Tue. Feb 7th, 2023
Himachal Pradesh Assembly Election : सोशल इंजीनियरिंग के दम पर सत्ता का मिथक तोड़ने की कोशिश में BJP

सांकेतिक तस्वीर

Image Credit source: Twitter

हिमाचल प्रदेश में सवर्णो के बाद सबसे ज्यादा पिछड़ा वोट बैंक है, इसी को ध्यान में रखकर भाजपा यहां सोशल इंजीनियरिंग के बूते सत्ता में वापसी की रणनीति बना रही है.

हिमाचल प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा के शीर्ष नेता गंभीर हैं, हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी का रोड शो इस बात का प्रतीक है कि भाजपा इस चुनाव को कितनी गंभीरता से लेने वाली है. इसीलिए पार्टी ने अभी से सवर्णों के साथ साथ पिछड़े और अनुसूचित जाति वोट बैंक को साधने की कोशिश शुरू कर दी है, यहां सवर्णों के बाद पिछड़ा वोट बैंक ज्यादा है, भाजपा की कोशिश है कि सोशल इंजीनियरिंंग के फॉर्मूले को उत्तराखंड की तरह दोहराकर वहां की तरह ही यहां पर भी कमाल दिखाया जाए, भाजपा को सोशल इंजीनियरिंंग के सहारे चार दशकों से चले आ रहे पांच-पांच साल के फार्मूले के मिथक को तोड़ने की पूरी उम्मीद है.

क्या है सोशल इंजीनियरिंग फॉर्मूला

हिमाचल में वर्तमान में भाजपा के जयराम ठाकुर की सरकार है. वर्तमान सरकार में जाति गणित को साधने की कोशिश की गई है. राज्य में ऊंची जातियों के साथ-साथ पिछड़ा वोट बैंक पर भी खास ध्यान दिया गया है. हिमाचल प्रदेश के 2017 के विधानसभा चुनाव में राजपूत जाति के 49 फ़ीसदी मतदाताओं ने बीजेपी को वोट किया था, जबकि 36 फ़ीसदी ने कांग्रेस के पक्ष में. इसके अलावा ब्राह्मण वोट बैंक में भी 56 फ़ीसदी मतदाता भाजपा के साथ रहे थे, जबकि 35 फ़ीसदी कांग्रेस के साथ. बात की जाए पिछड़ी जातियों में तो 48 ओबीसी मतदाताओं ने बीजेपी का साथ दिया था, जबकि 43 फीसद कांग्रेस के साथ गए थे. लेकिन दलित मतदाताओं की बात करें तो भाजपा के साथ 43 फीसदी आए थे, जबकि कांग्रेस के साथ 48 फीसदी से ज्यादा रहे थे. 2017 विधानसभा चुनाव में हिमाचल में भाजपा को मिले सभी जातियों के मत प्रतिशत को देखकर यही लगता है कि राज्य में सोशल इंजीनियरिंग के दम पर सत्ता को दोहराया जा सकता है.

महिला वोट बैंक पर बीजेपी का ख़ास फोकस

हिमाचल प्रदेश में चुनावी साल के चलते मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने राज्य में महिलाओं को विशेष सहूलियत देने की शुरुआत कर दी है. राज्य में परिवहन निगम की बसों में महिलाओं के किराए में 50 परसेंट छूट देने की घोषणा की गई है, वहीं निगम की बसों में अब न्यूनतम किराया ₹5 ही देना होगा. इसके अलावा हिमाचल पथ परिवहन निगम की बसों में 25 महिला चालकों की नियुक्ति करने का भी ऐलान किया गया है. माना जा रहा है कि यह हिमाचल सरकार ने यह फैसले महिला मतदाताओं को ध्यान में रखकर किए हैं.

हिमाचल में सत्ता का केंद्र है कांगड़ा

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हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा राज्य का सबसे बड़ा जिला है. इस जनपद में कुल 15 विधानसभा सीटें आती हैं. इन सीटों पर सबसे ज्यादा प्रभाव राजपूत के साथ-साथ पिछड़ी और अनुसूचित जातियों का होता है. वही हमेशा राज्य में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर यहीं से पैदा होता है. इसी वजह से कांगड़ा में भाजपा सोशल इंजीनियरिंग के दम पर सत्ता को दोहराने की तैयारी में जुटी है. इस बार चुनाव में भाजपा को अग्निपथ योजना के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है. इस क्षेत्र के बड़ी संख्या में युवा सेना में हैं. वहीं अब युवा सेना में जाने के सपने पर सरकार की योजना पानी फेर रही है. ऐसे में युवाओं के आक्रोश का सामना भी भाजपा नेता और विधायकों को करना पड़ रहा है.

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