Wed. Feb 8th, 2023
School Innovation Council: 2047 की चुनौतियों से निपटने के लिए लॉन्च की गई स्कूल इनोवेशन काउंसिल, जानिए क्या हैं इसके फायदे

स्कूल इनोवेशन काउंसिल के फायदे

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SIC Launch: स्कूल इनोवेशन काउंसिल (एसआईसी) की शुरुआत की गई है. स्कूलों में एसआईसी की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को कायम रखने के लिए की गई है. जिसका उद्देश्य भविष्य के लिए बच्चों को इनोवेटिव बनाना है.

School Innovation Council: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल (एमआईसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने संयुक्त रूप से स्कूल इनोवेशन काउंसिल (एसआईसी) की शुरुआत की है. इसके साथ ही पूरे भारत में 12,800 से अधिक स्कूल शिक्षकों को इनोवेशन एम्बेसडर्स के रूप में मान्यता दी गई. स्कूल इनोवेशन काउंसिल (SIC) वास्तव में भारत के बेहतर शिक्षा के लिए एक पहल है, जिसका मकसद स्कूलों के साथ इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरियल के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है.

भविष्य की चुनौतियों के लिए रहे हर बच्चा तैयार

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “स्कूलों में एसआईसी की स्थापना राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को कायम करने के साथ, स्थाई तरीके से स्कूली शिक्षा स्तर पर विचारधारा, अलग करने की सोच, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरियल को बढ़ावा देने के लिए एक कदम है. ” मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग की सचिव अनीता करवाल ने कहा, “हम जिस जनसांख्यिकीय हिस्से की बात करते हैं वह 2047 तक उपलब्ध है. हम नहीं जानते कि भविष्य में क्या चुनौतियां हैं और इसीलिए यह बेहद अहम है कि हर बच्चा ना सिर्फ रचनात्मक हो, बल्कि इनोवेशन के लिए भी हमेशा तैयार रहे.”

उन्होंने आगे कहा, “हमें स्कूल किताबों से आगे जाना होगा, जो कि नई क्षमताओं को विकसित करने का एक जरिया है.” करवाल ने माता-पिता और शिक्षकों से बच्चों को उनके आसपास जो हो रहा है उसके करीब लाने और हर उस चीज में भाग लेने का आग्रह किया जो उनकी क्षमताओं और कौशल को प्रोत्साहित करने के साथ ही उसे और भी विकसित करे. बच्चों की शिक्षा के साथ-साथ उनके स्किल को भी डिवेपलप करने के लिए इसकी शुरुआत की गई है. जो आने वाले समय में एक अहम भूमिका निभाएगा.

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स्कूल इनोवेशन काउंसिल के कार्य

उन्होंने कहा कि नया नेशनल सिलेबस (National Curriculum) ढांचा बेहद कम, लेकिन जरूरी पाठ्यक्रम पेश करेगा, ताकि बच्चे पढ़ाई के अलावा 21वीं सदी के कौशल को भी विकसित कर सकें. स्कूली बच्चों के भीतर भी ये सारी बातें किताबी ज्ञान के साथ ही विकसित होती जाएंगी. कक्षाओं में इनोवेशन को बढ़ावा देना चाहिए और परीक्षाएं इस तरह से आयोजित करनी चाहिए जो रटने पर आधारित न हों.

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