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Successful Youth Farmer: चार साल पहले कोलकाता में मजदूरी करने वाले तापस आज दूसरों को दे रहे रोजगार

देवघर के सफल युवा किसान तापस दास.

Image Credit source: TV9 Digital

Successful Youth Farmers: देवघर जिले के बंसभूटिया गांव के रहने वाले युवा किसान तपस दास आज अपने गांव के आस-पास खेती के क्षेत्र में एक जाना-पहचाना नाम है. मजदूरी करके अपना पेट पालने वाले तापस दास की तकदीर कृषि से बदल गयी है. आज वह लाखों रुपए प्रतिवर्ष कमा रहे हैं.

“कृषि में तकदीर को बदलने की ताकत होती है और आज मेरी तकदीर बदल गई है. तभी तो चार साल तक पैसे कमाने के लिए कोलकाता जाकर मजदूरी करना पड़ता था, आज हम खुद अपने गांव के लोगों को काम दे रहे हैं”. यह कहना है झारखंड के एक सफल युवा किसान (Youth Farmers) तापस दास का. जिन्होंने खेती-बारी के जरिए महज चार साल में अपनी जिंदगी में यह महत्वपूर्ण बदलाव लाया है. तापस दास आज अपने परिवार के साथ अपने गांव-घर में खुशहाल जीवन जी रहे हैं. आस-पास के गांव के लोगों के बीच उनकी अब अच्छी पहचान है. उनकी सफलता की कहानी (Success Story) की लोग तारीफ कर रहे हैं.

देवघर जिले के सोनारायठाड़ी ब्लॉक में आने वाले बंसभूटिया गांव के युवा किसान तापस दास बताते हैं कि पहले पैसे कमाने के लिए उन्हें बाहर जाना पड़ता था. वो कोलकाता में रहकर दैनिक मजदूरी करते थे. अधिक पढ़े लिखे नहीं होने के कारण इसके अलावा कोई दूसरा काम नहीं मिलता था. फिर चार साल पहले जब वो अपने गांव में आये तो वहां उनका ‘प्रवाह’ नाम की एक गैर सरकारी संस्था से संपर्क हुआ. जहां पर उन्हें खेती-बारी से संबंधित जानकारी मिली. तापस दास ने इसमें रुचि दिखाई, तो उन्हें फिर उन्नत कृषि का प्रशिक्षण (Agriculture Training) मिला. इसके बाद वो खेती करने लगे.

बागवानी से हुई शुरुआत

तापस बताते हैं कि उन्होंने सबसे पहले बागवानी से शुरुआत की. अपने बगान में उन्होंने नींबू, काजू , अमरुद और आम के पेड़ लगाए हैं. दो एकड़ क्षेत्र में उन्होंने बागवानी की है. फिलहाल उनके बगान से अमरूद और काजू का उत्पादन हो रहा है. काजू के चार पेड़ से उन्हें 10 किलो उत्पादन हो जाता है, जिसे वो घर में ही खाते हैं. इसके अलावा अमरूद को बाजार में बेचते हैं. इससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है. फल से पहले उन्होंने इमारती लकड़ियों के पौधे भी लगाएं थे.

करते हैं जैविक खेती

तापस दास बताते हैं कि बागवानी करने के बाद वो सब्जियों की खेती करने लगे. उनके पास खुद की दो एकड़ जमीन है. जिसमें वो सब्जियों और धान की खेती करते हैं. इसके अलावा वो लीज पर जमीन लेकर खेती करते हैं. सब्जियों में वो मिर्च. टमाटर, बैंगन, कद्दू की खेती कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वो और बेहतर खेती करना चाहते हैं पर उनके पास सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है. दूसरे के कुएं से पानी मांगकर सिंचाई करना पड़ता है. ड्रिप इरिगेशन लगवाने के लिए भी दो बार आवेदन दे चुके हैं पर अभी तक उनके खेत में ड्रिप इरिगेशन नहीं लगा है. इसलिए उन्हें फ्लड विधि द्वारा ही सिंचाई करना पड़ता है. वो जैविक खेती के लिए खुद से केंचुआं खाद और अन्य जैविक खाद बनाते हैंं.

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खेती और बागवानी से इतनी होती है कमाई

‘प्रवाह’ सस्था द्वारा गांव में किसानों को जैविक खेती करने के लिए प्रोतसाहित किया जाता है. साथ ही किसानों को उन्नत किस्म के पौधे मिल सके यह भी प्रयास संस्था का होता है. इसके तहत तापस दास को एक संस्था की तरफ से एक पॉलीहाउस दिया गया है. जहां पर वो नर्सरी तैयार करते हैं. आस-पास के गांवों और बंसभूटिया गांव के किसान आकर सब्जियों के उन्नत किस्म के पौधे ले जाते हैं. इससे भी उन्हें अच्छी कमाई होती है. तापस अब बताते हैं कि खेती करके सच में उनकी तकदीर बदल गई तब ही तो आज तीन से चार लोगों को काम दे रहे हैं.

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