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'हमें ऐसा बफर जोन नहीं चाहिए, जिसमें रिहायशी इलाके शामिल हों', वायनाड में इको सेंसिटिव जोन पर बोले राहुल गांधी

वायनाड में इको सेंसिटिव जोन को लेकर राहुल गांधी ने कही ये बात

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Rahul Gandhi on Wayanad Eco-Sensitive Zones: सुप्रीम कोर्ट ने हाल में निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य सहित संरक्षित प्रत्येक वन के चारों ओर एक किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन होगा और उस इलाके में खनन गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने शुक्रवार को कहा कि इको सेंसिटिव जोन वायनाड के लोगों का प्रमुख मुद्दा है. उन्होंने कहा कि पिछले साल जब वायनाड वन्यजीव अभयारण्य के आसपास इको सेंसिटिव जोन (Eco-Sensitive Zones) का सीमांकन किया जा रहा था, उस समय मैंने पर्यावरण मंत्रालय से स्थानीय समुदायों की चिंताओं को दूर करने का आग्रह किया था. कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि यह क्षेत्र 2019 केरल सरकार के प्रस्ताव पर आधारित था.

उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुनाया गया तो मैंने सीएम को लिखा और कहा था कि जहां भी आवश्यक हो इको सेंसिटिव जोन को कम करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय से संपर्क करें. अब एक महीना हो गया है और मुझे राज्य सरकार द्वारा किसी भी ठोस कदम के बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया गया है. राहुल गांधी ने कहा कि हमें ऐसा बफर जोन नहीं चाहिए, जिसमें रिहायशी इलाके शामिल हों.

वायनाड इको सेंसिटिव जोन पर क्या बोले राहुल गांधी

एक किलोमीटर का होगा इको सेंसिटिव जोन- सुप्रीम कोर्ट

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल में निर्देश दिया था कि राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य सहित संरक्षित प्रत्येक वन के चारों ओर एक किलोमीटर का इको सेंसिटिव जोन होगा और उस इलाके में खनन गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी. बीते दिनों विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सतीशन ने दावा किया कि साल 2019 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की हुई बैठक में फैसला लिया गया था कि एक किलोमीटर चौड़ा बफर जोन होना चाहिए.

वायनाड इको सेंसिटिव जोन के मुद्दे पर CPI (M)-UDF के बीच आरोप-प्रत्यारोप

केरल में सत्तारूढ़ सीपीआईएम और कांग्रेस नीत विपक्षी गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) ने वन्यजीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर एक किलोमीटर चौड़ा इको सेंसिटिव जोन बनाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर रविवार को एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए. बीते दिनों तिरुवनंतपुरम में मीडिया से बातचीत में माकपा के प्रदेश सचिव कोडियेरी बालाकृष्णन ने दावा किया कि साल 2011 में तत्कालीन केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्री जयराम रमेश बफर जोन के विचार के साथ आए थे और तब की केरल की यूडीएफ सरकार ने यह जांचने के लिए आयोग का गठन किया था कि इसे इस दक्षिणी राज्य में लागू किया जा सकता है या नहीं.

उन्होंने बताया कि इसके बाद आयोग, जिसमें कांग्रेस नेता वी डी सतीशन भी शामिल थे, ने अनुशंसा की कि वन्यजीव अभयारण्य और राष्ट्रीय उद्यानों के चारों ओर 10 किलोमीटर चौड़ा बफर जोन बनाया जा सकता है. वहीं, दूसरी ओर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सतीशन ने दावा किया कि वर्ष 2019 में मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की हुई बैठक में फैसला लिया गया था कि एक किलोमीटर चौड़ा बफर जोन होना चाहिए.

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(भाषा से इनपुट के साथ)

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