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Edible Oil Price: उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर-अब और सस्ता होगा खाने का तेल, जानिए क्या है वजह

कम होने लगा खाद्य तेलों का दाम.

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मलेशिया में 195 दिन के निचले स्तर पर पहुंचा पाम ऑयल का भाव. मार्केट विशेषज्ञों के मुताबिक खाने के तेलों के दाम में इस हफ्ते हुई 15 फीसदी तक की गिरावट. पाम ऑयल में सबसे ज्यादा 15-20 फीसदी की कमी दर्ज की गई है. इसमें अभी और कमी आने की संभावना है.

भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है. अब खाद्य तेल (Edible Oil) और सस्ता हो सकता है. क्योंकि उत्पादन बढ़ने की चिंता की वजह से मलेशिया में पाम ऑयल का भाव लुढ़ककर साढ़े 6 महीने यानी 195 दिन के निचले स्तर पर पहुंच गया है. इसके भाव में 7,268 रिंगिट (मलेशिया की मुद्रा) की रिकॉर्ड ऊंचाई से 37 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. मार्केट के जानकारों का कहना है कि इस हफ्ते पाम ऑयल (Palm Oil) में सेंटीमेंट बहुत मजबूती के साथ मंदी में बदल चुका है. कुल मिलाकर हालात ये हैं कि क्रूड पाम ऑयल कांडला का भाव धीरे-धीरे 1,100 रुपये से नीचे लुढ़क जाएगा और आने वाले महीनों में भाव 1,000 रुपये प्रति 10 किलोग्राम से भी नीचे भी गिर सकता है. खाद्य तेलों के रूप में भारत सबसे ज्यादा पाम ऑयल ही इंपोर्ट करता है.

भारत खाद्य तेलों के मामले में अभी आत्मनिर्भर नहीं हुआ है. हम हर साल करीब 70 हजार करोड़ रुपये का खाद्य तेल इंडोनेशिया (Indonesia), मलेशिया, रूस, यूक्रेन और अर्जेटीना आदि से मंगाते हैं. जिसमें सबसे ज्यादा हिस्सा पाम ऑयल का होता है. अपने यहां खाद्य तेलों की मांग और आपूर्ति में करीब 55 से 60 फीसदी का गैप है. भारत में खाद्य तेलों की मांग करीब 250 लाख टन है, जबकि उत्पादन केवल 110 से 112 लाख टन ही है. इसलिए अपने यहां खाने के तेल का दाम आयात से ज्यादा प्रभावित होता है.

क्या कहते हैं मार्केट के विशेषज्ञ?

ओरिगो कमोडिटीज के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजीव यादव के मुताबिक इस हफ्ते खाने के तेलों के दाम में 10 से 15 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है. खाद्य तेलों में खासकर पाम ऑयल में सबसे ज्यादा 15-20 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. दो साल पहले पाम ऑयल में आई तेजी के चलते अन्य तेलों में तेजी का माहौल बना था. वहीं इस बार भी यही कहानी मंदी में देखने को मिल रही है. पिछले दो महीने यानी मई से लेकर जून में अभी तक मलेशिया और इंडोनेशिया के बाजारों में पाम ऑयल की कीमतों में 30-35 फीसदी की गिरावट देखी गई है.

खाद्य तेलों के दाम में और हो सकती है गिरावट

राजीव कहते हैं कि इंडोनेशिया द्वारा निर्यात पर लगी रोक को हटाने और ड्यूटी में कटौती की वजह से वैश्विक स्तर पर पाम ऑयल की सप्लाई में बढ़ोतरी देखने को मिली है. वहीं दूसरी ओर युद्ध के बावजूद यूक्रेन से सूरजमुखी तेल (Sunflower Oil) का निर्यात मई और जून के महीने में अनुमान से ज्यादा बढ़ा है. वैश्विक मंदी की चिंता की वजह से कच्चे तेल में इस हफ्ते 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है, जिसका असर भी खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है. यादव कहते हैं कि खाद्य तेलों की कीमतों ने इस साल अपने उच्चतम स्तर को छू लिया है और इस साल के अंत तक खाद्य तेलों में 10-15 फीसदी की गिरावट और देखने को मिल सकती है.

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कितना हुआ आयात?

मई के दौरान भारत का क्रूड पाम ऑयल का आयात मासिक आधार पर 1.4 फीसदी गिरकर 4,09,027 टन दर्ज किया गया था, जबकि अप्रैल 2022 में 4,14,829 टन का आयात हुआ था. हालांकि मई 2022 का आयात मई 2021 के 7,55,633 टन के मुकाबले 46 फीसदी कम है. मलेशियन पाम आयल बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2022 में मलेशिया में पाम तेल उत्पादन 5 महीने के उच्चतम स्तर 1.46 मिलियन मीट्रिक टन पर पहुंच गया, जो कि मार्च के उत्पादन 1.41 मिलियन मीट्रिक टन से 3.60 फीसदी ज्यादा है. हालांकि, पिछले साल की समान अवधि में हुए उत्पादन 1.53 मिलियन मीट्रिक टन की तुलना में 4.6 फीसदी कम है.

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