Wed. Feb 8th, 2023
USCIRF की रिपोर्ट में हिन्दुस्तान में अल्पसंख्यकों को दबाने की कही गई बात, भारत ने जताया कड़ा ऐतराज, कहा- आपमें समझ की कमी

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची.

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विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची (Arindam Bagchi) ने कहा, ‘अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने भारत के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और गलत टिप्पणियां की हैं.’

भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की एक रिपोर्ट को ‘पक्षपाती’ और पूरी तरह से ‘गलत’ करार दिया है. इस रिपोर्ट को लेकर भारत (India) ने यूएससीआईआरएफ की कड़ी आलोचना की है. भारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने अपने एक बयान में USCIRF की रिपोर्ट को ‘मोटिवेटेड एजेंडा’ बताया और कहा कि “इस रिपोर्ट में भारत के लोकतांत्रिक लोकाचार तथा बहुलता की समझ का अभाव है.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची (Arindam Bagchi) ने इस USCIRF की रिपोर्ट को ‘पक्षपाती’ और ‘त्रुटिपूर्ण’ बताया. दरअसल, इस रिपोर्ट में राष्ट्रपति जो बाइडेन के प्रशासन को धार्मिक स्वतंत्रता के दर्जे के संबंध में भारत, चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और 11 अन्य देशों को “खास चिंता वाले देशों” की लिस्ट में रखने की सिफारिश की गई है. यूएससीआईआरएफ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘भारत में अल्पसंख्यकों की आवाज़ को दबाने का प्रयास किया जाता है. अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करने वालों को भी दबाया जाता है और अगर उनकी कोई वकालत करता है, तो उनका भी “दमन” किया जाता है.

अरिंदम बागची ने की USCIRF की आलोचना

अरिंदम बागची ने कहा, ‘अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग (USCIRF) ने भारत के खिलाफ पक्षपातपूर्ण और गलत टिप्पणियां की हैं. इस तरह की टिप्पणियां यह दिखाती हैं कि उनमें भारत और इसके संवैधानिक ढांचे, इसकी बहुलता तथा देश के लोकतांत्रिक लोकाचार की समझ नहीं हैं.’ प्रवक्ता ने आगे कहा, ‘दुख की बात है कि USCIRF अपने ‘मोटिवेटेड एजेंडा’ के लिए बार-बार अपनी रिपोर्टों और बयानों में तथ्यों को गलत तरीके से पेश करती रहती है. इस तरह की रिपोर्ट्स केवल संगठन (यूएससीआईआरएफ) की ‘विश्वसनीयता’ और ‘निष्पक्षता’ पर चिंताओं को बढ़ावा देती हैं.

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अमेरिकी संगठन ने भी रिपोर्ट को बताया ‘पक्षपाती’

इससे पहले, प्रतिष्ठित भारतीय-अमेरिकियों के एक ग्रुप ने भी USCIRF की वार्षिक रिपोर्ट पर नाखुशी जताई थी और आरोप लगाया था कि यह भारत के खिलाफ पक्षपातपूर्ण है. अमेरिका स्थित नीति अनुसंधान एवं जागरूकता संस्थान फाउंडेशन फॉर इंडिया एंड इंडियन डायस्पोरा स्टडीज (एफआईआईडीएस) के सदस्य खंडेराव कंड ने आरोप लगाया, ‘भारत पर यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट पक्षपातपूर्ण है.’ उन्होंने कहा कि भारत का नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) ऐसा कानून है जो उन शरणार्थियों को नागरिकता देता है जो पाकिस्तान, अफगानिस्तान तथा बांग्लादेश से धार्मिक रूप से प्रताड़ित रहे हैं, लेकिन यह मानने के बजाय इसे लोगों की नागरिकता छीनने के तौर पर दिखाया गया. खंडेराव ने आगे कहा कि इसी तरह रिपोर्ट में यह जिक्र नहीं किया गया है कि राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) भारत की अदालत के आदेश के अनुरूप लागू की जा रही है और लोकतांत्रिक देशों में यह आम है.

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