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समय पर पहुंचा मॉनसून लेकिन 41 प्रतिशत कम हुई बारिश, महाराष्ट्र में खरीफ फसलों की बुवाई का है बुरा हाल

मॉनसून सीजन के दौरान अब तक 41 प्रतिशत कम बारिश हुई है. (सांकेतिक तस्वीर)

Image Credit source: TV9 (फाइल फोटो)

किसानों का कहना है कि इस बार सामान्य मॉनसून के पूर्वानुमान से हमलोग उत्साहित थे. समय पर मॉनसून ने दस्तक भी दे दी. लेकिन अभी तक केवल छिटपुट बौछारें ही पड़ी हैं. बुवाई के लायक बारिश नहीं होने से मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.

महाराष्ट्र के किसान (Farmers) पर्याप्त बारिश नहीं होने से परेशान हैं. बारिश की कमी से खरीफ फसलों (Kharif Crops) की बुवाई मुश्किल से ही हो पाई है. भारत में इस बार समय से पहले दस्तक देने वाला मॉनसून (Monsoon) महाराष्ट्र में 10 जून को दाखिल हो गया था और गुरुवार तक पूरे राज्य को कवर कर लिया. हालांकि अभी एक बार भी खेती के लायक बारिश नहीं हुई है. वर्तमान मॉनसून सीजन के दौरान 23 जून तक राज्य में 41.4 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. इस वजह से दलहन की खेती करने वाले किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं, क्योंकि अब उनके पास समय काफी कम बचा है.

खरीफ फसलों की तैयारी में जुटे किसानों का कहना है कि इस बार सामान्य मॉनसून के पूर्वानुमान से हमलोग उत्साहित थे. समय पर मॉनसून ने दस्तक भी दे दी. लेकिन अभी तक केवल छिटपुट बौछारें ही पड़ी हैं. बुवाई के लायक बारिश नहीं होने से मूंग और उड़द की खेती करने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. किसानों का कहना है कि अब हम मूंग और उड़द छोड़कर सोयाबीन और कपास की खेती करेंगे, क्योंकि समय से बारिश नहीं होने पर दलहन की बुवाई करने का समय बीत जाएगा.

मध्य महाराष्ट्र में 51 प्रतिशत कम बारिश

ऐसा नहीं है कि महाराष्ट्र के किसी एक क्षेत्र में बारिश कम हुई है. राज्य के लगभग सभी हिस्सों का हाल एक जैसा ही है. मराठवाड़ा की बात करें तो यहां पर सामान्य औसत 99.3 मिमी से 10 मिमी कम यानी 89 मिमी बारिश हुई है. अन्य क्षेत्रों में यह कमी और ज्यादा है. विदर्भ में 37.4 प्रतिशत तो मध्य महाराष्ट्र में 51.4 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है.

मूंग और उड़द की खेती के लिए जून के तीसरे सप्ताह तक पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है. ये दोनों फसलें 70 से 8- दिन में तैयार होने वाली हैं. बाद में अधिक बारिश होने की स्थिति और खेत में जलजमाव हो जाने पर फसल को काफी नुकसान पहुंचता है. यहीं कारण है कि अब तक अच्छी बारिश के इंतजार में रहे किसान जून के बाद मूंग और उड़द की बुवाई करने से बचने की बात कर रहे हैं. उन्हें डर है कि देरी से बोई गई फसल अगस्त-सितंबर में होने वाली तेज बारिश की भेंट न चढ़ जाए.

कृषि विभाग जारी नहीं कर रहा बुवाई का आंकड़ा

इसी बीच, अहमदनगर के राहुरी में स्थित महात्मा फुले कृषि विश्वविद्यालय और परभणी में मराठावाड़ा कृषि विश्वविद्यालय ने भी किसानों को जून के बाद मूंग और उड़द की फसल नहीं बोने की सलाह जारी की है. इसके साथ ही, दोनों विश्वविद्यालय की तरफ से अन्य फसलों की बुवाई के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. बारिश और नमी के आधार पर विदर्भ के किसान जुलाई अंत या अगस्त मध्य तक कपास की बुवाई कर सकते हैं. हालांकि मराठवाड़ा के किसानों के लिए अवधि थोड़ी कम कर दी गई है. मराठवाड़ा के किसान कपास की खेती मध्य जुलाई तक कर सकते हैं. लेकिन अगर बारिश की स्थिति ऐसे ही बनी रही तो उन्हें मक्का और ज्वार बोने की सलाह दी गई है.

कृषि विभाग भी बारिश की स्थिति को लेकर सतर्क है और पहले ही किसानों से इंतजार करने की बात कर चुका है. कम बारिश की वजह से बुवाई नहीं होने के कारण ही खरीफ फसलों की बुवाई का आंकड़ा जारी नहीं किया जा रहा है. महाराष्ट्र का कृषि विभाग हर साल मॉनसून के आगमन के साथ ही खरीफ फसलों की बुवाई का रकबा जारी करने लगता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस से एक अधिकारी ने बताया कि हर हफ्ते की बुवाई के रकबे के आंकड़े को जारी करने का कोई मतलब नहीं है.

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उन्होंने कहा कि बारिश की कमी की वजह से बहुत कम बुवाई हुई है. लेकिन इसके लिए अभी पर्याप्त समय है. सलाह देते हुए अधिकारी ने कहा कि अगर किसान अभी बुवाई करते हैं और बारिश की कमी बरकरार रहती है तो उन्हें फिर से बुवाई करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे उन्हें नुकसान ही होगा. ऐसे में अच्छा है कि कुछ दिन और इंतजार कर लिया जाए.

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