Wed. Feb 8th, 2023
रूस का भारत को कच्चे तेल का निर्यात बढ़ा, इराक और सऊदी अरब को पीछे छोड़कर बना सबसे बड़ा सप्लायर

रूस भारत के तेल बाजार में बड़ी पहुंच बना रहा है.

रूस भारत के तेल बाजार में बड़ी पहुंच बना रहा है. वह इराक और सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए एशिया का सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी बन सकता है.

रूस (Russia) भारत के तेल (Crude Oil) बाजार में बड़ी पहुंच बना रहा है. वह इराक और सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए एशिया (Asia) का सबसे बड़ा तेल सप्लायर भी बन सकता है. रूस के पास अब अपने पुराने यूरोपीय खरीदार मौजूद नहीं हैं. ऐसे में रूस इस महीने में दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल के आयातक (Import) को 1 मिलियन और 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन के बीच भेज सकता है. यह जानकारी ब्लूमबर्ग और दो ऑयल एनालिटिक्स कंपनियों के डेटा से मिली है.

इराक की बढ़ी चिंता

इसकी वजह से वे भारत को तेल आयात के मामले में इराक के बराबर या थोड़ा ज्यादा और सऊदी अरब से बहुत आगे रहेगा. इराक इस पर नजर बनाए हुए है. इराक को इसके बाद एशिया में अपनी बाजार हिस्सेदारी के लिए मुकाबला करना होगा. उसे कम कीमत पर तेल का ऑफर देना होगा.

भारत में रिफाइनर्स सस्ते रूसी तेल की ओर आकर्षित हो रहे हैं. रूस और यूक्रेन के साथ यह स्थिति बदली है और इस पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की भी नजर है.

एशिया को तेल का निर्यात बढ़ गया है क्योंकि कुछ यूरोपीय कंपनियों ने खरीदारी बंद कर दी है. इससे रूस पर वैकल्पिक बाजार खोजने का बोझ आ गया है. ट्रैकिंग आंकड़े प्रोवाइडर के मुताबिक अलग-अलग हैं, जो विभिन्न आकलन और कार्गो के बारे में जानकारी पर निर्भर करता है. लेकिन Kpler, Vortexa और ब्लूमबर्ग के आंकड़ों में भारत को तेल आयात के मामले में रूस की बेहतर स्थिति का पता चलता है.

किस देश ने कितना कच्चा तेल किया सप्लाई?

Kpler के डेटा में दिखता है कि भारत में आने वाला रूसी तेल जून में अब तक औसतन 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन रहा है, जो देश में आने वाले कुल क्रूड का एक तिहाई है. इराक की रोजाना सप्लाई करीब 1.01 मिलियन बैरल होगी. जबकि सऊदी अरब का आयात रोजाना 662,000 बैरल है.

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आपको बता दें कि सात आर्थिक शक्तियों के समूह G-7 ने इस हफ्ते रूस पर सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है. एक अमेरिकी अधिकारी ने सोमवार को कहा था कि मास्को की ऊर्जा कमाई पर अंकुश लगाने के मकसद से रूसी तेल पर कीमत की सीमा को आगे बढ़ाने के लिए जी-7 देश एक समझौते की घोषणा करने वाले हैं. यह कदम यूक्रेन का समर्थन करने के एक संयुक्त प्रयास का हिस्सा है, जिसमें रूसी सामानों पर शुल्क बढ़ाना और युद्ध का समर्थन करने वाले सैकड़ों रूसी अधिकारियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध लगाना शामिल है.

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