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Maharashtra: शिंदे ने जब दोनों बेटों को गंवाया, तब संन्यास का मन बनाया, रिक्शा चलाकर बच्चे की जान बचाई, महाराष्ट्र के सीएम की कहानी फिर याद आई

एकनाथ शिंदे की वो कहानी फिर याद आई

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मुंबई में दंगे हुए थे. हालात खराब थे. बाहर तनाव था. कहीं आने-जाने के लिए कोई साधन उपलब्ध नहीं था. बच्चे की मां का रो-रोकर बुरा हाल था.

साल 2000 की घटना है. एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के दोनों बेटों ने जान गंवाई थी. दोनों की डूब कर मौत हुई थी. एक साथ दो बेटों की मौत किसी भी बाप के लिए कलेजा चीर कर रख देने वाली घटना साबित होगी. एकनाथ शिंदे भी पूरी तरह से टूट चुके थे. उनका धैर्य जवाब दे चुका था. एकनाथ शिंदे को अब किसी भी काम में मन नहीं लग रहा था. वे राजनीति छोड़ने का मन बना चुके थे. तब उनके राजनीतिक गुरु समझे जाने वाले आनंद दिघे ने उनका धीरज बंधाया. एक बार फिर राजनीतिक जीवन में सक्रिय करने के लिए जोर लगाया. उनकी ठाणे महापालिका में सभागृह के नेता पद पर नियुक्ति हुई. इसके बाद मुंबई से सटे ठाणे की राजनीति का माहौल ही बदल गया. आज वही एकनाथ शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री (Maharashtra Chief Minister) पद पर विराजमान हुए हैं. उनके साथ पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने उप मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ग्रहण किया है.

शिंदे का गढ़ है ठाणे. जब शिंदे ठाणे की राजनीति में सक्रिय हुए थे तब पालिका कार्यालय में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी थी. जो ऑफिस शाम को पांच बजे से पहले ही बंद हो जाया करता था वो देर रात तक शुरू रहने लगा. लोगों के काम करने की जिम्मेदारियां बढ़ती ही जा रही थीं, क्योंकि लोगों की उम्मीदें बढ़ने की वजह से उनकी उम्मीदें बढ़ती जा रही थीं. धीरे-धीरे आनंद दिघे के इस शार्गिद पर बालासाहेब ठाकरे की नजरें पड़ीं. साल 2004 में शिंदे को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला. इसके बाद वे चार बार विधानसभा चुनाव जीत कर आए.

एकनाथ शिंदे से जुड़ी एक और कहानी, बहुत पुरानी

एकनाथ शिंदे से जुड़ी एक और कहानी उनके पड़ोसियों ने इंडिया टूडे ग्रुप को दिए इंटरव्यू में सुनाई है. साल 1989 की बात है. एकनाथ शिंदे ने एक बच्चे की जान बचाई थी. तब मुंबई में दंगे हुए थे. वो बच्चा बहुत बीमार था. उसकी मां का रो-रोकर बुरा हाल था. समय रहते उस बच्चे को अस्पताल पहुंचाना जरूरी था. आने-जाने के सारे माध्यम बंद थे. बाहर तनाव का माहौल था. एकनाथ शिंदे ने रिक्शा चलाते हुए उस बच्चे को अस्पताल पहुंचाया. ठाणे के उनके पुराने पड़ोसी बताते हैं कि जरूरत के वक्त वे हमेशा खड़े हो जाने वाले शख्स थे.

घटनाएं ऐसे बदलती रहीं तेजी से और महाराष्ट्र के सीएम बने शिंदे

2014 और 2019 में उन्हें कैबिनेट मंत्री का पद मिला. नगरविकास और सार्वजनिक निर्माण मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी मिली. पिछले दस दिनों के तेजी से बदलते घटनाक्रम के बाद अब उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी मिली है. मुख्यमंत्री बनने से पहले शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट से बगावत करने के बाद वे 8 दिनों तक गुवाहाटी में रहे. एक दिन सूरत में बिताया. नौवें दिन वे गोवा पहुंचे. गोवा से वे मुंबई वापस आए. यहां आते ही उन्होंने देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और 30 जून की शाम मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

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21 जून को हुई इन तेजी से बदलती घटनाओं की शुरुआत हुई. इस दौरान एकनाथ शिंदे पर रिक्शावाला कह कब फब्तियां कसी गईं. उन्हें गद्दार कहा गया. लेकिन वे बार-बार यह कहते रहे कि वे कट्टर शिवसैनिक हैं. वे कहते रहे कि उन्होंने बालासाहेब ठाकरे और हिंदुत्व के विचारों को लेकर चलने के लिए ही एनसीपी और कांग्रेस के साथ शिवसेना द्वारा सरकार बनाए रखने के खिलाफ खड़े हैं.

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