Wed. Feb 8th, 2023
Himachal Pradesh Election : हिमाचल की राजनीति में बड़ा दखल रखते हैं राजपूत और सवर्ण, जिसने इन दोनों को साध लिया उसी के हाथ रहती है सत्ता

हिमाचल की सत्ता का फैसला जातीय गणित पर निर्भर रहता है

हिमाचल प्रदेश में सत्ता पाने के लिए सवर्णों का साथ होना सबसे ज्यादा जरूरी माना गया है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के गठन के बाद से ही राज्य की राजनीति में सबसे ज्यादा दखल राजपूत बिरादरी का ही रहा है.

हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2017 जीतकर भाजपा ने जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सरकार बनाई. अब इस सरकार का कार्यकाल पूरा होने को है, लेकिन उससे पहले ही होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी कुछ ज्यादा ही सजग हो चुकी है. हिमाचल प्रदेश में सत्ता पाने के लिए सवर्णों का साथ होना सबसे ज्यादा जरूरी माना गया है. इसके अलावा हिमाचल प्रदेश के गठन के बाद से ही राज्य की राजनीति में सबसे ज्यादा दखल राजपूत बिरादरी का ही रहा है. ऐसा माना जाता है कि जो राजनीतिक दल सवर्णों और राजपूतों को साध लेता है, उसे ही प्रदेश की सत्ता मिल जाती है. प्रदेश में मुस्लिम आबादी का प्रभाव ना के बराबर है. इसी वजह से यहां पर भाजपा हो या कांग्रेस सवर्णों को साथ लेने की भरपूर कोशिश में जुटी रहती है. 2022 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिए भी सत्ता के लिए यह फार्मूला भाजपा -कांग्रेस समेत आम आदमी पार्टी पर भी लागू होता है. इस बार विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने को तैयार है क्योंकि पड़ोसी राज्य पंजाब में भारी बहुमत से भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार यहां के हालात बदलने के लिए आम आदमी पार्टी पूरा जोर लगाएगी.

ये है हिमाचल प्रदेश का जातीय गणित

हिमाचल प्रदेश में राजपूत और ब्राह्मण जातियों का साथ त्ता पाने के लिए साथ होना सबसे ज्यादा जरूरी माना गया है, क्योंकि इनके बिना सत्ता की कल्पना ही नहीं की जा सकती है. हिमाचल प्रदेश 2011 की जनगणना के अनुसार 50 फ़ीसदी से ज्यादा आबादी केवल 2 जातियों की है. राज्य में राजपूत मतदाता की आबादी 30.72% है जबकि ब्राह्मण 18 फ़ीसदी से ज्यादा है. इसके अलावा राज्य में अनुसूचित जाति 25.22 फ़ीसद है जबकि अनुसूचित जनजाति की आबादी 5.71 फीसद है. राज्य में ओबीसी समुदाय 13.52 फ़ीसदी है. जबकि मुस्लिम आबादी महज 2 फ़ीसदी के करीब है.

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हिमाचल में सत्ता के किंग मेकर हैं राजपूत

गुजरात में सत्ता पाने के लिए जिस तरह से पाटीदार समुदाय को किंग मेकर माना गया है, उसी तरह हिमाचल प्रदेश में सत्ता के लिए राजपूतों का साथ होना सबसे जरूरी है. हिमाचल प्रदेश के गठन से लेकर वर्तमान समय तक राज्य में शांता कुमार को छोड़कर बाकी सारे मुख्यमंत्री एक ही बिरादरी यानी राजपूत जाति के ही हैं वहीं राज्य में दो बार ब्राह्मण मुख्यमंत्री के रूप में शांता कुमार रहे हैं. एक तरह से देखा जाए तो राज्य की सत्ता दो ही दलों के पास रही है, 2017 विधानसभा चुनाव की बात करें तो राज्य की सामान्य 48 सीटों में से 33 सीटों पर राजपूत जाति के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की है राज्य की 68 विधानसभा सीट में अकेले 50 फीसदी सीटों पर इसी जाति का कब्जा है हिमाचल प्रदेश में शुरुआती दौर से ही कांग्रेस मैं राजपूत जाति के मुख्यमंत्री बने खुद वीरभद्र सिंह राज्य में 6 बार मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल चुके हैं जबकि दो बार प्रेम कुमार धूमल और दो बार राम लाल ठाकुर मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

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