Wed. Feb 8th, 2023
भारत 2035 तक चीन के बाद सबसे अधिक शहरी आबादी वाला देश होगा, संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कई

2035 तक भारत चीन के बाद सबसे अधिक शहरी आबादी वाला देश होगा

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रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एशिया में पिछले दो दशकों में चीन और भारत की आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण तेजी से बढ़ा है. इससे गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई है.

संयुक्त राष्ट्र ने दुनियाभर के शहरों में रहने वाली आबादी से जुड़ी एक रिपोर्ट जारी की है. इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कोरोना महामारी के कारण शहरों में रहने वालों की संख्या में तेजी से कमी आई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के शहरों में रहने वालों की जनसंख्या पिछले स्तर पर पहुंच गयी है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत(Urban Population of India) की शहरी आबादी 2035 तक 67.5 करोड़ हो सकती है, जबकि चीन में शहरी जनसंख्या (urban population in china) एक अरब से अधिक है. भारत 2035 में दुनिया का सबसे अधिक शहरी जनसंख्या वाला दूसरा देश होगा.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत की शहरी आबादी(Urban population) के 2035 तक 67.5 करोड़ हो जाने का अनुमान है. शहरी जनसंख्या के मामले में चीन की एक अरब शहरी जनसंख्या के मुकाबले भारत दूसरे स्थान पर होगा. कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया में शहरों में रहने वालों की संख्या में कमी आई है. लेकिन 2050 तक शहरों में निवास करने वाली जनसंख्या में 2.2 अरब की वृद्धि होने की संभावना है. दुनिया में शहरीकरण के बारे में संयुक्त राष्ट्र (United Nations) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि तेजी से शहरीकरण पर कोविड-19 महामारी का अस्थायी असर पड़ा है. जिसकी वजह से शहरीकरण की रफ्तार में थोड़ी कमी आई है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण वैश्विक शहरी आबादी पिछले स्तर पर आ गई है.

भारत की शहरी आबादी में तेजी से हो रहा इजाफा

रिपोर्ट के अनुसार 2035 में भारत की शहरी आबादी 67,54,56,000 तक पहुंचने का अनुमान है. भारत की 2020 में शहरी आबादी 48,30,99,000 थी. वहीं 2025 तक इसके 54,27,43000 और 2030 तक 60,73,42,000 हो जाने की संभावना है. रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2035 तक शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का प्रतिशत कुल आबादी का 43.2 प्रतिशत हो जाएगा. रिपोर्ट में चीन के बारे में कहा गया है कि वहां 2030 तक शहरी आबादी 1.05 अरब हो जाएगी. जबकि एशिया में शहरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या 2.99 अरब होगी. दक्षिण एशिया में यह संख्या 98.76 करोड़ होगी.

भारत और चीन से बड़ी है आर्थिक वृद्धि

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार चीन और भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों की वैश्विक आबादी में बड़ी हिस्सेदारी है. इन देशों में आर्थिक वृद्धि से वैश्विक असमानता पर सकारात्मक रूप से असर पड़ा है. रिपोर्ट में आगे कहा गया कि एशिया में पिछले दो दशकों में चीन और भारत की आर्थिक वृद्धि और शहरीकरण तेजी से बढ़ा है. इससे गरीबी में रहने वाले लोगों की संख्या में काफी कमी आई है. रिपोर्ट के अनुसार खासकर निम्न आय वाले देशों में जन्म दर बढ़ने के साथ मौजूदा शहरी आबादी में वृद्धि जारी रहेगी. इसके साथ 2050 तक कुल वैश्विक आबादी में शहरों में रहने वाले लोगों की जनसंख्या 68 प्रतिशत पहुंचने का अनुमान है जो अभी 56 प्रतिशत है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया कि गरीबी और असमानता शहरों के समक्ष सबसे कठिन और जटिल समस्याओं में से एक है.

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2035 तक 67.5 करोड़ होगी भारत की शहरी आबादी

संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के शहरों में रहने वालों के ताजा आंकड़ों की रिपोर्ट को जारी किया है. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 महामारी के कारण शहरों में रहने वालों की संख्या में कमी आई है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के शहरों में रहने वालों की संख्या पिछले स्तर पर पहुंच गयी है. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भारत की शहरी आबादी 2035 तक 67.5 करोड़ हो सकती है. जबकि चीन में शहरी जनसंख्या एक अरब से अधिक है. भारत 2035 में दुनिया का सबसे अधिक शहरी जनसंख्या वाला दूसरा देश होगा.

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