Tue. Feb 7th, 2023
Maharashtra: 'शिंदे-फडणवीस की सरकार, नहीं टिकेगी ढाई साल', NCP प्रदेश अध्यक्ष ने किया बड़ा दावा

एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील ने कहा कि 2024 तक नहीं चलेगी शिंदे-फडणवीस की सरकार

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जयंत पाटील ने पत्रकारों से कहा, ‘ भारतीय जनता पार्टी को भी यह मालूम है कि यह एक अवसरवादी गठबंधन है. यह सरकार कितनी देर तक चलेगी और 2024 के चुनाव में यह फिर से चुनकर आ पाएगी या नहीं, इस बारे में शंका है.’

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लिए हुए एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) को 48 घंटे भी खत्म नहीं हुए कि शरद पवार की पार्टी एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटील (Jayant Patil NCP) ने एक बड़ा बयान दे दिया है. एकनाथ शिंदे के समर्थक विधायक अभी मुंबई पहुंचे भी नहीं हैं कि शिंदे गुट के विधायकों में मंत्रिपद को लेकर रस्सीखेंच शुरू होने की खबरें बाहर आने लगी है. जयंत पाटील ने कहा है कि शिंदे और देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis BJP) की यह सरकार 2024 तक नहीं चल पाएगी. राज्य में मध्यावधि चुनाव होकर रहेगा. गुुरुवार की शाम राजभवन में एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस ने शपथ ग्रहण किया और शुक्रवार को जयंत पाटील ने मीडिया से संवाद करते हुए यह बयान दिया.

जयंत पाटील ने पत्रकारों से कहा, ‘ भारतीय जनता पार्टी को भी यह मालूम है कि यह एक अवसरवादी गठबंधन है. यह सरकार कितनी देर तक चलेगी और 2024 के चुनाव में यह फिर से चुनकर आ पाएगी या नहीं, इस बारे में शंका है. मुझे तो लगता है कि 2024 से पहले ही चुनाव होगा. तब ये सब फिर से चुन कर आएंगे या नहीं, इसकी सही-सही जानकारी राज्य के उप मुख्यमंत्री को भी है. ऐसे में इन पर कितना निर्भर रहना है, बीजेपी को तय करना है.’

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जयंत पाटील का बयान यूं ही नहीं है. जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक प्रहार संगठन के प्रमुख बच्चू कडू ने कैबिनेट मंत्री के पद की मांग की है. महा विकास आघाड़ी सरकार में वे राज्यमंत्री थे. अब उन्होंने कृषि, ग्राम विकास या जलसंसाधन विभाग की मांग की है. वहीं अब्दुल सत्तार और संदीपन भुमरे को कैबिनेट बर्थ देकर संजय शिरसाट को कैसे एडजस्ट किया जाए, यह एकनाथ शिंदे गुट के लिए बड़ी सरदर्दी बन कर सामने आ रहा है. संदीपन भुमरे कैबिनेट मंत्री थे और अब्दुल सत्तार राज्यमंत्री थे. इसलिए उनके मंत्री बनने की की संभावना ज्यादा है. ऐसे में औरंगाबाद से तीसरे दावेदार संजय शिरसाट को पहले से ही शंका है कि उनके हाथ खाली ना रह जाएं.

सवाल यह है कि एकनाथ शिंदे को समर्थन करने वाले 50 विधायकों की कुछ ना कुछ उम्मीदें जरूर रही होगी. ऐसे में एकनाथ शिंदे के लिए सबको संतुष्ट कर पाना आसान नहीं होगा. ऐसे में जब रेवड़ी बंटेगी और जो लाइन में पीछे खड़े रह जाएंगे और कुछ नहीं ले पाएंगे, वे कहां जाएंगे, यह वाकई एक बड़ा सवाल है.

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