Tue. Feb 7th, 2023
Delhi School Assessment Guidelines 2022: दिल्ली के स्कूलों में अब नए तरीके से होगा बच्चों का असेसमेंट, सरकार ने जारी की गाइडलाइन

दिल्ली के स्कूलों में लागू हो रही है नई असेसमेंट स्कीम. गाइडलाइन्स जारी. (फाइल फोटो)

Image Credit source: Manish Sisodia Twitter

Delhi School News in Hindi: दिल्ली के स्कूलों में नया असेसमेंट स्कीम (Delhi School Assesment Scheme) लागू हो रहा है. केजरीवाल सरकार ने सभी सरकारी सहायता प्राप्त और अनएडेड स्कूलों के लिए नई असेसमेंट गाइडलाइन जारी की है. डीटेल खबर में पढ़िए.

Delhi Schools New Assessment Scheme in Hindi: दिल्ली के स्कूलों में स्टूडेंट्स का असेसमेंट करने का फॉर्मूला बदलने वाला है. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने सभी स्कूलों के लिए नया असेसमेंट स्कीम तैयार किया है. मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने स्कूलों में असेसमेंट की नई गाइडलाइन (Delhi Schools Assessment Guideline) जारी की है. बच्चों में एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट को बढ़ावा देने, देशभक्ति की भावना विकसित करने और हैप्पीनेस को उनके जीवन का हिस्सा बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया जा रहा है. नई असेसमेंट गाइडलाइन इसी शैक्षणिक वर्ष से दिल्ली शिक्षा निदेशालय के स्कूलों, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और मान्यता प्राप्त अनएडेड स्कूलों में लागू होगी.

माइंडसेट करिकुलम का असेसमेंट भी होगा

सरकार इस एकेडमिक सेशन से शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ माइंडसेट करिकुलम का असेसमेंट (Mindset Curriculum) भी करेगी. उल्लेखनीय है कि माइंडसेट करिकुलम का असेसमेंट में किसी कंटेंट का मूल्यांकन नहीं किया जाएगा. बल्कि इनके माध्यम से बच्चों ने क्या सीखा और उनके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया, इसका आंकलन किया जाएगा.

हैप्पीनेस माइंडसेट, एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट और देशभक्ति करिकुलम के जरिए छात्रों ने जो सीखा है, उसका आंकलन किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य स्टूडेंट्स के मेंटल, सोशल, इमोशनल और एथिकल क्षमताओं के विकास पर जोर देना है. यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP) में दिए गए लक्ष्यों और पेडागोजी के अनुरूप है.

कंपीटेंसी बेस्ड एजुकेशन की जरूरत: सिसोदिया

स्कूलों में शुरू किए जा रहे इस नए इनोवेटिव असेसमेंट प्रैक्टिसेज के बारे में दिल्ली के डिप्टी सीएम और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बात की. उन्होंने कहा कि ‘वर्तमान समय की आवश्यकताओं को देखते हुए ये बेहद जरूरी है कि हमारे स्कूलों में कम्पीटेंसी बेस्ड एजुकेशन पर फोकस किया जाए, जो वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से लड़ने में हमारे बच्चों की क्षमताओं को विकसित करे.

उन्होंने कहा कि ‘नई असेसमेंट गाइडलाइन के अनुसार, बच्चों का मूल्यांकन पाठ्यक्रम की सामग्री के आधार पर नहीं, बल्कि विभिन्न वास्तविक जीवन परिस्थितियों में उनकी समझ को लागू करने की क्षमता के आधार पर किया जाएगा. यह नई असेसमेंट स्कीम हमारे स्कूली छात्रों को समाज की बेहतरी में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित करेगी. इन करिकुलम्स को स्कूलों में अपनाए हुए काफी समय हो चुका है और अब इन्हें मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल करने का सही समय है.’

क्लास प्रमोशन में नहीं जुड़ेंगे मार्क्स!

नई असेसमेंट गाइडलाइन के अनुसार, कक्षा 3 से 8 के बच्चों का मूल्यांकन हप्पीनेस करिकुलम और देशभक्ति करिकुलम के लिए किया जाएगा. जबकि कक्षा 9 और 11 के छात्रों का मूल्यांकन देशभक्ति और एंत्रप्रेन्योरशिप माइंडसेट करिकुलम के लिए किया जाएगा. साथ ही कक्षा 11 के छात्रों के लिए असेसमेंट का एक अलग क्राइटेरिया होगा, जहां आंकलन में बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम में उनकी भागीदारी भी होगी. प्राप्त अंकों की गिनती किसी छात्र को अगली क्लास में प्रमोट करने के लिए नहीं की जाएगी.

मूल्यांकन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताते हुए, मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने कहा कि ‘नए असेसमेंट गाइडलाइन्स के अनुसार प्रश्न पत्र इस तरह से सेट किए जाएंगे, जहां छात्रों को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में इन करिकुलम्स से सीखे अनुभवों का इस्तेमाल करते हुए उसका उत्तर देना होगा. साथ ही बच्चों को इनपर आधारित अनूठे प्रोजेक्ट कार्य भी करने होंगे. आंकलन की यह नई प्रक्रिया छात्रों की क्रिटिकल थिंकिंग और एनालिटीकल एबिलिटी को और मजबूत करेगी. यह उन्हें रटने की जरूरत को खत्म करने में भी मदद करेगी, जो परीक्षा के दौरान अनावश्यक तनाव पैदा करते हैं.

ऐसी है दिल्ली शिक्षा निदेशालय की नई असेसमेंट गाइडलाइन

  • शैक्षणिक सत्र 2022-23 में मिड-टर्म परीक्षाएं सितंबर/ अक्टूबर में और कॉमन एनुअल एग्जाम (CASE) फरवरी/ मार्च में आयोजित की जाएगी.वार्षिक परीक्षाओं के प्रश्नपत्र सीबीएसई और शिक्षा निदेशालय, दिल्ली द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम से तैयार किए जाएंगे.
  • मिड-टर्म, प्री-बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं में प्रश्नपत्र इस तरह से सेट किए जाएंगे कि आवश्यकता के अनुसार समझ, दक्षता और अन्य कौशल का आंकलन किया जा सके. सेकंडरी और सीनियर सेकंडरी स्तर पर प्रश्नों का पैटर्न सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं में निर्धारित प्रश्नों के समान ही होगा.
  • अधिक संख्या में कम्पीटेंसी आधारित प्रश्न या ऐसे सवाल जो वास्तविक जीवन में अवधारणाओं के अनुप्रयोग का आंकलन करते हैं, वे मिड-टर्म , प्री-बोर्ड और वार्षिक परीक्षाओं में प्रश्न पत्र का हिस्सा होंगे.
  • प्रत्येक परीक्षा के परिणाम का विश्लेषण किया जाएगा. ताकि उसके आधार पर विभिन्न विषयों में कठिन टॉपिक्स व चैप्टर्स की पहचान कर बच्चों को रेमेडियल क्लासेज दी जा सकें. साथ ही क्लास वाइज और सब्जेक्ट वाइज रिजल्ट्स की एनालिसिस का सारांश तैयार किया जाएगा और रिकॉर्ड में रखा जाएगा.

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