Wed. Feb 8th, 2023
Maharashtra Politics: 4 CM तो बाद में उपमुख्यमंत्री बने, लेकिन एक मुख्यमंत्री ऐसा जो मंत्री पद पर ही संतुष्ट हो गया

देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे

Image Credit source: Tv9 Network

देवेंद्र फडणवीस के बारे में अभी पता नहीं है कि वो कौन सा विभाग संभालेंगे, लेकिन पिछले 4 उपमुख्यमंत्रियों में से 2 नेता राजस्व मंत्री बने जबकि एक वित्त और दूसरा पीडब्ल्यूडी मंत्री बना था. अब देखना होगा कि फडणवीस कौन सा विभाग संभालते हैं.

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट (Maharashtra Political Crisis) कल गुरुवार रात को नई सरकार के शपथ ग्रहण करने के साथ ही खत्म हो गया, लेकिन पूरी कहानी के खत्म होते-होते मामले में नया ट्विस्ट तब आ गया जब मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) ने ऐलान किया कि वो मुख्यमंत्री नहीं बन रहे और एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) राज्य के मुखिया होंगे. वह सरकार में शामिल नहीं होंगे. हालांकि फिर कुछ देर बाद यह ऐलान हुआ कि वो शिंदे सरकार में डिप्टी होंगे और उपमुख्यमंत्री का पद संभालने जा रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाराष्ट्र में एक नेता ऐसा भी है जो मुख्यमंत्री बनने के बाद दूसरी सरकार में मंत्री के पद पर भी रहा.

महाराष्ट्र की राजनीति में यह पहली बार नहीं हुआ जब कोई मुख्यमंत्री बाद में नई सरकार में उपमुख्यमंत्री पद पर आने को राजी हो गया हो. फडणवीस महाराष्ट्र के ऐसे चौथे नेता हो गए, जिन्होंने मुख्यमंत्री रहने के बाद किसी सरकार में उपमुख्यमंत्री का पद स्वीकार किया.

ऐसा CM जो उपमुख्यमंत्री नहीं PWD मंत्री बने

सबसे पहले 1978 में शंकर राव चव्हाण मुख्यमंत्री बनने के बाद शरद पवार की सरकार में उपमुख्यमंत्री बने. इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवाजीराव पाटिल नीलांगकर 2004 में सुशील कुमार शिंदे सरकार में राजस्व मंत्री बने. नारायण राणे जो 1999 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने थे बाद में वह विलासराव देशमुख सरकार में राजस्व मंत्री बने.

लेकिन एक मुख्यमंत्री ऐसे भी हुए जो बाद में उपमुख्यमंत्री नहीं बने लेकिन महज मंत्री बनने से ही संतुष्ट हो गए. कांग्रेस नेता अशोक चव्हाण जो 2008 से लेकर 2010 तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे, लेकिन ढाई साल पहले 2019 में जब राज्य में शिवसेना की अगुवाई कांग्रेस और एनसीपी की महा विकास अघाड़ी सरकार बनी तो वे पीडब्ल्यूडी मंत्री बने.

देवेंद्र फडणवीस के बारे में अभी पता नहीं है कि वो कौन सा विभाग संभालेंगे, लेकिन पिछले 4 उपमुख्यमंत्रियों में से 2 नेता राजस्व मंत्री बने जबकि एक वित्त और दूसरा पीडब्ल्यूडी मंत्री बना था. अब देखना होगा कि फडणवीस कौन सा विभाग संभालते हैं. हालांकि चर्चा है कि वह राज्य के गृह और वित्त मंत्री हो सकते हैं.

एक उपमुख्यमंत्री ही पूरा कर सका कार्यकाल

1960 में अस्तित्व में आए महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने की परंपरा की शुरुआत 1978 में तब हो गई थी जब वसंतदादा पाटिल की सरकार में नासिक राव तिरपुडे उपमुख्यमंत्री बने. फिर 1978 से लेकर 1985 तक नासिक राव समेत सिर्फ 3 नेता ही उपमुख्यमंत्री बने. इन 7 सालों में कुल मिलाकर करीब 3 साल ही ये नेता उपमुख्यमंत्री के पद पर रहे.

फिर यह परंपरा टूट गई और अगले 10 सालों तक महाराष्ट्र में कोई भी नेता उपमुख्यमंत्री के रूप में सामने नहीं आया. 1995 के विधानसभा चुनाव में राज्य में पहली बार शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सत्ता में आई और शिवसेना के नारायण राणे सीएम बने तो बीजेपी के गोपीनाथ मुंडे के खाते में उपमुख्यमंत्री का पद गया. वह 14 मार्च 1995 में राज्य के चौथे उपमुख्यमंत्री बने.

फडणवीस के CM काल में टूट गई थी परंपरा

14 मार्च 1995 का वो दिन और आज का एकनाथ शिंदे का शासनकाल. देवेंद्र फडणवीस सरकार (2014 से 2019) का कार्यकाल छोड़ दें तो हर सरकार में कोई न कोई नेता उपमुख्यमंत्री के रूप में नियमित तौर पर सरकार का हिस्सा बना रहा. 1995 में बनी शिवसेना-बीजेपी सरकार में उपमुख्यमंत्री के रूप में गोपीनाथ मुंडे पहले ऐसे नेता रहे जिन्होंने बतौर मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा किया. वह ऐसा करने वाले राज्य के एकमात्र नेता भी हैं.

1999 में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत में लौटी तो विलासराव देशमुख सीएम बने तो छगन भुजबल उपमुख्यमंत्री बने. वह करीब 4 साल पद पर रहे लेकिन चुनावी साल में उन्हें पद छोड़ना पड़ा. और उनकी जगह विजय सिंह मोहिते पाटिल उपमुख्यमंत्री बने थे. इस कार्यकाल के दौरान कांग्रेस ने अपना सीएम बदल कर विलासराव की जगह सुशील कुमार शिंदे को बना दिया था.

4 बार उपमुख्यमंत्री बने अजित पवार

5 साल बाद 2004 के चुनाव में कांग्रेस राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के साथ फिर से सत्ता में लौटी तो कमान विलासराव देशमुख को सौंप दी गई जबकि उपमुख्यमंत्री एनसीपी के आरआर पाटिल बने. वह भी 4 साल ही उपमुख्यमंत्री पद पर रह सके. चुनावी साल 2008 में गठबंधन सरकार ने विलासराव की जगह अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री बनाया तो छगन भुजबल उपमुख्यमंत्री बने.

कांग्रेस-एनसीपी का दांव चल निकला और नवंबर 2009 में लगातार तीसरी बार सत्ता पर काबिज हो गए. अशोक चव्हाण फिर से सीएम बने तो भुजबल उपमुख्यमंत्री बनाए गए, लेकिन घोटाले की वजह से चव्हाण को जाना पड़ा तो उनकी जगह पृथ्वीराज चव्हाण नए मुख्यमंत्री बने लेकिन उपमुख्यमंत्री पद में कोई बदलाव नहीं हुआ.

नवंबर 2010 में पृथ्वीराज चव्हाण के आते ही अजित पवार राज्य के आठवें उपमुख्यमंत्री के तौर पर काबिज हुए. लेकिन यह परंपरा तब टूट गई जब 2014 में देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनी और किसी नेता को उपमुख्यमंत्री का पद नहीं दिया. अजित पवार इस पद पर 4 बार काबिज हुए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *