Tue. Feb 7th, 2023
Corona पर नई रिसर्च स्टडी: दुबले-पतले और मोटे लोगों को कोरोना का ज्यादा खतरा, वैक्सीन का असर सभी पर एक जैसा

Corona New Research Study; ऑक्‍सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने किया है शोध (सांकेतिक)

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शोधकर्ताओं ने अपनी रिसर्च में पाया कि कोविड-19 रोधी टीके सभी बीएमआई समूह वाले लोगों के लिए कारगर हैं, विशेष रूप से टीके की दूसरी और तीसरी खुराक लेने के बाद असर काफी बढ़ जाता है.

कोविड महामारी (Covid 19) की शुरुआत के बाद से दुनिया भर में इसके कारण 60 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन, अच्छी बात यह है कि अब हमारे पास इस जानलेवा संक्रमण के इलाज की बेहतर व्यवस्था के अलावा असरदार वैक्सीन्स भी मौजूद हैं, जिनसे गंभीर संक्रमण के खतरे को कम करने में काफी मदद मिली है. इसके बावजूद, कुछ लोगों के आज भी कोरोना वायरस (Coronavirus) से गंभीर रूप से संक्रमित होने और मौत होने की आशंका बनी हुई है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की नई रिसर्च स्टडी में पाया गया है कि संक्रमित होने के बाद उन लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की आशंका काफी अधिक है, जो मोटापे से ग्रस्त हैं. कोविड-19 के कारण मृत्यु दर भी मोटापे से पीड़ित लोगों में अधिक हो सकती है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर नेरीज एम एस्टबरी और कारमेन पियरनस ने रिसर्च में लोगों के वजन के आधार पर कोविड वैक्सीन्स के असर का अध्ययन किया है. शोध में पाया गया है कि दुबले-पतले लोगों के भी कोरोना वायरस से गंभीर रूप से संक्रमित होने का खतरा काफी अधिक है. यह नई रिसर्च स्टडी द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रायनोलॉजी में प्रकाशित हुई है.

BMI के जरिये होती है मोटापे की जांच

बॉडी मास इंडेक्स (BMI) का उपयोग करके मोटापे को मापा जाता है. इसका कैलकुलेशन किसी व्यक्ति के वजन (किलोग्राम में) को उसकी ऊंचाई (मीटर में) से विभाजित कर और फिर उसका वर्ग निकाल कर की जाती है.

  1. 18.5 से कम बीएमआई वाले व्य​क्ति को कम वजन वाला माना जाता है.
  2. 18.5 से 25 के बीच बीएमआई वाले को स्वस्थ और ठीक वजन वाला माना जाता है.
  3. 25 से ऊपर बीएमआई वाले को अधिक वजन का माना जाता है.
  4. जिस व्यक्ति का बीएमआई 30 से ऊपर होता है उसे मोटापे से ग्रस्त माना जाता है.

इस रिसर्च का इस्तेमाल लोगों के लिए कोविड-19 टीकाकरण अभियान की नीतियां बनाने में किया गया. शोध में ऐसे लोगों को भी शामिल किया गया था, जिनका बीएमआई 40 या उससे अधिक था.

90 लाख से अधिक लोगों के डेटा पर शोध

कोविड-19 महामारी से पहले किए गए अन्य शोधों से पता चला है कि मोटापे से ग्रस्त लोग आम तौर पर मौसमी बुखार के टीके कम ही लगवाते हैं. शोध में इस बात के भी प्रमाण मिले हैं कि कुछ टीकों का मोटापे से ग्रस्त लोगों पर कम ही असर पड़ता है और इन लोगों के लिए टीके अन्य लोगों की तुलना में उतने कारगर साबित नहीं होते. शोधकर्ताओं ने इंग्लैंड में 18 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 90 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य संबंधी पृष्ठभूमि और रिकॉर्ड का उपयोग किया है.

शोधकर्ताओं ने अलग-अलग वजन वाले लोगों पर कोविड-19 रोधी टीके के असर की पड़ताल करने के लिए विभिन्न बीएमआई समूह के लोगों में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने और इसके कारण मौत होने संबंधी तमाम आंकड़ों का गहनता से अध्ययन किया. हमने टीकाकरण कराने वाले विभिन्न बीएमआई समूह के समान उम्र और लिंग वाले लोगों की तुलना टीकाकरण नहीं कराने वाले लोगों से भी की.

दूसरी और तीसरी डोज से बढ़ जाता है वैक्सीन का असर

शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि कोविड-19 रोधी टीके सभी बीएमआई समूह वाले लोगों के लिए कारगर हैं, विशेष रूप से टीके की दूसरी और तीसरी खुराक लेने के बाद असर काफी बढ़ जाता है. यह शोध बताता है कि कम वजन वाले लोगों में कोविड-19 रोधी टीके थोड़े कम प्रभावी हो सकते हैं.

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टीकाकरण कराने वाले कम वजन वाले लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की संभावना लगभग 50 प्रतिशत कम थी और टीकाकरण नहीं कराने वाले लोगों की तुलना में उनकी मौत की संभावना लगभग 40 प्रतिशत कम थी.

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