Wed. Feb 8th, 2023
मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले कौन हैं शिंदे, जिन्होंने 10 दिनों में महाराष्ट्र की सत्ता का खेल पलट दिया

ठाकरे परिवार के सबसे करीबियों में शिंदे की गिनती होती रही.

EKnath Shinde Profile: महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल के बाद स्पष्ट हो गया है कि एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री होंगे. 10 दिन की उठापटक के बाद ये फैसला किया गया है.

महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री होंगे. करीब 10 दिनों से शिवसेना के कई विधायकों के साथ ‘बागी’ हुए शिंदे ने अब बीजेपी के साथ मिलकर इस सियासी जंग में जीत हासिल की है. माना जा रहा है कि एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र के इस सियासी खेल (Maharashtra Political Crisis) में जीत दर्ज कर ली है. 25 विधायकों के साथ नॉट रिचेबल हुए शिंदे, जब वापस लौटे तो उन्होंने सीएम पद की ताजपोशी के लिए पूरी तैयारी कर ली थी. तो आज जानते हैं महाराष्ट्र राजनीतिक का सबसे चर्चित चेहरा एकनाथ शिंदे है कौन और क्या है उनका राजनीतिक करियर….

उद्धव ठाकरे सरकार में एकनाथ शिंदे कैबिनेट मंत्री थे और उनकी गिनती भी ठाकरे परिवार के सबसे करीबियों में की जाती रही है. कहा जाता है कि जब 2019 में जब सीएम की रेस हो रही थी, जब उन्होंने ठाकरे का समर्थन किया था. लेकिन, अब शिंदे ने पूरी बाजी को ही पलट दिया है. शिवसेना में कई साल से अहम भूमिकाओं में दिख चुके शिंदे विरोधी पक्ष के नेता भी रहे हैं. शिंदे ने कई मोर्चों पर शिवसेना का बचाव भी किया है, लेकिन अब मामला कुछ और है. उन्होंने ठाकरे परिवार के साथ खेलकर अपनी अलग जमीन तैयार कर ली. शिंदे का परिवार राजनीति में सक्रिय है और उनके बेटे श्रीकांत भी सांसद हैं और भाई प्रकाश शिंदेर पार्षद हैं.

महाराष्ट्र के सतारा जिले के पहाड़ी जवाली तालुका से हैं. ठाणे शहर में आने के बाद उन्होंने 11वीं कक्षा तक मंगला हाई स्कूल और जूनियर कॉलेज, ठाणे से पढ़ाई की. उनका बेटा डॉक्टर श्रीकांत शिंदे एक ऑर्थोपेडिक सर्जन है. साथ ही हाल ही में श्रीकांत ने कल्याण लोकसभा सीट से जीत दर्ज की है.

दो बार रहे मुख्यमंत्री

अगर राजनीतिक करियर की बात करें तो शिंदे कोपरी-पांचपखाड़ी सीट से 4 बार विधायक चुने जा चुके हैं. वहीं 2014 और 2019 दोनों सरकार में वे मंत्री भी रहे हैं. इससे पहले 2004 और 2009 में भी वे विधायक रहे. साल 1980 में शिवसेना से बतौर शाखा प्रमुख हाथ मिलाया था. उन्होंने 1997 में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था, जब वे ठाणे निगम के कॉरपोरेटर चुने गए थे. इसके बाद वे ठाणे नगर निगम में कई पदों पर रहे और फिर 2004 में विधायक बनकर राज्य की राजनीति में आ गए. फिर कई बार जीत दर्ज की और दो बार प्रदेश में मंत्री भी रहे. इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में नगर विकास मंत्री थे.वफादार शिव सैनिक के रुप में पहचान बनाने वाले शिंदे पार्टी के लिए जेल तक भी जा चुके हैं.

ऑटो रिक्शा चलाते थे

बता दें कि शिवसेना का शक्तिशाली नेता बनने से पहले शिंदे ऑटो-रिक्शा चलाते थे. शिवसेना के साथ उनका जुड़ाव 1980 के दशक से है. शिंदे ने अपने बच्चों को खोने के बाद राजनीति छोड़ने का फैसला किया था, लेकिन उनके गुरु आनंद दिघे उन्हें दोबारा राजनीतिक जीवन में लेकर आए. ठाणे के नेता दीघे ने उन्हें ठाणे नगर निगम में सदन का नेता बना दिया. 2001 में दीघे की मौत के बाद शिंदे की लोकप्रियता काफी बढ़ गई. उन्होंने ठाणे और पूरे राज्य में शिवसेना को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी.

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