Wed. Feb 8th, 2023
News9 इम्पैक्ट: उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ आवाज बुलंद होते ही हाईकोर्ट ने उठाया कदम

कहा जा रहा है कि देहरादून पुलिस सीएयू के सचिव माहिम वर्मा और उनके सहयोगियों का पता लगाने में कामयाब नहीं हो पाई है.

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News9Live की 9 जून 2022 की रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड के 12 विधायकों ने उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन के खिलाफ याचिका दायर की. इसके बाद 20 जून को अंडर-19 क्रिकेटर के पिता ने भी एफआईआर दर्ज कराई.

उत्तराखंड क्रिकेट एसोसिएशन (CAU) में वित्तीय गड़बड़ी और गलत तरीके से खिलाड़ियों के चयन के बारे में News9Live ने लगातार खबरें ब्रेक की. इसके बाद 3 महीने की जांच में यह बात सामने आई कि राज्य संघ से जुड़े 7 सदस्यों में से एक सीएयू के सचिव माहिम वर्मा के खिलाफ इसी महीने एफआईआर दर्ज की गई और देहरादून पुलिस उन्हें ढूंढ नहीं पा रही है. News9Live की 9 जून 2022 की रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड के 12 विधायकों ने CAU के खिलाफ IPC की धारा 310 के तहत याचिका दायर की. इसके बाद 20 जून को देहरादून के वसंत विहार पुलिस स्टेशन में उत्तराखंड और अंडर-19 टीम इंडिया के क्रिकेटर आर्य सेठी के पिता वीरेंद्र सेठी ने सीएयू सचिव और 6 अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई. कहा जा रहा है कि देहरादून पुलिस वर्मा और उनके सहयोगियों का पता लगाने में कामयाब नहीं हो पाई है.

एफआईआर रद्द करने और कारावास टालने की मांग की गई

24 जून को वर्मा का प्रतिनिधित्व करने वाली 3 सदस्यीय लीगल टीम ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उत्तराखंड उच्च न्यायालय में एक अपील दायर की, जिसमें सेठी द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर रद्द करने और कारावास टालने की मांग की गई. 27 जून को वरिष्ठ न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई के की. साथ ही, जांच दल को निर्देश दिए. यह जांच दल देहरादून के एसएसपी जनमईजी खंडूरी ने सेठी द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद सीएयू के 7 सदस्यों को खोजने के लिए बनाया था, जिससे उनकी जांच पूरी हो सके. साथ ही, अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कानूनी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखा, जिससे आरोपियों से जरूरी पूछताछ की जा सके. दरअसल, उस केस में अदालत ने कहा था कि उन मामलों में गिरफ्तारी अपवाद होनी चाहिए, जिनमें 7 साल से कम जेल की सजा है. साथ ही उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने आरोपी को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया और राज्य सरकार को 18 जुलाई तक याचिका पर जवाब देने के लिए कहा. 18 जुलाई को ही इस मामले में अगली सुनवाई होगी. जांच में सामने आया है कि वर्मा को 22 जून के बाद से सीएयू मुख्यालय और उसके आसपास या देहरादून में नहीं देखा गया है. सूत्रों का दावा है कि वर्मा आखिरी बार काशीपुर में नजर आए थे, जहां डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट लीग आयोजित की जा रही थी.

क्रिकेटर को मिली थी जान से मारने की धमकी

यह ऐसा दूसरा टूर्नामेंट था, जिसमें उत्तराखंड के क्रिकेटरों को पर्याप्त एकमंडेशन नहीं दिया गया था. इसके अलावा वर्मा का फोन पिछले 72 घंटे से अनरीचेबल है. जानकारी के मुताबिक, सेठी ने 120बी (आपराधिक साजिश), 323 (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 384 (वसूली), 504 (जानबूझकर अपमान करना) और 506 (आपराधिक धमकी) आदि धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराई है. सेठी का आरोप है कि पिछले साल दिसंबर में राजकोट में विजय हजारे ट्रॉफी 2021 के दौरान उत्तराखंड के कोच मनीष झा, टीम मैनेजर नवनीत मिश्रा और वीडियो एनालिस्ट पीयूष रघुवंशी ने उनके बेटे को जान से मारने की धमकी दी. सेठी ने एफआईआर में आरोप लगाया कि इस घटना के बाद उन्होंने सीएयू के सचिव वर्मा से उनके देहरादून स्थित आवास पर मुलाकात कर इस मामले को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन इसकी जगह उन्हें 10 लाख रुपये देने के लिए कहा गया, जिससे उनके बेटे आर्य के क्रिकेट करियर में भविष्य में कोई रुकावट न आए. एफआईआर में संजय गोसाईं के अलावा दो अन्य सदस्यों सत्यम वर्मा और पारुल शर्मा का भी जिक्र किया गया है, जिन पर कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट का आरोप लगाया गया है. गोसाईं देहरादून के बाहरी इलाके में तनुष क्रिकेट अकादमी चलाते हैं, जिसमें सीएयू का दफ्तर है. गोसाईं का बेटा तनुष स्टेट लेवल क्रिकेटर है और वह इस सीजन में उत्तराखंड की रणजी ट्रॉफी टीम में भी शामिल था.

सीएयू अधिकारी ने कबूली गड़बड़ी की बात

पिछले सप्ताह News9Live ने सीएयू के एक अधिकारी की फोन पर हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग भी सुनी, जिसका काम सिलेक्शन ट्रायल्स आयोजित करना है. उसने गड़बड़ी और वसूली की बात कबूली और कहा कि उसके हाथ बंधे हुए हैं, जबकि वर्मा और अन्य ऑफिस में मौजूद नहीं हैं. News9Live की रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद कई और भी सामने आए और उन्होंने सीएयू के खिलाफ गड़बड़ी के आरोप लगाए. उत्तराखंड के 12 विधायकों (जिनमें से एक नैनीताल जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष हैं) ने आईपीसी नियम 310 के तहत विधानसभा में सीएयू के कुप्रबंधन के बारे में सवाल उठाया था. देहरादून में विधानसभा सत्र के बाद पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि कोरोना महामारी की वजह से जब देश में लॉकडाउन था और पूरा देश ठहर गया था. उस वक्त सीएयू ने किस तरह ट्रायल्स और टूर्नामेंट्स आयोजित करने के नाम पर बेतहाशा खर्च होने का दावा किया था. इस मामले में निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने उत्तराखंड सरकार से हस्तक्षेप और कार्रवाई करने का अनुरोध किया. साथ ही अपने भाषण के आखिर में कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाएंगे.

लॉकडाउन में भी करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा

इस मामले में जब विधायक उमेश कुमार से संपर्क किया गया तो उन्होंने सीएयू में आर्थिक गड़बड़ी के आरोप दोहराए. उन्होंने कहा, ‘आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सीएयू ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान टूर्नामेंट की फीस पर कुल 12.53 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया, जिसमें 2.46 करोड़ रुपये प्रोफेशनल फीस बताई गई थी. वहीं, वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान जब कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगा हुआ था और क्रिकेट नहीं खेला जा रहा था. उस दौरान सीएयू ने सिलेक्शन ट्रायल्स, टूर्नामेंट और उनकी मेजबानी व खानपान पर 11.44 करोड़ रुपये के खर्च का दावा किया.’ उन्होंने बताया कि सीएयू ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान प्रोफेशनल फीस पर 2.45 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया, उस वक्त कोविड नहीं था. ऐसे में उन्होंने महामारी के दौरान इस बजट को 6 करोड़ रुपये कैसे कर दिया? जब कोविड नहीं था, कहीं भी कोई प्रतिबंध नहीं था और पूरे देश में क्रिकेट खेला जा रहा था, उस वक्त प्रोफेशनल फीस पर कुल 2.27 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.’ उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा हुआ था, उस वक्त सीएयू ने प्रोफेशनल फीस पर 6.75 करोड़ रुपये खर्च कर दिए. जब कोई लॉकडाउन नहीं था, तब सीएयू ने 8 लाख रुपये अकाउंटिंग और कंसल्टिंग फीस के रूप में खर्च करने का दावा किया, लेकिन लॉकडाउन के दौरान इस पर 16 लाख रुपये कैसे खर्च हो गए? इसके अलावा उन्होंने वेंडर्स को ब्याज भी दिया. आप ही बताएं कि वेंडर्स को ब्याज कौन देता है? यहां आंकड़ों में बेशर्मी से हेराफेरी की गई और अब इस मामले में किसी की जवाबदेही तय होनी चाहिए.’

कई क्रिकेटर्स ने खराब प्रबंंधन के कारण छोड़ा खेल

बता दें कि इस मामले में पौड़ी के निवासियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक पत्र लिखा था. इन लोगों में स्थानीय क्रिकेटरों के अभिभावक शामिल थे. उन्होंने सीएयू और पौड़ी क्रिकेट असोसिएशन में कथित अनुचित चयन प्रक्रिया और भ्रष्टाचार की जांच का अनुरोध किया. इस पत्र में अभिभावकों ने दावा किया था कि पिथौरागढ़ जिले के 50 से अधिक युवा क्रिकेटरों ने कथित तौर पर कुप्रबंधन और घटिया व्यवहार के कारण खेल छोड़ दिया. इसके महज 48 घंटे बाद सीएयू के पदाधिकारियों ने 14 जून को देहरादून में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार और असत्य बताते हुए खारिज कर दिया. साथ ही, इस बात पर जोर दिया कि राज्य में विभिन्न स्तर के क्रिकेटरों को किस तरह ट्रेनिंग और रहने के लिए बेहतरीन सुविधाएं दी जा रही हैं. उस दौरान काशीपुर के एक स्थानीय समाचार पत्र को पेश किया गया था, जिसमें एक डिस्ट्रिक्ट लीग के दौरान उत्तराखंड के युवा क्रिकेटरों का रहन-सहन दिखाया गया था. इसके अलावा उत्तराखंड क्रिकेट से जुड़े दो खास लोगों ने गड़बड़ी और अनुचित तरीके से सेलेक्शन होने का दावा किया.

क्रिकेट का ज्ञान न रखने वालों के हाथ में बागडोर आने पर ऐसा ही होता है

भारतीय क्रिकेटर मानसी जोशी के कोच वीएस रौतेला ने उत्तराखंड क्रिकेट के हालात पर दुख जताया और सीएयू के वर्तमान प्रशासन पर कुप्रबंधन का दोष मढ़ दिया. रौतेला ने कहा, ‘यह दुखद स्थिति है और ऐसा तब होता है, जब क्रिकेट का ज्ञान नहीं रखने वाले लोग पूरा काम-काज संभालते हैं.’ उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा, ‘कौन वैध है और कौन धोखेबाज? पिछले कई साल में इन लोगों ने जिस तरह से राज्य में क्रिकेट खेला, उसके कारण चीजें धुंधली हो गईं. पैसा किसके पास जा रहा है? इतनी फीस क्यों ली जा रही है? इस मामले की जांच क्यों नहीं की जा रही है?’ उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों ने क्रिकेट खेला है, जो खेल को समझते हैं और इससे मोहब्बत करते हैं, उन्हें उत्तराखंड के मामलों की देख-रेख करनी चाहिए, लेकिन दुखद सच्चाई यह है कि गैर-क्रिकेटर प्रभारी हैं और अब आप देख सकते हैं कि क्रिकेट में हमारा राज्य कितना खराब है.’ उन्होंने कहा, ‘आप इरफान पठान का उदाहरण देखिए. वे जम्मू-कश्मीर गए और स्थानीय लीग में प्रतिभाएं खोजीं. उमरान मलिक के रूप में नतीजा आपके सामने है. और यहां उत्तराखंड में हमारे पास ऐसी कोई प्रतिभा नहीं है, क्योंकि असोसिएशन पैसा कमाने और स्थानीय लोगों को बेवकूफ बनाने में लगा हुआ है. कुछ लोग बाहर से आकर यहां के लोगों को बेवकूफ बना लेते हैं और पैसा बनाकर निकल जाते हैं.’ बीसीसीआई ने 2015 में अपूर्वा नादकर्णी को स्ट्रेंथ और कंडिशनिंग कोच नियुक्त किया था. उन्हें 8 अगस्त 2021 को दो साल के कॉन्ट्रैक्ट पर उत्तराखंड की सीनियर महिला क्रिकेट टीम और अंडर-23 टीम के लिए ट्रेनर नियुक्त किया गया. 26 मार्च, 2022 को वह हल्द्वानी में एक ट्रेनिंग कैंप से बाहर निकल गईं. उन्होंने उस रात टीम के होटल से चेक आउट किया और अपने घर गुजरात चली गईं.

सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों ने कर लिया था किनारा

नादकर्णी के मुताबिक, महिला टीम की फिजियोथेरेपिस्ट मीनाक्षी नेगी के साथ उनके कामकाजी संबंध अचानक खराब हो गए. टीम के व्हाट्सएप ग्रुप से रातों-रात हटाए जाने से पहले सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों ने उनसे किनारा कर लिया. वहीं, उनकी जगह दूसरी ट्रेनर को रख लिया गया. नादकर्णी के मुताबिक, टीम मैनेजर और फिजियो ने खिलाड़ियों को निर्देश दिए कि वे उनके शेड्यूल का पालन न करें. इसकी जगह उन्हें नई ट्रेनर के शेड्यूल का पालन करने के लिए कहा गया, जिसे उस व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था. नादकर्णी ने बताया, ‘मैं अपमानित महसूस कर रही थी और जब मैंने यह पूछा कि मुझे ग्रुप से क्यों हटा दिया गया और मेरी जगह नई ट्रेनर को क्यों जोड़ा गया तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था. कैसे एक फिजियो अपने दम पर किसी को रिक्रूट और हायर कर सकता है, वह भी महज एक रात में? इस मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई गई? मैंने ये सवाल पूछे तो कोई जवाब नहीं मिला. सिर्फ मुझे इग्नोर कर दिया गया.’ इसके बाद मार्च के दौरान हल्द्वानी में एक ट्रेनिंग कैंप के दौरान नादकर्णी ने आरोप लगाया कि पूरे कोचिंग स्टाफ ने उनका बहिष्कार कर दिया. उन्होंने दावा किया कि एक भी खिलाड़ी को उनसे बात करने की इजाजत नहीं थी और भोजन के समय उन्हें बाहर अकेला छोड़ दिया गया, जबकि बाकी कोच एसी केबिन में बैठे थे. 26 मार्च को कैंप छोड़ने, सीएयू को अपना इस्तीफा भेजने और रात में ही होटल छोड़कर अपने घर गुजरात लौटने वाली नादकर्णी ने कहा, ‘यह मेंटल हैरेसमेंट और टॉर्चर जैसा था.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड क्रिकेट में इस तरह के रैंडम अपॉइंटमेंट्स बेहद आम हैं और इनके बारे में कोई भी सवाल नहीं किया जाता है.

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– जेमी ऑल्टर

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