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मंगल ग्रह पर या चांद पर नमूने जमा करना और उनकी वहीं जांच करना, रोबोट का एक प्रमुख काम होता है. जांच के बाद रोबोट डेटा धरती पर वैज्ञानिक को भेजते हैं.


Jun 30, 2022 | 3:23 PM

TV9 Hindi

| Edited By: निलेश कुमार

Jun 30, 2022 | 3:23 PM




Mount Etna For Space Training to Robot: अंतरिक्ष की दुनिया में भी कई सारे रहस्य हैं. इन रहस्यों का जानने-समझने, जीवन की संभावनाओं का पता लगाने और स्पेस टूरिज्म जैसे उद्देश्यों के लिए भारत समेत दुनिया के कई देश चंद्रमा और मंगल ग्रह को लेकर अपने-अपने मिशन पर हैं. जब किसी रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाता है तो उसकी ट्रेनिंग बहुत जरूरी होती है. अब चांद और मंगल ग्रह के लिए अगर किसी रोबोट को ट्रेन्ड करना है तो इसके लिए जरूरी है, चांद और मंगल जैसे माहौल में ही उसकी टेस्टिंग करना. लेकिन क्या अंतरिक्ष में जाए बगैर यह संभव है? जवाब है- हां, संभव है.

Mount Etna For Space Training to Robot: अंतरिक्ष की दुनिया में भी कई सारे रहस्य हैं. इन रहस्यों का जानने-समझने, जीवन की संभावनाओं का पता लगाने और स्पेस टूरिज्म जैसे उद्देश्यों के लिए भारत समेत दुनिया के कई देश चंद्रमा और मंगल ग्रह को लेकर अपने-अपने मिशन पर हैं. जब किसी रोबोट को अंतरिक्ष में भेजा जाता है तो उसकी ट्रेनिंग बहुत जरूरी होती है. अब चांद और मंगल ग्रह के लिए अगर किसी रोबोट को ट्रेन्ड करना है तो इसके लिए जरूरी है, चांद और मंगल जैसे माहौल में ही उसकी टेस्टिंग करना. लेकिन क्या अंतरिक्ष में जाए बगैर यह संभव है? जवाब है- हां, संभव है.

दरअसल धरती पर भी एक ऐसी जगह है, जो चांद और मंगल ग्रह की तरह है. यह जगह है- यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एटना. माउंट एटना का माहौल चांद जैसा या मंगल ग्रह जैसा है.यह जगह रोबोट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए ट्रेनिंग देने का एक अहम हिस्सा है. बिना अंतरिक्ष में जाए ही रोबोट यहां अंतरिक्ष के लिए ट्रेन्ड किए जाते हैं.

दरअसल धरती पर भी एक ऐसी जगह है, जो चांद और मंगल ग्रह की तरह है. यह जगह है- यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एटना. माउंट एटना का माहौल चांद जैसा या मंगल ग्रह जैसा है.यह जगह रोबोट को अंतरिक्ष में भेजने के लिए ट्रेनिंग देने का एक अहम हिस्सा है. बिना अंतरिक्ष में जाए ही रोबोट यहां अंतरिक्ष के लिए ट्रेन्ड किए जाते हैं.

DW की रिपोर्ट के अनुसार, रोबोट को अंतरिक्ष में भेजेने से पहले ट्रेनिंग के लिए यूरोप के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एटना लाया गया है. जर्मनी की अंतरिक्ष एजेंसी जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) मिलकर यह प्रोजेक्ट चला रहे हैं. इस प्रोजेक्ट का नाम है-आर्चेस (ARCHES).

DW की रिपोर्ट के अनुसार, रोबोट को अंतरिक्ष में भेजेने से पहले ट्रेनिंग के लिए यूरोप के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी माउंट एटना लाया गया है. जर्मनी की अंतरिक्ष एजेंसी जर्मन एयरोस्पेस सेंटर (DLR) और यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ESA) मिलकर यह प्रोजेक्ट चला रहे हैं. इस प्रोजेक्ट का नाम है-आर्चेस (ARCHES).

इटली के सिसली इलाके में 2,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एटना में रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित कई रोबोट का परीक्षण किया गया. दरअसल, साइंटिस्‍ट उन सारी संभावित परिस्थितियों का आकलन कर लेना चाहते हैं, जिनसे चांद या मंगल पर अभियानों के दौरान रोबोट का सामना होगा.

इटली के सिसली इलाके में 2,600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित माउंट एटना में रिमोट कंट्रोल से नियंत्रित कई रोबोट का परीक्षण किया गया. दरअसल, साइंटिस्‍ट उन सारी संभावित परिस्थितियों का आकलन कर लेना चाहते हैं, जिनसे चांद या मंगल पर अभियानों के दौरान रोबोट का सामना होगा.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को डीएलआर के सिस्टम डिवेलपर बर्नहार्ड वोडेरमायर ने बताया कि माउंट एटना ऐसी जगह है जिसकी तुलना चांद या मंगल के ढांचे से की जा सकती है. पिछले कई अंतरिक्ष अभियानों के दौरान भी इस जगह का इस्तेमाल किया गया है. मंगल ग्रह पर या चांद पर नमूने जमा करना और उनकी वहीं जांच करना, रोबोट का एक प्रमुख काम होता है. जांच के बाद रोबोट डेटा धरती पर वैज्ञानिक को भेजते हैं.  (Photos: Pixabay, Pexels, Reuters)

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को डीएलआर के सिस्टम डिवेलपर बर्नहार्ड वोडेरमायर ने बताया कि माउंट एटना ऐसी जगह है जिसकी तुलना चांद या मंगल के ढांचे से की जा सकती है. पिछले कई अंतरिक्ष अभियानों के दौरान भी इस जगह का इस्तेमाल किया गया है. मंगल ग्रह पर या चांद पर नमूने जमा करना और उनकी वहीं जांच करना, रोबोट का एक प्रमुख काम होता है. जांच के बाद रोबोट डेटा धरती पर वैज्ञानिक को भेजते हैं. (Photos: Pixabay, Pexels, Reuters)






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