Tue. Feb 7th, 2023
Jasprit Bumrah कर रहे होते कनाडा में नौकरी लेकिन अब बने टेस्ट कप्तान, मां की कुर्बानी ने पूरा किया सपना!

जसप्रीत बुमराह बने टीम इंडिया के कप्तान

रोहित शर्मा की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) को टीम की कप्तानी दी गई है. वह एजबेस्टन टेस्ट में टीम इंडिया की कमान संभालेंगे

भारतीय टीम 35 साल बाद तेज गेंदबाज की कप्तानी में उतरेगा. इंग्लैंड के खिलाफ एजबेस्टन में होने वाले टेस्ट मुकाबले में जसप्रीत बुमराह (Jasprit Bumrah) टीम के कप्तान होंगे. भारत के नियमित कप्तान रोहित शर्मा कोरोना से संक्रमित होने के कारण इस मुकाबले में हिस्सा नहीं लेंगे. कपिल देव (Kapil Dev) के बाद पहली बार किसी तेज गेंदबाज को टेस्ट टीम की कप्तानी दी गई है. यह टेस्ट मुकाबला पिछले साल खेली गई सीरीज का आखिरी टेस्ट मुकाबला है. साल 2018 में टेस्ट डेब्यू करने वाले बुमराह आज कनाडा में नौकरी रहे होते अगर अगर उन्होंने अपनी प्रतिभा को साबित नहीं किया होता.

बुमराह ने किया संघर्षों का सामना

जसप्रीत बुमराह ने हमेशा से ही कहा है कि उनकी कामयाबी में सबसे बड़ी और अहम भूमिका उनकी मां की ही है. बुमराह बहुत छोटे थे जब उनके सिर के ऊपर से पिता का साया उठ गया था. इसके बाद उनके लिए जो किया मां ने ही किया. जसप्रीत बुमराह ने एक इंटरव्यू में कहा, पिता जब गुजरे तो मैं बहुत छोटा था. मुझे ज्यादा कुछ याद नहीं है. उसके बाद हमारी स्थिति अच्छी नहीं थी. मेरे पास बस एक जोड़ी जूते थे. एक जोड़ी टी-शर्ट हुआ करता थी. मैं उसे हर दिन धोता था और बार-बार इस्तेमाल करता था. मुझे बस अपनी मां की कुर्बानियां याद हैं. उन्होंने बहुत मेहनत की है और उनकी कुर्बानियां रंग लाई हैं.’ उन्होंने कहा, ‘बचपन में आप ऐसी कहानियां सुनते है कि कुछ लोग आते हैं और आपको खेलता देखते हैं और उससे प्रभावित हो जाते हैं जिसके बाद उनका चयन हो जाता है. मेरे साथ ही ऐसा ही हुआ. ये कठिन समय आपको मजबूत बनाते हैं क्योंकि आपने पहले संघर्षपूर्ण दिन देखे हैं.’

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मां ने दिया था ग्रेजुएशन तक का समय

उन्होंने कहा, मैं जब पांचवीं छठी क्लास में था तभी से मुझे क्रिकेट से प्यार था. लेकिन मेरी नौकरी करती थी और उन्हें समझाना मुश्किल था कि क्रिकेट में भी करियर बनाया जा सकता है. लेकिन मुझे यकीन था कि मैं क्रिकेट में कुछ कर सकता हूं. मेरी मां ने मुझे दसवीं पास करने के बाद क्रिकेट में करियर बनाने का समय दिया. उन्होंने कहा कि तुम्हारी ग्रेजुएशन तक का समय है. तुम्हें जिसमें हाथ आजमाना है आजमाओ. अगर मैं कामयाब नहीं होता तो मुझे कनाडा जाना पड़ता. अपने कॉलेज के पहले ही साल में मैं आईपीएल खेलने लगा और फिर भारतीय टीम में जगह मिल गई.’

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