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FPO और उत्पादक समूह से जुड़कर उन्नत खेती कर रहीं झारखंड की ग्रामीण महिलाएं, लाखों में कर रहीं कमाई

खेती के जरिए लाखों रुपए की कमाई कर रहीं झारखंड कि महिला किसान

Image Credit source: Facebook, JSLPS

Women Farmers: झारखंज की ग्रामीण महिलाएं खेती के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ रही हैं. किसान उत्पादन कंपनी से जरिए उनके उत्पाद बिक रहे हैं तो उन्हें अच्छे दाम भी मिल रहे हैं. इससे उनती कमाई बढ़ी है. साथ ही उत्पादक समूह से जुड़कर उन्हें कृषि कि आधुनिकम तकनीक की जानकारी मिल रही है और खेती करने के लिए आवश्यकता आधारभू संतरना भी तैयार हो रही है.

झारखंड में कृषि के क्षेत्र में ग्रामीण महिलाएं अब आगे आ रहीं है और सफलका की नयी कहानी लिख रहीं हैं. ग्रामीण महिलाएं (Women Farmers) प्रशिक्षण पाकर ना सिर्फ उन्नत तकनीक से खेती कर रही हैं बल्कि कृषि और बजार (Agriculture And Market) के प्रति उनकी समझ और सोच का नजरिया भी बदला है. अब वो व्यवासायिक लाभ के लिए खेती कर रही है और अच्छी कमाई भी कर रही है. रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंर्तगत हेसापोड़ सिंगारी गांव की महिलाएं भी इसी तरह से सफलता हासिल कर रही है. जेएसएलपीएस द्वारा संचालित उत्पादक समूह और किसाम उत्पागदक कंपनी (FPO) से जुड़कर महिलाओं को मार्केटिंग में आसनी हो रही है, उन्हें अपने सब्जियों के भी अच्छे दाम मिल रहे हैं.

झारखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मां छिन्नमस्तिके मंदिर के पास स्थित हेसापोड़ा सिंगारी गांव की अधिकांश महिलाएं खेती करती हैं. गांव की महिला किसान और आजीविका कृषक मित्र ललिता देवी बतातीं हैं कि साल 2013 में महिला समूह से जुड़ने के बाद खेती के बारे अधिक जानकारी मिली. इसके बाद उन्हें आजीविका कृषक मित्र बनाया गया. इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण पाने के बाद से उन्होंने उन्नत किस्म से खेती करने की शुरुआत की. स्नातक पास करने के बाद भी उनके पास किसी प्रकार का काम नहीं था इसलिए उन्होंने सोचा कि कुछ काम नहीं मिल रहा है तो खुद के खेत हैं, अच्छे से खेती करके भी आगे बढ़ सकते हैं.

श्रीविधी से धान रोपने की हुई शुरुआत

ललिता बतातीं हैं कि खेती में बदलाव की शुरुआत धान की फसल से हुई. पहले यहां के किसान पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे. पर प्रशिक्षण मिलने के बाद यहां के किसान श्रीविधी तकनीक से धान की खेती करने लगे. इससे धान की पैदावार बढी. इसके साथ ही जिस जमीन पर खेती कम होती थी वहां पर आम के बगना लगाए गये. आज गांव में 17 एकड़ क्षेत्र में आम के बगान हैं. पहले इलाके के किसान सिर्फ आलू की खेती करते थे. पर उत्पादन समूह बनने के बाद किसानों ने यहां पर सब्जियों की खेती शुरू की. फिलहाल गांव कि महिला किसान टमाटर, हरी सब्जियां औऱ ओल के साथ साथ फूल खेती कर रही हैं. इसके अलावा गांव में तरबूज की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. गांव में इस बार 50 एकड़ से अधिक जमीन पर किसानों ने ओल की खेती की है.

मचान विधि से लहलहा रही सब्जियां

ललिता देवी बतातीं हैं कि उन्होंने मचान विधि से बरसात में लौकी और खीरा की खेती की है. इस विधि में बांस बांध कर उंताई पर एक बेड बनाया जाता है, जिसमें लतर वाली सब्जियां होती है. बारिश के मौसम में मिट्टी गीला होने पर उन्हें नुकसान नहीं होता है. उन्होंने बताया की उत्पादक समूह बनने के गांव की महिलाओं को काफी फायदा हुआ है. उनके लिए खेती करना और अपने उत्पादों को बेचना अब आसान हो गया है. पीजी के जरिए बेहतर किस्म के बीज मिल जाते हैं साथ ही सिंचाई से लेकर बिचड़ा तैयार करने के लिए पॉलीहाउस भी मिला है. रजरप्पा किसान उत्पादक समूह के जरिए उनके उत्पाद बिक जाते हैं. इससे महिलाओं की कमाई बढ़ी है. आज पीजी से जुड़ी हर महिला साल में लाख रुपए से अधिक की कमाई कर रही हैं.

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