Wed. Feb 8th, 2023
Rocketry The Nambi Effect Review : जज्बे, जुनून और अन्याय के खिलाफ लड़ाई को दर्शाती है आर. माधवन की 'रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट', जानिए क्यों देखनी चाहिए ये फिल्म?

फिल्म के एक दृश्य में आर. माधवन

Image Credit source: ट्विटर

आर. माधवन (R Madhavan) एक ऐसी फिल्म लेकर आए हैं, जो हमें रोक कर सोचने को मजबूर कर देती है. फिल्म में उनके अभिनय को सदियों तक याद रखा जाएगा.

फिल्म : रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट

कास्ट : आर. माधवन, शाहरुख खान, सिमरन, गुलशन ग्रोवर रजित कपूर और सैम मोहन

लेखक : आर. माधवन

डायरेक्टर : आर. माधवन

निर्माता : सरिता माधवन, आर. माधवन , वर्गीज मूलन और विजय मूलन

रिलीज डेट : 1 जुलाई, 2022

रेटिंग : 4/5

Rocketry: The Nambi Effect Review : सिनेमा को यूं ही नहीं समाज का आईना कहा जाता है. कुछ फिल्में ऐसी आती हैं कि वो आपको अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं. ऐसी फिल्मों काकहीं ना कहीं आपकी जिंदगी में उसका प्रभाव रहता ही है. ये बात अगर फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को लेकर कही जाए तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगी. आर. माधवन एक ऐसी फिल्म लेकर आए हैं, जो हमें रोक कर सोचने को मजबूर कर देती है. रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट को देखना उन पलों को बार-बार जीने जैसा है, जिसका मेरे जीवन में लंबे समय से इंतजार था. फिल्म पद्मभूषण सम्मान से सम्मानित रॉकेट वैज्ञानिक नंबी नारायणन की जिंदगी पर आधारित है. एक ऐसा महान वैज्ञानिक, जिसने रॉकेट साइंस की दुनिया में भारत को ऊंचा उठाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया. इसके बदले में उन पर देश से गद्दारी करने का ठप्पा लगा दिया जाता है. आर. माधवन ने इस कहानी को पर्दे पर जीवंत करने की कोशिश की है, जो शायद आपके भी रोंगटे खड़े कर दे.

जुनून की कहानी है फिल्म रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट

इस फिल्म में आर. माधवन ने निर्देशन में डेब्यू किया है. फिल्म की खास बात ये है कि इसे दो भागों मे बांटा गया है. पहला हिस्सा में नंबी नारायणन की उपलब्धियों और देश के स्पेस विज्ञान में उनके योगदान को दिखाता है. तो वहीं, दूसरे भाग में अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई को दर्शाया गया है. इन दोनों ही हिस्सों में एक चीज कॉमन है- जुनून. वास्तव में फिल्म रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट उन सभी जुनूनी लोगों की कहानी है जो अपने हुनर को अपना हौसला बनाते है. घर परिवार को न्यौछावर कर देते हैं. फिल्म उन लोगों की भी कहानी है, जिन्हें ऊपर जाता देख उनके आसपास के लोग ही पीठ में छुरा घोंप देते हैं.

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म में दिलचस्प बात ये है कि इसमें बॉलीवुड के बादशाह यानी शाहरुख खान भी हैं. वो एक इंटरव्यूवर की भूमिका में हैं. इस फिल्म की पूरी कहानी बैकग्राउंड में है. नंबी नारायणन अभिनेता शाहरुख खान को कहानी सुनाते हैं, जिसके साथ कहानी आगे बढ़ती है. फिल्म के शुरुआत में ही नंबी नारायणन रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप की खबर सामने आती है, बस यहीं से सिलसिला शुरू होता है. रॉकेट्री: द नांबी इफेक्ट शुरू होती है नांबी नारायणन की जवानी से. एक हुनरमंद वैज्ञानिक की प्रतिभा को विक्रम साराभाई पहचानते हैं. ए पी जे अब्दुल कलाम भी उनका साथ देते हैं. दुनिया की सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों में से एक प्रिंस्टन यूनिवर्सिटी में नांबी पढ़ने जाते हैं. नासा में नौकरी पाते हैं लेकिन देश के लिए वे नासा को छोड़ देते हैं.

स्कॉटलैंड से 400 पाउंड के स्पेस उपकरण फ्री में ले आना, फ्रांस से तकनीक सीखकर उनसे बेहतर रॉकेट इंजन बनाना, अमेरिका के विरोध के बावजूद रूस से क्रायोजेनिक इंजन के पार्ट लाना सब कुछ फिल्म में शामिल है. नंबी उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जाने वाला रॉकेट विकसित करते हैं. रॉकेट का नाम है VI AS. सफल टेस्टिंग के बाद नंबी अपनेगुरु के नाम का के वह जाकर बीच में लिख देते हैं. रॉकेट का नाम पड़ता है, विकास. ये विकास रॉकेट ही आज तक इसरो से भेजे जाने वाले उपग्रहों को अंतरिक्ष में ले जा रहा है. हालांकि, कहानी में मोड़ तब आता है जब उन पर रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया जाता है. उन्हें थर्ड डिग्री दिया जाता है. उनके हाथ से चाय का कप गिरा दिया जाता है. उनकी परिवार को तिरस्कार की नजरों से देखा जाता है. माधवन अकेले ही इस सिस्टम से जूझ रहे हैं, ठीक वैसे जैसे कभी नांबी नारायणन खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सिस्टम और न्यायपालिका से जूझ रहे थे.

फिल्म में उन्नी का किरदार बेहद महत्वपूर्ण दिखाई पड़ता है. जो फ्रांस में नंबी नारायणन के प्रोजेक्ट को सफल बनाते हैं. लेकिन इसी प्रोजेक्ट के बीच उनका एकलौता बेटा मर जाता है. ये बात नंबी जानते हैं, लेकिन वह उन्नी को नहीं बताते. हालांकि, उन्नी उन्हें बेरहम कहते हैं. लेकिन अंत तक जो साथ देता है, वह उन्नी ही है. सीबीआई अपनी कार्रवाई पूरी करती है. जांच कर रहा पुलिस अधिकारी फंसाने के आरोप में सस्पेंड हो जाता है. फिल्म के अंत में एक शादी समारोह में नंबी को पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया है. फिल्म का अंत सुखद है.

इमोशंस और ह्यूमर से भरपूर है फिल्म

आर. माधवन ने वास्तव में जबरदस्त निर्देशन किया है. फिल्म में दमदार डायलॉग्स हैं.उन्होंने पर्दे पर इमोशंस को सजीव कर दिया. फिल्म में ह्यूमर भी शानदार है. जब नंबी नारायणन को रॉकेट साइंस तकनीक बेचने के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया जाता है, उस वक्त उनके और परिवार के साथ जो होता है, वो आपकी आंखें नम कर देगा. जेल में उन्हें यातना देने से लेकर बारिश में पत्नी संग बीच सड़क रास्ते पर धकेल दिए जाने जैसे कई सीन तो इतने मार्मिक हैं. फिल्म में उनके अभिनय को सदियों तक याद रखा जाएगा.

कैसा है अभिनय?

नांबी नारायणन की पत्नी मीरा के रोल में माधवन की हिट तमिल फिल्मों की साथी सिमरन हैं. नांबी पर जो गुजरी और उसका असर भारतीय समाज से सीधे जुड़ी एक गृहिणी पर कैसा होता है, सिमरन ने जीकर दिखाया है. उनका पूरा दर्द निचोड़ देने वाला है. उन्नी के किरदार की अपनी एक अलग पहचान है.

क्यों देखी जानी चाहिए

नांबी नारायणन खुद इस फिल्म की मेकिंग से शुरू से जुड़े रहे हैं. सिरसा रे का कैमरा भारत सहित अमेरिका, रूस, स्कॉटलैंड, फ्रांस की खूबसूरती के साथ-साथ स्पेस इंजन की भव्यता दर्शाने में कामयाब रहा है. बैकग्राउंड म्यूजिक और गाने कहानी के अनुरूप हैं. फिल्म उन सभी युवाओं को तो जरूर ही देखनी चाहिए जो देश के लिए कुछ करना चाहते हैं लेकिन मुसीबतों से डरते हैं. ये सिर्फ किसी सच्ची घटना से प्रेरित फिल्म नहीं है। ये देश में एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक के साथ हुए अन्याय की एक सच्ची घटना का दस्तावेज है.

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