Wed. Feb 8th, 2023
वंशवाद की राजनीति को सफाया करने के मोड में बीजेपी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी से निकलेगा 2024 में जीत का नया फॉर्मूला?

आज हैदराबाद में है बीजेपी राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक

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बीजेपी ने महाराष्ट्र में शिवसेना से बगावत करने वाले विधायकों के साथ सरकार बना ली है. अब पार्टी की कोशिश देश के उन राज्यों में अपनी पकड़ बनाने की है, जहां उसकी मौजूदगी अभी ना के बराबर है.

हैदराबाद में शनिवार से शुरू होने वाली बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में अगले दो दिनों तक देश के मौजूदा राजनीतिक हालात और आर्थिक एजेंडे के अलावा इस मुद्दे पर विचार मंथन होगा कि 2024 का आगामी लोकसभा चुनाव मं बीजेपी अपने दम पर 350 से ज़्यादा सीटें कैसे जीतेगी. इसके लिए बीजेपी उन राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाना चाहती है जहां अभी तक वो सत्ता की पहुंच से दूर है या जहां पर उसकी मौजूदगी नहीं है. इसके लिए उसने दक्षिण भारत पर अपनी नजरें जमा ली हैं. कर्नाटक को छोड़ बाकी दक्षिण भारतीय राज्यों में बीजेपी बेहद कमज़ोर है. हैदराबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी का मक़सद ही दक्षिण भारतीय राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाना है.

दक्षिण भारत की सौ लोकसभा सीटों पर फोकस

हैदराबाद में होने वाली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बीजेपी का फोकस पांच दक्षिण भारतीय राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की कुल 130 सीटों में से 100 सीटें जीतने पर फोकस है. अभी इन राज्यों में बीजेपी के पास बहुत कम सीटें हैं. तमिलनाडु और पुडुचेरी में लोकसभा की 40, कर्नाटक में 28, केरल में 20, तेलंगाना में 17 सीटें और आंध्र प्रदेश में 25 सीटें आती हैं. दक्षिण भारत की इन 130 सीटों में से 100 सीटों पर बीजेपी का दूर-दूर तक कोई वजूद नहीं है. इसलिए बीजेपी ने प्लान साउथ के तहत इन सभी राज्यों पर फोकस करना शुरू कर दिया है, ताकि पार्टी की पकड़ इन राज्यों में मजबूत की जा सके जो लोकसभा चुनाव 2024 के लिए पार्टी का लक्ष्य है. इससे पहले ही तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 2023-24 में विधानसभा चुनाव होने हैं. इसलिए बीजेपी ने अभी से अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है.

बीजेपी दे सकती है वंशवाद मुक्त भारत का नारा

चर्चा है कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए वंशवाद मुक्त भारत का नारा दे सकती है. पार्टी में 2024 का लोकसभा चुनाव और इससे पहले होने वाले कई राज्यों क विधानसभा चुनावों के मद्देनजर वंशवाद मुक्त भारत अभियान चलाने पर विचार हो रही है. ग़ौरतलब है कि दक्षिणी राज्यों सहित देश के सभी क्षेत्रीय दलों की लगभग यही स्थिति है. वंशवाद की राजनीति को लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ सबसे बड़े खतरे के रूप में पेश किया जाएगा, क्योंकि ये अधिकार की राजनीति का प्रतीक है और भ्रष्टाचार व कुशासन का मूल कारण है. पिछले दो लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कांग्रेस मुक्त भारत और भ्रष्टाचार मुक्त भारत के नारे दिए थे. इन दोनों नारों को वंश-मुक्त भारत अभियान में शामिल किया जा सकता है.

वंशवाद के खिलाफ पीम मोदी का कड़ा रुख

वंशवाद की राजनीति को लेकर पीएम मोदी बेहद कड़ा रुख अपनाते हैं. हाल ही में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने अपने हर भाषण में परिवारवाद का मुद्दा जोर शोर से उठाया था. इससे बीजेपी को काफी फायदा हुआ. बीजेपी के 42वें स्थापना दिवस पर पीएम मोदी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि बीजेपी जहां राष्ट्र के प्रति समर्पित है, वहीं कुछ दल ऐसे भी हैं जो परिवारों के लिए समर्पित हैं. उन्होंने कहा था कि इस देश में अभी भी दो तरह की राजनीति चल रही है. एक है परिवार की भक्ति और दूसरी देशभक्ति. ये लोग भले ही अलग-अलग राज्यों में हों, लेकिन एक-दूसरे के भ्रष्टाचार को ढकते हुए वंशवाद की राजनीति के धागों से जुड़े रहते हैं. राष्ट्रीय स्तर पर और कुछ राज्यों में कई राजनीतिक दल ऐसे हैं, जो केवल अपने परिवार के हितों के लिए काम करते हैं ऐसी पारिवारिक पार्टियों ने इस देश के युवाओं को कभी आगे बढ़ने नहीं दिया. पीएम मोदी के तवरों को देखते हुए वंशवाद मुक्त भारत का नारे को बीजेपी एक चुनाव अभियान के रूप में पेश कर सकती है.

चार खास प्लान पर काम

हालांकि अगले लोकसभा चुनाव को लेकर अभी करीब पौन दो साल हैं. लेकिन बीजेपी कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती. इसी लिए वो अभी से अपन कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारियों में झोंक देना चाहती है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में प्रदर्शन को बेहतर करने के लिए बीजेपी 4 खास प्लान पर काम करेगी. पहला मोदी की टीम, जोकि प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाले अभियान को देखेगी, दूसरा मोदी@20 किताब के संदेश को व्यापक स्तर पर फैलाना, तीसरा, उन 70 लोकसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करना जहां भाजपा कभी नहीं जीती और चौथा, लगभग 76,000 उन चुनाव बूथों को मजबूत करना जहां पार्टी ने पिछले चुनावों में खराब प्रदर्शन किया या फिर वहां हार-जीत का अंतर काफी कम रहा. साफ जाहिर है कि बीजेपी 2024 लोकसभा चुनाव को लेकर पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है. इसके लिए दिशा राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्पष्ट होगी. साफ है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बीद बीजेपी विकास के मुद्दे और गरीबों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के सहारे नरेंद्र मोदी सरकार को बड़े जनादेश के सत्ता में तीसरी बार लेने की कवायद में जुट जाएगी.

ओवैसी को घेरने की रणनीति

बीजेपी ओवैसी को घेरने के साथ साथ दक्षिण भारत में भी अपना विस्तार करने की रणनीति पर फ़ोकस कर रही है. तमाम कोशिशों के बावजूद बीजेपी दक्षिण में कर्नाटक को छोड़कर और किसी राज्य में अपना पैर पसारने में कामयाब नहीं रही है. दूसरे लफ्जों में कहें, तो भाजपा दक्षिण में अब तक वो कामयाबी हासिल नहीं कर पाई है जिसकी दरकार उसे लंबे समय से है, इसलिए हैदराबाद मंथन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के सभी दिग्गज दक्षिण भारत में विजय का फ़ार्मूला तय करने के लिए जुट रहे हैं. बीजेपी को ओवैसी के भड़काऊ बयनों से चुनावी फायदा होता रहा है. हैदराबाद में बीजेपी ओवैसी को घेरने की रणनीति पर भी काम करेगी. बीजेपी को पता है कि वि ओवैसी पर बीजेपी जितना हमलावर होगी वो उतनी उसके खिलाफ जहर उगलेंगे. इससे मुसलमान भले ही ओवैसी के साथ जुटे न जुटें बीजेपी का कोर वोटर उसे मजबूती से जुड़ेगा.

राष्ट्रवाद पर और आक्रामक होंगे तेवर

बीजेपी ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी के लिए इस बार हैदराबाद को चुना है, लेकिन सवाल यही है कि औवेसी के गढ़ को ही क्यों चुना. दरअसल ओवैसी बीजेपी और संघ के खिलाफ बोलने वाले सबसे प्रखर मुस्लिम नेताओं में से एक हैं. हैदराबाद को चुनने के पीछे यही रणनीति है कि इससे ध्रुवीकरण को उस जगह पर बल मिलेगा और औवैसी के होने से ये काम बीजेपी के लिए आसान हो जाएगा. इसके साथ ही बीजेपी राष्ट्रवाद की भूमिका पर भी आक्रामक तेवर अपनाएगी. इसके संकेत 24 मई को अपने पिछले तेलंगाना दौरे पर गृहमंत्री अमित शाह ने दे दिये थे. शाह ने कहा था कि वो तेलंगाना को बंगाल नहीं बनने देंगे. बीजेपी राष्ट्रवाद की अलख दक्षिण में भी जगाना चाहती है जिससे उसे चुनाव में
फायदा मिले. इसके साथ ही इस क्षेत्र में बीजेपी अपने बड़े नेताओं के धुआंधार दौरे करवायेगी.

दक्षिण में सेंध से होगी 2024 की राह आसान

बीजेपी दक्षिण भारत में अपना दायरा बढ़ाकर 2024 के लोकसभा चुनाव में न सिर्फ जीत का राह आसान करा चाहती है बल्कि वो जनादेश की ताकत भी बढ़ाना चाहती है. बीजेपी संगठन महामंत्री बीएल संतोष कर्नाटक से आते हैं इसलिए इस अभियान में उनकी भूमिका अहम होने जा रही है. हैदराबाद में राष्ट्रीय कार्यकारिणी करने के प्लान के पीछे भी बीएल संतोष की ही सोच मानी जा रही है, इसलिए बीएल संतोष ने खुद हैदराबाद जाकर कार्यकारिणी के स्थान का चयन किया. बीजेपी की रणनीति है कि दक्षिण में सेंध लगाने से लोकसभा 2024 में उसकी राह आसान हो जाएगी. बता दें कि 2024 में आम चुनाव से पहले 2023 में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव भी होने हैं, जिनमें तेलंगाना, मेघालय,
नागालैंड, त्रिपुरा, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान शामिल हैं. इसके मद्देनजर बीजेपी कार्यकारिणी की इस बैठक को
काफी अहम माना जा रहा है.

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