Tue. Feb 7th, 2023
Jobs, Career Tips in Hindi: करियर या जॉब में तरक्की के लिए बहुत जरूरी है इमोशनल इंटेलिजेंस, जानिए ये क्या है और इसे कैसे बढ़ाएं?

इमोशनल इंटेलिजेंस करियर में तरक्की के लिए बहुत जरूरी है

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Emotional Intelligence in Hindi: इमोशनल इंटेलिजेंस को ईक्यू यानी Emotional Quotient (EQ) भी कहते हैं. यह भावनाओं को पहचानने, उसका आकलन करने, उसे कंट्रोल और जाहिर करने की क्षमता है.

What is Emotional Intelligence: कुछ ऐसे स्किल्स हैं जो स्कूल में नहीं पढ़ाए जाते हैं, लेकिन वे महत्वपूर्ण होते हैं. एक ऐसा ही स्किल है इमोशनल इंटेलिजेंस (Emotional Intelligence) या भावनात्मक बुद्धिमत्ता. यह लाइफ और करियर में आगे बढ़ने के लिए जरूरी है. यह किसी भी व्यक्ति को अपने करियर में सफल होने के लिए तैयार करता है. इमोशनल इंटेलिजेंस विशेष रूप से स्टूडेंट्स के लिए महत्वपूर्ण है, जो उन्हें तरक्की की राह दिखाते हैं. एक रिसर्च के मुताबिक, स्टडी या काम में बेहतर प्रदर्शन के लिए जरूरी 67 फीसदी गुण आपकी भावनात्मक बुद्धिमत्ता के साथ ही जुड़े हुए हैं. आगे जानते हैं इसके बारे में और इसे बढ़ाने के तरीके के बारे में.

क्या है इमोशनल इंटेलिजेंस?

इमोशनल इंटेलिजेंस को ईक्यू यानी Emotional Quotient (EQ) भी कहते हैं. यह भावनाओं को पहचानने, उसका आकलन करने, उसे कंट्रोल और जाहिर करने की क्षमता है. हाई ईक्यू (High EQ) वाले लोग अपने आसपास के लोगों को समझने, उनके प्रति सहानुभूति रखने और जुड़ने की क्षमता के कारण आमतौर पर महान नेता या खिलाड़ी बनते हैं. सरल शब्दों में, इमोशनल इंटेलिजेंस खुद की एवं दूसरों की भावनाओं को समझने, व्यक्त करने और नियंत्रित करने की योग्यता है. इसमें अपनी भावनाओं को समझकर उनका उचित प्रबंधन करना भी शामिल है. यह लोगों के साथ काम करने की काबिलियत बढ़ाने के अलावा तनाव कम करने में भी बेहद कारगर है.

आपने अपने आसपास कई ऐसे लोगों को देखा होगा जो इंटेलीजेंट होते हैं और बहुत अधिक मेहनत भी करते हैं. लेकिन इन सबके बावजूद वे अपने जीवन या करियर में सफल नहीं हो पाते. इसका मतलब है कि वह व्यक्ति इमोशनल इंटेलिजेंस की दृष्टि से कमजोर है. ईक्यू (EQ) ठीक नहीं होने से आईक्यू (Intelligence Quotient) कारगर साबित नहीं हो पता, जिससे जीवन में आगे बढ़ने में कठिनाई झेलनी पड़ती है. अब आप समझ गए होंगे कि यह आपके करियर को कैसे प्रभावित करती है.

स्टूडेंट्स के लिए इमोशनल इंटेलिजेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

  1. जब आप अपनी भावनाओं को समझकर उसे अच्छी तरह मैनेज करते हैं, तो टॉप ग्रेड मिलने की संभावना बढ़ जाती है. नकारात्मक भावनाएं सीखने की गति को बाधित कर सकती हैं. ऐसे में, ईक्यू (EQ) स्टूडेंट को उन भावनाओं से निपटने के लिए बेहतर तरीके से तैयार करता है.
  2. ईक्यू की बदौलत स्टूडेंट्स जल्दी से परीक्षा के तनाव को दूर कर सकते हैं, बोरियत को दूर कर सकते हैं और बोरिंग सब्जेक्ट की स्टडी के दौरान अपनी एकाग्रता को बनाए रख सकते हैं. यह ख़राब ग्रेड की चिंता में डूबे रहने के बजाय अगली बार इम्प्रूव करने क्षमता डेवलप करता है.
  3. रिसर्च बताते हैं कि मजबूत इमोशनल इंटेलिजेंस जीवन में बेहतर मानसिक, सामाजिक और यहां तक ​​कि शारीरिक स्वास्थ्य प्रदान करता है. यह जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करता है. हाई ईक्यू वाले स्टूडेंट्स आगे जाकर सोशल लाइफ में एक्टिव और बेहतर स्थिति में होते हैं.
  4. करियर में आगे बढ़ने के लिए भी ईक्यू जरूरी है. जब आप वर्क प्लेस पर होते हैं, तो भावनात्मक बुद्धिमत्ता आपकी सफलता को प्रभावित करती है. यह उन नौकरियों के लिए विशेष रूप से सच है जिसमें इमोशनल एनकाउंटर (emotional encounters) की संभावना अधिक होती है. ईक्यू का उपयोग करना किसी टीम को मैनेज करने के लिए एक महत्वपूर्ण स्किल है.
  5. इमोशनल इंटेलिजेंस अपनों और अन्य लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाने के लिए भी बहुत जरूरी माना जाता है. यह व्यक्ति को सेल्फ अवेयर (Self Aware) यानी करियर और जीवन के प्रति जागरूक रखता है. यह इस बात का एहसास दिलाता है कि सिर्फ खुद के जीवन या अपने काम में उलझकर रह जाना ही जीवन नहीं है.

तो, सवाल यह है कि क्या आप अपनी भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) में सुधार कर सकते हैं? ऐसा कर सकते हैं, आइए जानते हैं इसमें सुधार करने के तरीके.

इमोशनल इंटेलीजेंस कैसे बढ़ाएं?

यह कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसे आप जब चाहें तब स्विच ऑन कर सकते हैं. इमोशनल इंटेलिजेंस को अचानक तेजी से बढ़ाया नहीं जा सकता है. यह एक स्किल है जिसे विकसित होने में समय लगता है. आप अपनी सोच, कामकाज के तरीके और लोगों के प्रति अपने नजरिए में बदलाव लाकर इसे बढ़ा सकते हैं. इमोशनल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए आप इन बातों का ध्यान जरूर रखें:

  • यह देखने का अभ्यास करें कि आप विभिन्न स्थितियों में कैसा महसूस करते हैं और कैसे काम करते हैं.
  • भविष्य में होने वाली घटनाओं के परिणाम के बारे में पहले से तैयार रहें और उन भावनाओं को पहले से स्वीकार करें.
  • सेल्फ अवेयरनेस में सुधार के लिए डायरी रखें. इस बात को नोट करने कि किसी घटना पर आपने क्या महसूस किया और कैसे रिएक्ट किया.
  • अगर गुस्से या उदासी की भावना अधिक हो, तब अपनी एनर्जी को क्रिएटिव या प्रोडक्टिव काम में लगाएं.
  • विफलता से निराश होने की जगह इसे सीखने के अवसरों के रूप में देखने की कोशिश करें.
  • एक्टिव लाइफ जीने का प्रयास करें. पूरे दिन सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखने के तरीके खोजें.
  • भावनात्मक रूप से किसी बात पर रिएक्ट करने के बजाय क्रिएटिव प्रतिक्रिया दें.
  • उस समस्या और समाधान को जानने की कोशिश करें जिसका संबंध क्रोध या हताशा से नहीं हो.
  • अपने इमोशनल रिएक्शन हमेशा नोट करें और अपनी भावनाओं को टटोलने का प्रयास करें.
  • सेल्फ अवेयरनेस की प्रैक्टिस करते हुए हमेशा दूसरों की स्थिति को समझने का प्रयास करें.

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