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Rajasthan Mid Day Meal: अब क्लास 1 से 8 तक के बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगा दूध, कुपोषण से लड़ने के लिए सरकार लाई 'मुख्यमंत्री बाल-गोपाल योजना'

राजस्थान में बच्चों को मिड-डे मील में मिलेगा दूध

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Milk in Mid-Day Meal: ‘मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना’ के तहत बच्चों को मिड-डे मील में दूध दिया जाएगा. राज्य के बजट के दौरान इस योजना का ऐलान किया गया था.

Milk for Children in Rajasthan School: राजस्थान सरकार ने बच्चों के बीच कुपोषण को दूर करने और उन्हें मजबूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. राजस्थान में अब सरकारी स्कूल (Rajasthan Government) के पहली से आठवीं क्लास तक के बच्चों को एक हफ्ते में दो बार दूध मुहैया कराया जाएगा. एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से बच्चों के पोषण स्तर, सरकारी स्कूलों में उनके नामांकन और अटेंडेंस में इजाफा देखने को मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि बच्चों को पीने के लिए दूध मुहैया कराने से उनका विकास भी बेहतर होगा.

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान के बजट के दौरान इस बारे में ऐलान किया था. बच्चों को हफ्ते में दो दिन दूध देने की योजना को ‘मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना’ का नाम दिया गया है. इस योजना के तहत पहली से आठवीं क्लास तक के बच्चों को अब हफ्ते में दो दिन दूध दिया जाएगा. इसे मिड-डे मील स्कीम से जुड़े सरकारी स्कूलों, मदरसों और स्पेशल ट्रेनिंग सेंटर्स में लागू किया जाएगा. इन शैक्षणिक स्थानों पर पढ़ने वाले बच्चों को ‘मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना’ के तहत दूध दिया जाएगा, ताकि उनको पोषण स्तर सुधर सके.

मंगलवार और शुक्रवार को दिया जाएगा दूध

अतिरिक्त मुख्य सचिव (शिक्षा) पवन कुमार गोयल ने कहा कि इस योजना के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 69.21 लाख बच्चों को मंगलवार और शुक्रवार को मिल्क पाउडर से तैयार दूध उपलब्ध कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि अगर इन दोनों दिन कोई छुट्टी होती है, तो अगले दिन बच्चों दूध उपलब्ध कराया जाएगा. अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि पहली क्लास से लेकर पांचवीं क्लास तक के बच्चों को 150 मिलीलीटर दूध दिया जाएगा. वहीं, छठी से लेकर आठवीं क्लास तक के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध दिया जाएगा. गोयल ने बताया कि पाउडर दूध राजस्थान सहकारी डेयरी महासंघ से खरीदा जाएगा.

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राजस्थान सरकार की इस स्कीम से उन लाखों बच्चों को फायदा पहुंचेगा, जो घर पर दूध से वंचित रह जाते हैं. स्कूल में पढ़ने आने के दौरान मिड-डे मील में मिलने वाले दूध से उनका विकास तो होगा ही, साथ ही कुपोषण से ही निपटा जा सकेगा.

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