कमी आने की संभावना है. यहीं कारण है कि मराठवाड़ा के किसान दलहन छोड़कर कपास की फसल पर ध्यान दे रहे हैं. कृषि मंत्रालय की तरफ से 1 जुलाई को जारी हुए आंकड़ों में भी कपास के रकबा में वृद्धि की बात कही गई है.

किसानों को पिछले सीजन में सोयाबीन का अच्छा दाम मिला था, इसलिए माना जा रहा है कि किसान इस साल सोयाबीन की खेती बढ़ा रहे हैं. महाराष्ट्र देश में सोयाबीन का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है. प्रदेश में किसान सोयाबीन की जमकर बुवाई कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि अभी तक पिछले साल से अधिक बुवाई हो चुकी है. बारिश में तेजी के साथ इसमें और प्रगति की उम्मीद है. मौसम विभाग ने शनिवार 2 जुलाई को बताया कि मॉनसून पूरे देश को कवर कर चुका है और इस महीने अच्छी बारिश होगी.

क्या कहता है कृषि मंत्रालय का रिपोर्ट?

कृषि मंत्रालय के रिपोर्ट के मुताबिक, खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में 15,70,000 हेक्टेयर कम है. इसमें सबसे ज्यादा कमी धान, ज्वार, रागी, मक्का, मूंगफली और नाइजर सीड के रकबे में देखने को मिली है. इस साल एक जुलाई तक 278.72 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले साल समान अवधि में 294.42 लाख हेक्टेयर में हो चुकी थी. जून के महीने में उम्मीद से कम हुई बारिश का असर खरीफ फसलों की खेती पर पड़ा है. हालांकि अभी बुवाई के लिए किसानों के पास पर्याप्त वक्त है. मंत्रालय की तरफ से कहा गया है कि अब अच्छी बारिश का दौर शुरू हो गया है, तो बुवाई में कोई दिक्कत आने की संभावना कम है.

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भारत में सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून 1 जून को केरल की तट पर दस्तक देता है. इस बार मॉनसून समय से पहले पहुंच गया था और प्रगति भी अच्छी रही. हालांकि बुवाई लायक बारिश नहीं हुई. मॉनसून सीजन के चार महीनों में जुलाई और अगस्त काफी अहम होता है. इस दौरान ही सबसे अधिक बारिश होती है, जो फसलों के लिए भी लाभकारी साबित होती है.

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