Wed. Feb 8th, 2023
मुकेश अंबानी कैसे करेंगे अपनी कारोबार का बंटवारा; आकाश को टेलीकॉम, ईशा को मिलेगा रिटेल कारोबार

मुकेश अंबानी ने इस हफ्ते अपने कारोबार के बंटवारे की योजना को लागू करना शुरू कर दिया है.

मुकेश अंबानी ने इस हफ्ते अपने कारोबार के बंटवारे की योजना को लागू करना शुरू कर दिया है. वे अपनी पिता द्वारा की गई गलती को दोहराना नहीं चाहते हैं. इसकी शुरुआत उन्होंने अपने टेलीकॉम बिजनेस से की है.

करीब 13 साल पहले इसी समय पर, अरबपति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और उनके छोटे भाई अनील अंबानी (Anil Ambani) मुंबई में एक घर में रहते थे. लेकिन वे अपने पिता के कारोबार को लेकर अदालतों में एक-दूसरे से लड़ भी रहे थे. धीरुभाई अंबानी (Dhirubhai Ambani) का साल 2002 में निधन हो गया था और वे अपने पीछे कोई वसीयत नहीं छोड़ गए थे. इससे कारोबार (Business) को लेकर दोनों भाइयों में लड़ाई शुरू हुई. साल 2005 में हुए पारिवारिक सेटलमेंट के तौर पर, मुकेश अंबानी के पास बंगाल की खाड़ी में फील्ड का नियंत्रण था. लेकिन समझौते के तहत उन्हें अनिल के प्रस्तावित पावर प्लांट को सस्ते फीडस्टॉक की सप्लाई करनी पड़ती थी.

मई 2010 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत, गैस को भारत की सॉवरेन प्रॉपर्टी माना गया, जिससे मुकेश को देने की जरूरत नहीं पड़ी. दो हफ्ते बाद, भाइयों ने झगड़ा खत्म किया.

पिता की गलती को नहीं दोहराना चाहते मुकेश अंबानी

ब्लूबमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, इसी झगड़े को देखते हुए मुकेश अंबानी ने इस हफ्ते अपने कारोबार के बंटवारे की योजना को लागू करना शुरू कर दिया है. वे अपनी पिता द्वारा की गई गलती को दोहराना नहीं चाहते हैं. इसकी शुरुआत उन्होंने अपने टेलीकॉम बिजनेस से की है. अंबानी के सबसे बड़े बेटे 30 साल के आकाश ने देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो के चेयरमैन के पद को संभाल लिया है.

अंबानी के रिलायंस रिटेल के पास भारत का सबसे बड़ा स्टोर्स का नेटवर्क मौजूद है. आकाश की जुड़वा बहन ईशा को जियोमार्ट मिलने की उम्मीद है.

अनंत अंबानी को मिलेगा तेल का कारोबार

ऐसा होने पर, मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे 27 साल के अनंत अंबानी को ऑयल टू कैमिकल बिजनेस मिलेगा. लेकिन उन्हें अपने पिता का हाइड्रोकार्बन से दूर होकर क्लीन एनर्जी जैसे सोलर पैनल और सबसे महत्वपूर्ण 1 डॉलर प्रति किलोग्राम से कम की कीमत में ग्रीन हाइड्रोजन को एक दशक के भीतर हासिल करना होगा.

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मुकेश अंबानी ने अपने उत्तराधिकार को लेकर सबसे पहले बात पिछले साल दिसंबर में कर्मचारियों से एक इवेंट में की थी. तो, यह कहना मुश्किल है कि समझौते में क्या होगा और बदलावों को कब लागू किया जाएगा. लेकिन यह हैरान करने वाली बात नहीं होगी कि रिटेल, टेलीकॉम और एनर्जी बिजनेस प्रोफेशनली प्रबंधन वाली स्वतंत्र लिस्टेड कंपनियां बन जाएं, जिनमें इक्विटी भागीदारी हो.

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